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President Election: BJD ने बढ़ाई NDA की चिंता, नवीन पटनायक ने सपोर्ट पर नहीं भरी हामी

President Elections: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल जुलाई में समाप्त होने वाला है। ऐसे में सियासी हलकों में नए राष्ट्रपति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

Anshuman Tiwari
Written By Anshuman TiwariPublished By Monika
Updated on: 1 May 2022 5:28 AM GMT
Naveen Patnaik
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नवीन पटनायक (photo: social media )

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President Election: उड़ीसा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) के नेता नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) ने राष्ट्रपति चुनाव (President Election) के मुद्दे पर बड़ा बयान देकर सस्पेंस बढ़ा दिया है। नवीन पटनायक का बयान भाजपा (BJP) की चिंता बढ़ाने वाला है क्योंकि उनका कहना है कि उनकी पार्टी उम्मीदवार देखकर ही समर्थन देने के बारे में आखिरी फैसला करेगी। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए (NDA) उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए बीजू जनता दल के समर्थन की जरूरत है मगर नवीन पटनायक ने एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करने के मुद्दे पर हामी नहीं भरी है।

2024 की सियासी जंग के लिए विपक्षी दलों की ओर से तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। इस मुद्दे पर नवीन पटनायक का कहना है कि समय आने पर उनकी पार्टी इस मुद्दे पर कोई फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि अभी इस मुद्दे पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। वैसे इसके साथ उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसी गठबंधन से बंधने की जगह हमारे लिए स्वतंत्र रहना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

एनडीए को नवीन के समर्थन की जरूरत

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल जुलाई में समाप्त होने वाला है। ऐसे में सियासी हलकों में नए राष्ट्रपति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार को जीत मिलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं मगर एनडीए उम्मीदवार की जीत तभी पक्की हो पाएगी जब उसे बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस का समर्थन मिले। इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए 5,49,452 मतों की जरूरत होगी और एनडीए के पास अभी इतने मत नहीं हैं। एनडीए के पास इस आंकड़े से करीब 9000 मत कम है। ऐसे में बीजू जनता दल एनडीए के लिए बड़ा मददगार साबित हो सकता है।

लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर बीजू जनता दल की बड़ी ताकत मानी जाती है क्योंकि उसके पास 21 सांसद हैं। उड़ीसा विधानसभा में भी उसकी बड़ी ताकत है। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर नवीन पटनायक का रुख काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है मगर उनका कहना है कि वह उम्मीदवार देखकर ही इस बाबत आखिरी फैसला करेंगे। अभी तक राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए और विपक्षी मोर्चे के उम्मीदवारों का फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में नवीन पटनायक का रुख बाद में ही स्पष्ट होने की संभावना है।

पांच वर्षों में सियासी हालात बदले

रामनाथ कोविंद को 2017 में देश का राष्ट्रपति चुना गया था मगर 2017 के पांच साल बाद अब देश के सियासी हालात बदल चुके हैं। रामनाथ कोविंद 65.65 फ़ीसदी वोट हासिल करके देश का राष्ट्रपति बनने में कामयाब हुए थे जबकि विपक्षी उम्मीदवार मीरा कुमार को 34.35 मत मिले थे। पिछले 5 वर्षों के दौरान देश की सियासी स्थितियां बदल चुकी हैं। 2017 के दौरान देश के 21 राज्यों में एनडीए की सरकारें थीं जबकि मौजूदा समय में यह आंकड़ा घटकर 17 राज्यों पर सिमट गया है।

तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे बड़े राज्य एनडीए के हाथ से निकल चुके हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी एनडीए की सरकार नहीं है। इसके साथ ही भाजपा के कई सहयोगी दलों ने भी उससे किनारा कर लिया है। इनमें विशेष रूप से शिवसेना, अकाली दल और टीडीपी जैसे सहयोगी दल शामिल है। वैसे बिहार में जरूरी सियासी हालात बदले हैं और भाजपा ने एक बार फिर जदयू के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई है।

क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्वपूर्ण

बदले हुए सियासी हालात में एनडीए उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा को बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन की जरूरत है। 2017 के विधानसभा चुनाव में एनडीए उम्मीदवार को बीजू जनता दल का समर्थन मिला था मगर अब नवीन पटनायक का कहना है कि वे उम्मीदवार को देखकर ही फैसला करेंगे।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी दलों की ओर से एक बार फिर साझा उम्मीदवार उतारने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में नवीन पटनायक का रुख काफी महत्वपूर्ण हो गया है। राष्ट्रपति चुनाव में क्षेत्रीय दलों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों की सरकारें हैं और संसद में भी उनकी ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में अब सबकी निगाहें नवीन पटनायक के रुख पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि एनडीए की ओर से नवीन पटनायक का समर्थन हासिल करने की जीतोड़ कोशिशें की जाएंगी।

Monika

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