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Punjab Election 2022: अपने सियासी गढ़ में ही पहली बार फंसे कैप्टन अमरिंदर, पटियाला सीट पर मिल रही कड़ी चुनौती

पटियाला शहर विधानसभा सीट पर कैप्टन की मजबूत पकड़ रही है। मगर, इस बार उनके विपक्षी उम्मीदवारों ने तगड़ी घेराबंदी कर रखी है। अपने गढ़ में ही कैप्टन की सियासी राह आसान नहीं मानी जा रही है।

Anshuman Tiwari
Written By Anshuman TiwariPublished By aman
Updated on: 15 Feb 2022 8:47 AM GMT
captain amarinder singh
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Amarinder Singh likely to be new Governor of Maharashtra (Image: Social Media)

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Punjab Election 2022 : पंजाब के विधानसभा चुनाव (Punjab Election 2022) में इस बार कई दिग्गज नेता अपने क्षेत्र के सियासी रण में कड़े मुकाबले में फंस गए हैं। इन नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Capt Amarinder Singh) भी शामिल हैं। पटियाला शहर विधानसभा सीट (Patiala (Urban) constituency) पर कैप्टन की मजबूत पकड़ रही है। मगर, इस बार उनके विपक्षी उम्मीदवारों ने तगड़ी घेराबंदी कर रखी है। अपने गढ़ में ही कैप्टन की सियासी राह आसान नहीं मानी जा रही है। करीब 50 साल लंबे सियासी जीवन में कैप्टन को पहली बार कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

कैप्टन के लिए सियासी हालात भी पूरी तरह बदले हुए हैं। इस बार वे भाजपा (BJP) के साथ गठबंधन करके चुनावी अखाड़े में कूदे हैं। इसलिए कांग्रेस (Congress) और आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के उम्मीदवार (Candidate) उनके खिलाफ पूरा जोर लगाए हुए हैं। अकाली दल (Akali Dal) ने भी मजबूत उम्मीदवार उतारकर उनकी घेराबंदी की है। कैप्टन के करीबियों का भी मानना है अपने सियासी जीवन में कैप्टन इस तरह कड़े मुकाबले में कभी नहीं फंसे थे।

इस बार नहीं दिख रहा समर्थकों का हुजूम

पटियाला विधानसभा सीट को कैप्टन का गढ़ माना जाता है और इस सीट पर पिछले 20 साल से कैप्टन का कब्जा रहा है मगर इस बार सियासी स्थितियां पूरी तरह अलग हैं। कैप्टन अभी तक कांग्रेस उम्मीदवार (Congress candidate) के रूप में इस सीट पर जीतते रहे हैं। पहली बार वे अपनी नवगठित पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस (Punjab Lok Congress) के बैनर तले चुनाव मैदान में उतरे हैं। पहले के चुनावों में वे अपनी सीट को लेकर निश्चिंत रहा करते थे और राज्य के दूसरे क्षेत्रों में प्रचार किया करते थे, मगर इस बार उनकी सीट ही फंसी हुई दिख रही है। उनके मोती बाग पैलेस (Moti Bagh Palace) पर भी पहले की तरह समर्थकों और कार्यकर्ताओं का हुजूम नहीं दिख रहा है।

कैप्टन के करीबियों का भी मानना है कि अपने लंबे सियासी जीवन के दौरान कैप्टन इस तरह सियासी मुकाबले में नहीं फंसे थे। भाजपा से हाथ मिलाने के बाद वे राष्ट्रवाद के साथ ही डबल इंजन की सरकार के फायदे गिनाने में जुटे हुए हैं। पाकिस्तान से आतंकवाद को मिल रहे बढ़ावे की चर्चा करना भी वे नहीं भूलते। अपनी सभाओं में वे पीएम मोदी का जिक्र करते हुए उन्हें समर्थन देने की बात भी लगातार दोहराते हैं।

दूसरे दलों की ओर से तगड़ी घेराबंदी

इस बार के चुनाव में कैप्टन को अपनी सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से कड़ी चुनौती मिल रही है। आप ने अजीत पाल सिंह कोहली (Ajit Pal Singh Kohli) को चुनाव मैदान में उतारकर कैप्टन की घेराबंदी की है। कोहली के पिता और दादा भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं और उनके परिवार की क्षेत्र में अच्छी प्रतिष्ठा रही है। अजीत पाल का कहना है कि बादल और कैप्टन के बीच मैच फिक्सिंग को देखते हुए उन्होंने आप का दामन थामा है। उन्होंने कहा, कि इस बार जनता बदलाव चाहती है और और बदलाव के लिए सबसे मजबूत विकल्प आम आदमी पार्टी ही है। कांग्रेस की ओर से पूर्व मेयर विष्णु शर्मा (Vishnu Sharma) को चुनाव मैदान में उतारा गया है, जो लगातार कैप्टन पर पटियाला की अनदेखी के आरोप लगा रहे हैं। सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले हरपाल जुनेजा (Harpal Juneja) अकाली दल की ओर से कैप्टन को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। वे पिछले साल जून से ही प्रचार में जुटे हुए हैं। उन्होंने पूरे विधानसभा क्षेत्र को मथ डाला है।

2002 से चुनाव जीत रहे हैं कैप्टन

वैसे पटियाला शहरी विधानसभा सीट को कैप्टन का गढ़ माना जाता है और उन्होंने चार बार इस सीट पर जीत हासिल की है। उन्होंने सबसे पहले 2002 में इस सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2007, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी कैप्टन ने इस सीट पर जीत हासिल करते हुए विपक्षियों के हौसले पस्त किए थे। कैप्टन ने 2014 का लोकसभा चुनाव अमृतसर सीट से लड़ा था और इस चुनाव में भी उन्हें जीत हासिल हुई थी। कैप्टन के खिलाफ भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली चुनाव मैदान में उतरे थे, मगर कैप्टन ने यह मुकाबला आसानी से जीत लिया था। कैप्टन के इस्तीफा देने के बाद पटियाला विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया था जिसमें कैप्टन की पत्नी परनीत कौर ने बाजी मार ली थी। 2014 से 2017 तक कैप्टन की पत्नी ने ही पटियाला सीट का प्रतिनिधित्व किया।

पिछले चुनाव में मिली थी भारी जीत

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन ने पटियाला सीट पर बड़ी जीत हासिल की थी। उन्होंने आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी डॉ बलबीर सिंह को 52,407 मतों के भारी अंतर से हराया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन को 72,586 वोट हासिल हुए थे जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के डॉ बलबीर सिंह 20,179 वोट ही हासिल कर सके थे। यदि वोट शेयर की बात की जाए तो कैप्टन को 68.99 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे, जबकि आप उम्मीदवार को सिर्फ 19.18 फ़ीसदी मत ही मिले थे। अकाली दल का प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहा था और उसे 11.1 फ़ीसदी मत मिले हासिल हुए थे।

पिछले चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने वाले कैप्टन के लिए इस बार की सियासी राह आसान नहीं मानी जा रही है। पिछले चुनाव में वे कांग्रेस उम्मीदवार के साथ सीएम चेहरा भी थे मगर इस बार स्थितियां पूरी तरह बदली हुई है। हालांकि कैप्टन को अपने क्षेत्र के मतदाताओं पर पूरा भरोसा है मगर विपक्ष की ओर से की गई घेराबंदी ने उनकी राह कठिन बना दी है।

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