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कृषि कानूनों की वापसी से बदलेंगे सियासी समीकरण, जानिए पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में क्या होगा असर

Krishi Kanoon Ki Wapsi Ka Asar: गुरु नानक देव जी की जयंती के मौके पर मोदी सरकार ने कृषि कानूनों की वापसी का एलान किया है। इससे सियासी समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।

Anshuman Tiwari
Updated on: 19 Nov 2021 7:31 AM GMT
कृषि कानूनों की वापसी से बदलेंगे सियासी समीकरण, जानिए पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में क्या होगा असर
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अमित शाह-नरेंद्र मोदी-जेपी नड्डा (फोटो साभार- सोशल मीडिया) 

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Krishi Kanoon Ki Wapsi Ka Asar: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के तीनों कृषि कानून (New Farm Laws) वापस लेने के एलान का बड़ा सियासी असर होने की संभावना जताई जा रही है। किसान आंदोलन के एक साल (Kisan Andolan Ka Ek Saal) पूरा होने के ठीक एक सप्ताह पूर्व गुरु नानक देव जी की जयंती (Guru Nanak Jayanti) के पवित्र दिन प्रधानमंत्री ने यह बड़ा एलान (PM Modi Ka Elan) किया है।

सियासी जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री की इस घोषणा से सियासी समीकरण (Siyasi Samikaran) भी बदलेंगे। खास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western Uttar Pradesh), पंजाब (Punjab) और हरियाणा (Haryana) के सियासी समीकरण प्रधानमंत्री की इस घोषणा (PM Modi Ki Ghoshna) से काफी हद तक प्रभावित होंगे।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) ने पिछले दिनों भाजपा (BJP) के साथ हाथ मिलाने का संकेत दिया था, मगर इसके साथ ही उन्होंने कृषि कानूनों की वापसी की शर्त भी रखी थी। अब माना जा रहा है कि कैप्टन और भाजपा के बीच चुनावी गठजोड़ (Amarinder Singh And BJP Alliance) का रास्ता साफ हो गया है। दूसरी ओर इस मुद्दे पर अकाली दल (Shiromani Akali Dal) के रुख का अभी इंतजार करना होगा। अकाली दल ने कृषि कानूनों के खिलाफ ही एनडीए से बाहर निकलने और भाजपा के साथ गठजोड़ तोड़ने का फैसला किया था। अभी अकाली दल ने इस बाबत अपना रुख साफ नहीं किया है।

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

सपा और रालोद को जवाब देने की कोशिश

2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी खासी सियासी बढ़त हासिल हुई थी। प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों (Vidhan Sabha Chunaav 2022) में कृषि कानूनों की वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा (BJP) को बड़ा सियासी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही थी। समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा की कड़ी घेराबंदी कर रखी है। अब प्रधानमंत्री की ओर से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के एलान के बाद इन दोनों दलों को भी नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी होगी।

प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर किसानों ने जमकर जश्न (Kisano Ka Jashan) मनाया। कृषि कानूनों पर किसानों की नाराजगी के कारण भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बैकफुट पर नजर आ रही थी। अब भाजपा आक्रामक रणनीति के जरिए सपा और रालोद को जवाब देने की पूरी कोशिश करेगी। जाट बिरादरी के समर्थन से अपनी ताकत दिखा चुकी भाजपा एक बार फिर जाटों का समर्थन हासिल करने की मुहिम छेड़ेगी। ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि सपा और रालोद की ओर से भाजपा को किस तरह जवाब दिया जाता है।

पंजाब नेता प्रधानमंत्री मोदी संग (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

पंजाब में भाजपा खुलकर उतरेगी मैदान में

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब में प्रधानमंत्री के एलान का बड़ा असर दिख सकता है। कृषि कानूनों की वजह से पंजाब में भाजपा नेताओं को किसानों के प्रबल विरोध का सामना करना पड़ा है। नाराज किसानों ने कई स्थानों पर भाजपा नेताओं को बंधक तक बना लिया। पुलिस के दखल से किसी तरह भाजपा नेताओं को किसानों की नाराजगी से बचाया जा सका।

माना जा रहा है कि पंजाब में अब भाजपा नेता खुलकर चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतरेंगे। पिछले दिनों पंजाब के भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान करतारपुर कॉरिडोर के साथ ही कृषि कानूनों के मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। करतारपुर कॉरिडोर को पहले ही खोला जा चुका है और अब प्रधानमंत्री ने कृषि कानूनों की वापसी का बड़ा एलान किया है।

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

कैप्टन और अकाली दल का मिल सकता है साथ

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अलग राजनीतिक दल बनाकर पंजाब के विधानसभा चुनाव में उतरने की घोषणा कर रखी है। उनका कहना है कि वे चुनावों में भाजपा के साथ गठजोड़ करेंगे मगर इसके साथ ही उन्होंने कृषि कानूनों की वापसी की शर्त भी लगा रखी थी। प्रधानमंत्री के एलान के बाद अब कैप्टन और भाजपा में गठजोड़ का रास्ता खुल गया है। प्रधानमंत्री के एलान के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तुरंत ट्वीट करके इस घोषणा का स्वागत किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।

पंजाब में अकाली दल के रुख का भी इंतजार किया जा रहा है क्योंकि अकाली दल और भाजपा का पंजाब की सियासत में मजबूत साथ रहा है। केवल कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों के बीच ठन गई थी और आखिरकार अकाली दल ने भाजपा के साथ गठजोड़ तोड़ दिया था। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद अकाली दल के भी साथ आने की संभावना जताई जा रही है। यदि पंजाब में यह गठजोड़ एक बार फिर बन गया तो निश्चित रूप से कांग्रेस को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

मनोहर लाल खट्टर (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

हरियाणा में कम होंगी खट्टर की मुसीबतें

कृषि कानूनों का सबसे ज्यादा विरोध पंजाब और हरियाणा में किया जा रहा था। हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को किसानों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ रहा था। कृषि कानूनों के खिलाफ करनाल में जबर्दस्त हिंसा हुई थी और राज्य के कई अन्य इलाकों में भी भाजपा नेताओं के काफिले पर हमले हुए थे। किसान संगठनों की ओर से कई इलाकों में भाजपा नेताओं के एंट्री पर बैन भी लगा दिया गया था।

सहयोगी दल जननायक जनता पार्टी के नेता और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला भी कृषि कानूनों की वापसी को लेकर भाजपा पर दबाव बना रहे थे। अब कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद निश्चित रूप से मुख्यमंत्री खट्टर की मुसीबतें भी कम हुई हैं। भाजपा खुद को मजबूत बनाने के साथ ही अब सहयोगी दलों को समझाने में भी कामयाब होगी।

हरियाणा और पंजाब से जुड़े किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत तो जरूर किया है मगर उनका यह भी कहना है कि उन्हें यह एलान पहले ही कर देना चाहिए था। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद किसान संगठनों की ओर से कई स्थानों पर जश्न मनाया गया और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भाजपा इसका सियासी फायदा उठाने की पूरी कोशिश करेगी।

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Shreya

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