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Kisan Sansad: दिल्ली में प्रदर्शन की इजाजत से गरमाएगा किसान आंदोलन, मानसून सत्र में सरकार पर बढ़ेगा दबाव

Kisan Sansad: किसानों को कई शर्तों के साथ दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति दे दी गई है। माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान किसानों के प्रदर्शन से एक बार फिर सरकार पर दबाव बढ़ेगा।

Anshuman Tiwari

Anshuman TiwariWritten By Anshuman TiwariShivaniPublished By Shivani

Published on 22 July 2021 4:04 AM GMT

Kisan Sansad
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Concept Image (Design Photo)

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Kisan Sansad: संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session 2021) के दौरान एक बार फिर किसान आंदोलन (Kisan Andolan) गरमाने के प्रबल आसार दिखने लगे हैं। गणतंत्र दिवस के बाद आज पहली बार दिल्ली में किसानों की एंट्री होगी। करीब छह महीने पहले गणतंत्र दिवस के दिन लाल किले पर हुई हिंसा के बाद पहली बार किसानों (Farmers Protest In Delhi) को दिल्ली में प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई है।

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों ने पिछले साल से ही दिल्ली के सीमाओं पर डेरा डाल रखा है। सरकार के साथ कई दौर की बातचीत विफल होने के बाद किसानों ने गत 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालकर अपनी ताकत दिखाई थी मगर इस दौरान हुई हिंसा की घटनाओं के बाद किसानों की दिल्ली में एंट्री बैन कर दी गई थी।

किसानों को कई शर्तों के साथ दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति दे दी गई है। माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान किसानों के प्रदर्शन से एक बार फिर सरकार पर किसान संगठनों की मांगों को मानने का दबाव बढ़ेगा।

कई शर्तों के साथ प्रदर्शन की इजाजत

दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने कई शर्तों के साथ किसानों को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी है। किसानों की भीड़ की आशंका को खत्म करने के लिए सिर्फ 200 किसानों को ही प्रदर्शन स्थल पर जुटने की अनुमति मिली है। यह अनुमति 22 जुलाई से 9 अगस्त तक के लिए दी गई है और प्रदर्शन का समय भी अथॉरिटी की ओर से तय कर दिया गया है। यह प्रदर्शन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक ही किया जा सकेगा। प्रदर्शन के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का भी पूरी तरह पालन करना होगा।


किसान संगठन कई दिनों से प्रदर्शन की अनुमति पाने की कोशिश में जुटे हुए थे मगर दिल्ली पुलिस की ओर से इसकी अनुमति नहीं दी जा रही थी। गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा और संसद के मानसून सत्र के मद्देनजर दिल्ली पुलिस किसानों के बवाल की आशंका से घबरा रही थी मगर आखिरकार किसान संगठनों के दबाव के कारण अथॉरिटी और दिल्ली पुलिस को को प्रदर्शन करने की अनुमति देनी पड़ी।

पुलिस सुरक्षा में ले जाए जाएंगे किसान

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलने वाला है मगर किसानों को 9 अगस्त तक ही प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई है। जानकार सूत्रों का कहना है कि सिंधु बॉर्डर से किसानों के जत्थे को पुलिस एस्कॉर्ट में प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर तक ले जाने की व्यवस्था की गई है ताकि प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले किसान प्रदर्शन स्थल से इतर कहीं और न जा सकें।

संसद का मानसून सत्र चलने के कारण दिल्ली पुलिस को इस बात का डर है कि कहीं किसान संसद पर पहुंच गए तो स्थिति बिगड़ सकती है। इसी कारण पुलिस एस्कॉर्ट में किसानों को प्रदर्शन स्थल तक ले जाने की व्यवस्था की गई है। प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली जिला को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

जंतर-मंतर पर चलेगी किसान संसद (Kisan Sansad In Jantar Mantar)

जंतर मंतर पर आज से होने वाले प्रदर्शन के दौरान किसान दिनभर अपनी अलग संसद चलाएंगे और इस दौरान सरकार पर नए कृषि कानूनों को वापस लेने का दबाव डाला जाएगा। प्रदर्शन से पहले किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे संसद भवन की ओर नहीं जाएंगे मगर जंतर मंतर से ही अपनी पुरानी मांग दोहराएंगे कि उन्हें कृषि कानूनों को रद्द करने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।


राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ने कहा कि किसान पहचान पत्र लगाकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हमने दिल्ली पुलिस को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का आश्वासन दिया है और हम अपने वादे पर कायम रहेंगे।

दोनों पक्षों के अड़ जाने से मामला अनसुलझा

नए कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के कारण अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सका है। किसान संगठनों का कहना है कि कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए जबकि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सरकार किसान संगठनों के सुझाव पर कृषि कानूनों में बदलाव करने के लिए तैयार है मगर कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द नहीं किया जाएगा।

दोनों पक्षों के बीच कृषि कानूनों को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है मगर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। यही कारण है कि अभी तक आंदोलन खत्म करने की दिशा में कामयाबी नहीं मिल सकी है।

कृषि कानूनों पर दबाव में सरकार

जानकारों का कहना है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान राजधानी में किसानों के प्रदर्शन से सरकार पर भी दबाव बढ़ेगा। दूसरी ओर विपक्ष ने कृषि कानूनों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रखी है। मानसून सत्र की शुरुआत से ही पेगासस जासूसी कांड को लेकर माहौल गरमा जाने के कारण अभी तक इस मामले की ही गूंज सुनाई पड़ रही है मगर आने वाले दिनों में विपक्ष कृषि कानूनों को लेकर भी केंद्र सरकार की घेरेबंदी करेगा।


कांग्रेस की अगुवाई में विभिन्न विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का फैसला किया है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अकाली दल ने खासतौर पर इस मामले को लेकर आक्रामक रुख अपना रखा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार विपक्ष की ओर से पड़ने वाले इस दबाव से कैसे निपटती है।

Shivani

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