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राष्ट्रीय संकटः कोरोना को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पढ़ें हर एक अपडेट

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 मामलों में बेतहाशा वृद्धि को ‘‘राष्ट्रीय संकट’’ बताया है और कहा है कि वह ऐसी स्थिति में मूक दर्शक बना नहीं रह सकता।

Ramkrishna Vajpei

Ramkrishna VajpeiWritten By Ramkrishna VajpeiMonikaPublished By Monika

Published on 27 April 2021 12:47 PM GMT

राष्ट्रीय संकटः कोरोना को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पढ़ें हर एक अपडेट
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सुप्रीम कोर्ट (फोटो: सोशल मीडिया) 

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कोविड-19 मामलों (Covid-19 Cases) में बेतहाशा वृद्धि को ''राष्ट्रीय संकट'' (National Crisis) बताया है और कहा है कि वह ऐसी स्थिति में मूक दर्शक बना नहीं रह सकता। इसके साथ ही न्यायालय (Court) ने स्पष्ट किया कि कोविड-19 के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार करने पर उसकी स्वत: संज्ञान सुनवाई का मतलब हाई कोर्ट के मुकदमों को दबाना नहीं है। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर महामारी की स्थिति पर नजर रखने के लिए बेहतर स्थिति में है। इससे पहले इस पीठ को पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे लीड कर रहे थे। पीठ ने कोविड-19 से जुड़े मुद्दों जैसे आवश्यक दवाओं की आपूर्ति, टीकाकरण के तरीके, और लॉकडाउन का परीक्षण करने के लिए दर्ज स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही।

जस्टिस चंद्रचूड ने कहा कि हम इस मामले पर एक दो दिन में विचार कर सकते हैं ताकि हमें जवाब मिल जाएं। इस पर सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जवाब आज दाखिल कर दिया है। हो सकता है आपको अभी मिला न हो। कोर्ट ने संकेत दिया था कि यह राष्ट्र की लड़ाई है जो कि जवाबदेही की भावना से है। अगर हम सफल होते हैं तो राष्ट्र सफल होगा। यह राजनीतिक घमासान का समय नहीं है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इस कार्यवाही का उद्देश्य उच्च न्यायालय की कार्यवाही को रोकना नहीं है और अनुच्छेद 226 केवल मौलिक अधिकारों तक ही नहीं है। इस पर सालिसिटर जनरल ने कहा कि केरल और तमिलनाडु की प्रशंसा की गई है क्योंकि ऑक्सीजन की मांग कम हो गई है। यह AAP या BJP या किसी अन्य पार्टी के बारे में नहीं है।

हम पूरक भूमिका निभा रहे हैं

पीठ ने कहा हाईकोर्ट इस मामले को देखने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। लेकिन कुछ राष्ट्रीय मुद्दों पर शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता है क्योंकि कुछ मामले राज्यों के बीच समन्वय से संबंधित हो सकते हैं। पीठ ने कहा, ''हम पूरक भूमिका निभा रहे हैं, अगर उच्च न्यायालयों को क्षेत्रीय सीमाओं के कारण मुकदमों की सुनवाई में कोई दिक्कत होती है तो हम मदद करेंगे.''

सालिसिटर जनरल ने कहा केंद्र ने कभी किसी संवैधानिक कोर्ट का विरोध नहीं किया है चाहे वह सुप्रीम कोर्ट हो या हाईकोर्ट। हम किसी के क्षेत्राधिकार पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। आपको हमारे द्वारा उठाए गए कदमों का परीक्षण करना होगा। इसमें धारणा के कुछ मुद्दे हैं। यह 2020 की शुरुआत से हैं और किसी को भी दूसरी लहर का अनुमान नहीं था।

आपको हमारे द्वारा उठाए गए कदमों की जांच करनी होगी। धारणा के कुछ मुद्दे हैं। यह 2020 की शुरुआत से और किसी को भी दूसरी लहर का अनुमान नहीं था। हम सभी को गर्व होना चाहिए कि इस मुद्दे को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देखा जा रहा है और सभी राजनीतिक दल पार्टी लाइनों से अलग हटकर समन्वय कर रहे हैं। उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र प्रश्न में नहीं है, हम केवल युद्धस्तर पर कदम उठा रहे हैं।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा चूंकि एमिकस के वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे को छुट्टी दे दी गई है इसलिए हम अपने बोर्ड से दो वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति करेंगे। इसका उद्देश्य बस बोर्ड पर विभिन्न विचारों को प्राप्त करना है।

