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World Day Against Child Labour 2021: बाल मजदूरों का गढ़ अफ्रीका, भारत के दो राज्यों में सबसे ज्यादा चाइल्ड लेबर

World Day Against Child Labour 2021: छोटे बच्चों से काम कराना बाल श्रम होता है। पढ़ने खेलने की उम्र में बच्चे मजदूरी करते, किसी दुकान में काम करते, लोगों के घरों में साफ सफाई करते दिख जाते हैं। लाचार और गरीबी से त्रस्त बच्चे बचपन से ही बाल श्रम जैसी समस्या का सामना करने लगते हैं।

Shivani

ShivaniWritten By Shivani

Published on 11 Jun 2021 11:45 AM GMT

World Day Against Child Labour 2021: बाल मजदूरों का गढ़ अफ्रीका, भारत के दो राज्यों में सबसे ज्यादा चाइल्ड लेबर
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मजदूरी करता बच्चा (Photo Social Media)

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World Day Against Child Labour 2021: बाल मजदूर, एक ऐसा शब्द जो किसी भी देश के लिये शर्मिंदगी से कम नहीं है। इसी बाल मजदूरी खिलाफ विश्व के तमाम देश तरह-तरह के कानून बनाकर प्रयास कर रहे हैं कि उनके देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके। नन्हे नौनिहालों को मासूम सी उम्र में पढ़ाई का मौका मिले, ना कि छोटी सी उम्र में ही उनके कंधों पर काम का बोझ डाल दिया जाए। इसीलिए हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है।

बाल मजदूरी क्या है (Bal Majduri Kya Hai)

बाल श्रम एक अभिशाप है। हालांकि पहले ये जान लेना जरूरी है कि बाल श्रम होता क्या है। छोटे बच्चों से काम कराना बाल श्रम होता है। पढ़ने खेलने की उम्र में बच्चे मजदूरी करते, किसी दुकान में काम करते, लोगों के घरों में साफ सफाई करते दिख जाते हैं। लाचार और गरीबी से त्रस्त बच्चे बचपन से ही बाल श्रम जैसी समस्या का सामना करने लगते हैं।

इसी बढ़ते बाल श्रम को रोकने के लिए साल 2002 में इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस की शुरुआत की। बाल श्रम को कानून अपराध माना गया। हर देश मे बाल श्रम के दायरे में आने वाले बच्चों की उम्र अलग अलग है।

सबसे ज्यादा बाल मजदूरों वाला देश

वैसे तो बाल मजदूर लगभग सभी देशों में हैं। हालांकि सबसे ज्यादा बाल श्रमिक अफ्रीका (Africa Child Labour) में हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, अफ्रीका में 7.21 करोड़ बाल मजदूर पाए जाते हैं।

इसके अलावा एशिया पैसिफिक में 6.21 करोड़ और अमेरिका में एक करोड़ से ज्यादा बाल मजदूर हैं।


भारत में बाल श्रम (Child Labour In India)

भारत में बाल श्रम की स्थिति कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है। यूनिसेफ द्वारा जारी एक आंकड़े के मुताबिक, दुनिया के बाल मजदूरों का 12 फीसदी भारत में है। भारत मे बाल मजदूरी के दायरे (Child Labour Age) में आने वाले बच्चों की आयु 14 साल की है।

वहीं साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, देश मे 14 साल तक के 25.96 बच्चों में से 1.01 करोड़ बाल मजदूर हैं, साथ ही करीब 43 लाख से अधिक बाल मजदूरी करते पाए गए।

भारत के पांच राज्यों में बाल मजदूरों की तादाद सबसे ज्यादा है। इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का नाम शामिल है। सबसे अधिक बाल मजदूर यूपी और बिहार में हैं। डाटा के मुताबिक, यूपी में 21.5 फीसदी और बिहार में 10.7 फीसदी बाल मजदूर हैं। साथ ही राजस्थान में 8.5 लाख बाल मजदूर है।


बाल मजदूरी की वजह (Child Labour Causes)

बाल मजदूरी की कई वजह होती है लेकिन मुख्य कारण गरीबी , शिक्षा का अभाव होता हैं। इसके अलावा बेरोजगारी और अनाथ होना भी बच्चों को बाल मजदूरी के दलदल में झोंक देता है।

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