7000 इंजीनियर व ग्रेजुएट बनना चाहते हैं सफाईकर्मी, भरा आवेदन, जानिए पूरी वजह

: देश में बेरोजगारी का आलम यह है कि कोयंबटूर नगर निगम में 549 सेनेटरी वर्करों के पदों के लिए कुल 7000 इंजीनियरों, स्नातकों और डिप्लोमा धारकों ने आवेदन किया है।  एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, निगम ने 549 ग्रेड -1 सफाई कर्मी के पदों के लिए आवेदन मांगे थे और 7,000 आवेदकों ने तीन दिवसीय साक्षात्कार और प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए आवेदन किया है।

जयपुर: देश में बेरोजगारी का आलम यह है कि कोयंबटूर नगर निगम में 549 सेनेटरी वर्करों के पदों के लिए कुल 7000 इंजीनियरों, स्नातकों और डिप्लोमा धारकों ने आवेदन किया है।  एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, निगम ने 549 ग्रेड -1 सफाई कर्मी के पदों के लिए आवेदन मांगे थे और 7,000 आवेदकों ने तीन दिवसीय साक्षात्कार और प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए आवेदन किया है। इन भर्तियों के लिए तीन दिन इंटरव्यू  है, जो बुधवार (27 नवंबर) को शुरू हो गया है।

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लगभग 70 प्रतिशत उम्मीदवारों ने एसएसएलसी (10वीं) यानी न्यूनतम योग्यता पूरी की हुई है। उम्मीदवारों में अधिकांश इंजीनियर, पोस्ट ग्रेजुएट, ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारक हैं। कुछ मामलों में, यह पाया गया कि आवेदक पहले से ही निजी कंपनियों में कार्यरत है, लेकिन वे सरकारी नौकरी चाहते है क्यों कि यहां शुरुआती वेतन 15,700 रुपये है। कई उम्मीदवार ऐसे भी हैं जो पिछले 10 सालों से अनुबंधित सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रहे  हैं। इन लोगों ने स्थायी नौकरियों के लिए आवेदन किया है।

 

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निजी कंपनियों से  6,000-7,000 रुपये वेतन मिलता है, जिसके साथ परिवार चलाना मुश्किल है। इसके साथ-साथ निजी कंपनियों में 12 घंटे की शिफ्ट होती है, और उसमें भी जॉब सिक्योरिटी नहीं है। दूसरी ओर सफाई कर्मचारी की नौकरी में सुबह के तीन घंटे और शाम के तीन घंटे के काम करना होता है, इसके साथ लगभग 20,000 रुपये का वेतन भी मिल जाता है।  निजी कंपनियों में  काम के बदले सम्मान भी कम मिलता है। और प्रमोशन के लिए साल दर साल आस लगाने के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकलता है। ऐसा मनाना है इन पढ़े लिखे नवजवानों का, जिन्होंने आवेदन किया है। बेरोजगारी का आलम यही रहा तो वो दिन दूर नहीं जब देश में हताश परेशान लोगो की तदाद बढ़ जाएगी। जो देश के विकास के लिए बाधक होगा।