विभिन्न निर्माता अलग-अलग कीमतों में उद्धृत कर रहे

न्यायमूर्ति भट ने कहा टीकाकरण पर मूल्य निर्धारण के बारे में विभिन्न निर्माता अलग-अलग कीमतों में उद्धृत कर रहे हैं। पेटेंट अधिनियम की धारा 6 के तहत शक्तियां दी गई हैं। यह एक महामारी और राष्ट्रीय संकट है। यदि यह नहीं है, तो कृपया सुनवाई से पहले यह सब डाल दें।

न्यायमूर्ति ने कहा हमें अर्धसैनिक बलों के केंद्रीय संसाधनों में उपयोग के बारे में जानने की जरूरत है जिनके पास पैरामेडिक्स और सेना की सुविधाएं और सेना के डॉक्टर और रेलवे हैं, ये सामान्य सुविधाएं हैं जो संगरोध, टीकाकरण या बेड के लिए उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह का कहना था कि 73 वर्षों तक केंद्र और राज्यों के लिए वैक्सीन की कीमत एक समान रही है। पहली बार केंद्र और राज्य के लिए मूल्य में अंतर है। जहां तक ऑक्सीजन का संबंध है केंद्र तय कर सकता है लेकिन एक टास्क फोर्स में राज्य के मुख्य सचिव हो सकते हैं

राजस्थान के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा राष्ट्रीय योजना के तहत 125 एमटी ऑक्सीजन भिवाड़ी और राजस्थान से आता है। मैं मानता हूं कि अंतरराज्यीय मुद्दों के लिए सर्वोच्च न्यायालय एक मंच है। भारत में कल 1.29 लाख सक्रिय मामले थे लेकिन हमारा अनुमान कहता है कि 9 मई को ऑक्सीजन की मांग दोगुनी हो जाएगी।

ऑक्सीजन की मांग 9 मई तक दोगुनी

सिंघवी: हमारी सख्त जरूरत यह है जहां ऑक्सीजन की मांग 9 मई तक दोगुनी हो जाएगी। आईनॉक्स भिवाड़ी प्लांट चलाता है और उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के सामने भ्रामक बयान दिया है।

इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कोविड के हर मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है। आप एक औसत पर आए हैं।

सिंघवी ने कहा कि आईनॉक्स और मिस्टर मेहता को सुनकर उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया था। यदि कुछ स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है तो दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश प्रभावी हो जाता है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा आईनॉक्स ने कहा कि वे दिल्ली और राजस्थान में टैंकर ला रहे थे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि उसे उम्मीद है कि ऐसा कृत्य नहीं किया जाएगा। लेकिन यह नहीं माना जा रहा है कि राजस्थान के लिए 23 टैंकर बहुत कम हैं।

न्यायमूर्ति भट्ट ने कहा हम एक लाइन का आदेश दे सकते हैं और आप हाईकोर्ट जा सकते हैं जैसा हम कह रहे हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड ने सवाल किया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा। सिंघवी ने कहा हाईकोर्ट राज्यों को नहीं सुन रहा है। मै नहीं चाहता कि इस आर्डर को लेकर राष्ट्रीय हितों को अधिक नुकसान पहुंचे।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड ने कहा फिर हम इस माइक्रोमैनेजमेंट में क्यों जाएं। हाईकोर्ट जाइये और वास्तविक स्थिति स्पष्ट कीजिए। अगर आप अपील करना चाहते हैं तो करें।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने राज्यों को दिए ये निर्देश

अंत में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे उपर्युक्त बिंदुओं के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे के संबंध में गुरुवार शाम 6 बजे तक जवाब दाखिल करें। इससे यह पता चल सकेगा कि केंद्र को इस संबंध में क्या करने की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति भट ने सालिसीटर जनरल से कहा आप चाहते थे कि राज्यों के पास उनके आधारभूत ढांचे का संकेत हो। उन सभी को इसे आपके पास भेजने दें और आप हमारे समक्ष एक संकलन प्रस्तुत करें। मामले की सुनवाई अब 30 अप्रैल को होगी।

देश के कोविड-19 की मौजूदा लहर से जूझने के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर स्थिति पिछले दिनों स्वत: संज्ञान लिया है और कहा है कि वह ऑक्सीजन की आपूर्ति और कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं समेत अन्य मुद्दों पर "राष्ट्रीय योजना" चाहता है।

शीर्ष अदालत ने वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए ऑक्सीजन को इलाज का ''आवश्यक हिस्सा'' बताते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि काफी ''घबराहट'' पैदा कर दी गई है जिसके कारण लोगों ने राहत के लिए अलग अलग उच्च न्यायालयों में याचिकायें दायर कीं।

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