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मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के भविष्य को खतरा, ये है वजह

एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में विदेशी छात्र अब तक संस्थागत कोटा प्रणाली के जरिए देश के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन लेते हैं। लेकिन निजी और डीम्ड संस्थानों के लिए नीट को अनिवार्य किए जाने संबंधी उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश से विदेशी छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि वे नीट की श्रेणी में नहीं आते हैं।

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priyankajoshiBy priyankajoshi

Published on 10 Oct 2016 12:28 PM GMT

मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के भविष्य को खतरा, ये है वजह
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नई दिल्ली : इस साल देश के निजी मेडिकल संस्थान में एडमिशन लेने वाले विदेशी छात्रों का भविष्य खतरे में हैं। नेशनल एलिजिबिललटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के कारण विदेशी छात्रों को मेडिकल कॉलेजों के दाखिलों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

विदेशी छात्रों की मुश्किलें बढ़ी

एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में विदेशी छात्र अब तक संस्थागत कोटा प्रणाली के जरिए देश के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन लेते हैं। लेकिन निजी और डीम्ड संस्थानों के लिए नीट को अनिवार्य किए जाने संबंधी उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश से विदेशी छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि वे नीट की श्रेणी में नहीं आते हैं।

कैंपस छोड़ने का आदेश

नीट क्वालिफिकेशन संबंधी शर्तों के अनुसार केवल भारतीय नागरिक और दूसरे देशों में रह रहे इंडियंस ही एग्जाम दे सकते हैं। इसमें विदेशी नागरिकों का कोई जिक्र नहीं है। ऐसे में कॉलेजों ने विदेशी स्टूडेंट्स को अगले हफ्ते तक कथित तौर पर कैंपस छोड़ने के लिए कहा है।

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इन्होंने पत्रकारीय जीवन की शुरुआत नई दिल्ली में एनडीटीवी से की। इसके अलावा हिंदुस्तान लखनऊ में भी इटर्नशिप किया। वर्तमान में वेब पोर्टल न्यूज़ ट्रैक में दो साल से उप संपादक के पद पर कार्यरत है।

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