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DU का सबसे डिमांडिंग कॉलेज, जहां एक ही राज्य के छात्रों का है दबदबा

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Published on 6 July 2016 3:47 PM GMT

DU का सबसे डिमांडिंग कॉलेज, जहां एक ही राज्य के छात्रों का है दबदबा
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लखनऊ : कॉमर्स के लिए सबसे ज्यादा डिमांडिंग कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) है।

तमिलनाडु से हुए सबसे अधिक दाखिले

-इसमें बीकॉम कोर्स में एडमिशन के लिए जारी की गई पहली कटऑफ लिस्ट में सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स तमिलनाडु से आए हैं।

-कॉलेज के पास अभी तक ऐसा कोई सरकारी आंकड़ा तो जारी नहीं किया है लेकिन सूत्रों के मुताबिक ये संख्या 80 प्रतिशत है।

-तमिलनाडु और केरल के छात्रों की डीयू और एसआरसीसी में एडमिशन 2010 से लगातार बढ़ रही है।

-इस बारे में एसआरसीसी के पूर्व प्रिंसिपल पीसी जैन का कहना है कि कटऑफ 2 बार 100 प्रतिशत जा चुकी है, कॉलेज में बीकॉम का एक सेक्शन तमिलनाडु के छात्रों के लिए ही है।

2010 से बढ़ा है एडमिशन

-2010 में जब कटऑफ 100 प्रतिशत गई थी तो पहली बार केरल की लड़की का सभी सब्जेक्ट में 100 प्रतिशत रिजल्ट आया था, ये मुद्दा तब भी चर्चा में आया था।

-इसके बाद से ही ज्यादा से ज्यादा छात्र इन राज्यों से ही दाखिला पा रहे हैं।

-एक ही राज्य से पढ़ने वाले छात्रों की बढ़ती संख्या के बारे में बताते हुए प्रिंसिपल जैन कहते हैं कि करीब 10 साल पहले डीयू में दाखिले शुरू होने से पहले वो उत्तर प्रदेश गए थे।उस साल उस राज्य बोर्ड के टॉपर को 84 प्रतिशत अंक मिले थे। किसी ने मुझसे कहा कि ऐसे में यूपी का कोई छात्र डीयू में दाखिला कैसे ले पाएगा।

इससे क्या हो रहा नुकसान

जैन आगे बताते हैं कि इस होड़ के कारण ही राज्य बोर्ड ने भी ज्यादा अंक देना शुरू कर दिया ताकि छात्रों के 99 से 100 प्रतिशत आ सकें। इस चलन पर चिंता जाहिर करते हुए डीयू के ही एक अध्यापक बताते हैं कि पिछले साल भी तमिलनाडु से बड़ी संख्या में दाखिले हुए थे। नंबरों की इस बढ़ती होड़ के नुकसान की तरफ इशारा करते हुए वो कहते हैं कि बिहार कांड इस चिंताजनक स्थिति का परिणाम है जहां एक ही स्कूल के कई छात्र टॉप कर जाते हैं और बाद में शर्मनाक सच्चाई सामने आती है।

इससे होने वाले दूसरे नुकसान की ओर इशारा करते हुए एसआरसीसी के प्रिंसिपल आरपी रुस्तगी का कहना है कि इससे यूनिवर्सिटी की मूल भावना को भी धक्का पहुंचता है क्योंकि इन संस्‍थाओं का उद्दूश्य एक की कैंपस में ज्यादा से ज्यादा विविधताओं को जगह देना है लेकिन एक ही कॉलेज या राज्य से ज्यादा छात्रों का आना इसमें बाधक बन रहा है। हालांकि इसका कोई आधारिक डाटा उनके पास अभी उपलब्‍ध नहीं है्।

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