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विपक्ष का मोर्चा बनाने की ममता की मुहिम पर उठे सवाल, कांग्रेस का साझा कार्यक्रम पर जोर

Opposition Unity: ममता 2024 की सियासी जंग के लिए विपक्षी दलों की गोलबंदी में जुटी हैं मगर ममता की मुहिम को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।

Anshuman Tiwari

Anshuman TiwariWritten By Anshuman TiwariShivaniPublished By Shivani

Published on 31 July 2021 7:34 AM GMT

Mamata Banerjee meets Sonia Gandhi
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सोनिया और ममता की मुलाकात (Photo Twitter)

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Opposition Unity : पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) पांच दिनों के दिल्ली प्रवास के बाद कोलकाता (Mamata Delhi Visit) लौट गई हैं मगर जाने से पहले उन्होंने कहा कि वे अब हर दो महीने में दिल्ली आती रहेंगी। दरअसल, ममता 2024 (Mission 2024) की सियासी जंग के लिए विपक्षी दलों (Vipakshi Morcha) की गोलबंदी में जुटी हैं मगर ममता की मुहिम को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के खिलाफ विपक्षी दलों के चेहरे को लेकर फंसा पेंच अभी तक नहीं सुलझ सका है। दिल्ली प्रवास के दौरान ममता मीडिया के सवालों के दौरान नेतृत्व के मुद्दे को लगातार टालने में जुटी रहीं।

इस बीच कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने विपक्ष की एकजुटता की मुहिम को करारा झटका दिया है। मोइली का कहना है कि सिर्फ मोदी विरोध के नाम पर विपक्षी दलों की एकजुटता का प्रयास करना बड़ी चूक साबित होगी। उन्होंने न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाने पर जोर दिया है ताकि लोगों को बेहतर विकल्प का भरोसा दिया जा सके। मोइली की टिप्पणी को विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं का भी समर्थन मिला है।

विपक्ष के चेहरे का सवाल अनसुलझा

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बुरी तरह हराने के बाद पहली बार दिल्ली पहुंचीं ममता बनर्जी ने विपक्ष के कई बड़े नेताओं के साथ मुलाकात की। इन मुलाकातों के दौरान ममता ने भाजपा के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता पर जोर दिया और एक बड़ा मोर्चा बनाने की रणनीति पर चर्चा की। ममता ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और आनंद शर्मा, गीतकार जावेद अख्तर, अभिनेत्री शबाना आजमी और कई अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों से मुलाकात की। ममता को एनसीपी के मुखिया शरद पवार से भी मिलना था मगर किन्हीं कारणों वश दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो सकी।


ममता की दिल्ली यात्रा के दौरान उनसे कई बार मोदी के खिलाफ विपक्ष के चेहरे पर सवाल पूछे गए मगर उन्होंने हर बार इस सवाल को टालने का प्रयास किया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेतृत्व का मुद्दा कोई बड़ा सवाल नहीं है। इसे समय आने पर हल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात विपक्ष का मोर्चा बनाने की है। ममता ने अपनी दिल्ली यात्रा को सफल बताते हुए कहा कि मैं अब हर दी महीने में दिल्ली आती रहूंगी और विपक्ष के नेताओं से आगे भी चर्चा जारी रहेगी।

मोदी विरोध के नाम एकजुटता बनेगी भूल

वैसे विपक्ष का मोर्चा बनाने की ममता की मुहिम को लेकर अब विपक्ष से ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली का कहना है कि सिर्फ मोदी विरोध के नाम पर विपक्ष को एकजुट बनाने की कोशिश करना बड़ी भूल साबित हो सकती है। उन्होंने विपक्षी दलों के न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर जोर दिया है।


मोइली का कहना है कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम के जरिए ही लोगों को बेहतर विकल्प का भरोसा दिया जा सकता है। मोइली की इस टिप्पणी का विपक्ष के दूसरे दलों ने भी समर्थन किया है। उनका कहना है कि सिर्फ मोदी विरोध के नाम पर विपक्ष के एकजुट होने का अच्छा संदेश नहीं जाएगा बल्कि विपक्ष को मजबूत विकल्प के रूप में खुद को पेश करना होगा।

राजद ने भी किया कांग्रेस का समर्थन

राजद के मनोज झा का कहना है कि भाजपा से लड़ाई लड़ने के लिए देशव्यापी मोर्चा होना तो जरूरी है मगर इसके लिए साझा कार्यक्रम भी बनाया जाना चाहिए। वैसे उनका यह भी कहना है कि सिर्फ मोदी को हटाने के लिए विपक्ष को एकजुट करने की बात किसी भी नेता ने नहीं कही है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थानों को बचाने पर जोर देते हुए कहा है कि साझा कार्यक्रम के जरिए ही लोगों का भरोसा जीता जा सकता है।


अभी से ही कदम उठाना जल्दबाजी

शिरोमणि अकाली दल के नेता नरेश गुजराल का कहना है कि 2024 के लिए अभी से ही विपक्ष का मोर्चा बनाने की बात जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि अभी तीन साल का समय बचा है और इस लंबे समय के दौरान स्थितियों में काफी बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और खासकर उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे पर हर किसी की नजर टिकी हुई है इसलिए हमें पहले विधानसभाओं के चुनावों के नतीजे का इंतजार करना चाहिए।

सियासी जानकारों का कहना है कि विपक्ष को अतीत के अनुभवों से सबक लेना चाहिए। सिर्फ मोदी विरोध के नाम पर एकजुट होने से नकारात्मक नतीजे भी सामने आ सकते हैं। जैसा कि इंदिरा गांधी के समय में हुआ था। सिर्फ इंदिरा विरोध के नाम पर सभी विपक्षी दलों ने हाथ मिला लिया था मगर बाद में मतभेद उभरने पर विपक्षी मोर्चा टूट गया था और इंदिरा गांधी ने एक बार फिर जीत हासिल कर ली थी।

नकवी ने कसा ममता पर तंज

इस बीच केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली सभी की है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में तो कोई भी दौरा नहीं कर पाता मगर दिल्ली के साथ ऐसा नहीं है। पश्चिम बंगाल में तो ममता की सरकार है मगर कहीं भी जाने पर हिंसा हो जाती है और लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाता है।


नकवी ने कहा कि ममता की पुलिस के काम करने के अंदाज से किसी के लिए भी वहां का दौरा करना काफी मुश्किल काम है। नकवी ने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली के साथ ऐसा नहीं है। ममता जी दिल्ली खूब आइए और अपनी मुहिम को परवान चढ़ाइए।

Shivani

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