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निवेश कैसे करें

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NewstrackBy Newstrack

Published on 20 July 2020 6:44 AM GMT

निवेश कैसे करें
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अशोक सिंह

निवेश क्या है ?

आज तेजी से भागती दौड़ती दुनिया में, केवल पैसा कमाना ही पर्याप्त नहीं होता है। बल्कि कमाए गए पैसे के एक भाग का निवेश भी अति आवश्यक है। जिससे कि आपके द्वारा कड़ी मेहनत से कमाया हुआ पैसा भी आपके लिए काम करता रहे। आप पैसा कमाने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं। लेकिन आवश्यक नहीं है कि आपको एक आरामदायक जीवन शैली, आपके सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इतना ही पैसा पर्याप्त हो। इसीलिए आपको अपनी मेहनत से कमाये गए पैसे पर भी कुछ इस प्रकार काम करना होता है कि आपका कमाया हुआ पैसा भी आपके लिए काम करता रहे। और इसीलिए आप अपने मेहनत से कमाए गए पैसे का निवेश करते हैं। बैंक खातों या घर में पड़ा हुआ पैसा आपको कुछ कमाकर नहीं दे सकता है, अतः यह पड़ा हुआ पैसा एक अवसर को खोने जैसा होता है। आपके रोजमर्रा के खर्चों के बाद बचा हुआ पैसा आपके लिए काम कर सकता है, यदि इन बचे हुए पैसों का चतुराई से निवेश किया जाय। क्योंकि यही वह रास्ता है, जिस पर चलकर आपका गाढ़ी मेहनत से कमाया हुआ पैसा भी आपके लिए काम करना शुरू कर देता है। साधारण शब्दों में यही निवेश की संकल्पना है।

निवेश के विकल्प

भारत में निवेश हेतु एक आम निवेशक के लिए क्या क्या विकल्प हो सकते हैं, आइये अब इस पर भी चर्चा कर लें। हमारे यहाँ निवेश के कुछ पारम्परिक तरीके रहे हैं, जो पीढ़ियों से आम निवेशक इस्तेमाल करते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ दशकों में हमने निवेश के कई अन्य माध्यमों को भी लोकप्रिय होते हुए देखा है, जो उपलब्ध तो पहले भी थे, लेकिन चूँकि इनमें थोड़ा जोखिम भी हुआ करता था, अतः आम निवेशक इनसे दूर रहा करते थे।

आर्थिक उदारीकरण के साथ आम जनमानस की आय में बढ़ोत्तरी हुई और उनकी अधिशेष आय में वृद्धि हुई। इसी के साथ गैर परम्परागत निवेश क्षेत्रों में भी आम निवेशकों का निवेश बढ़ने लगा। वैसे तो यह तबका बीसवीं सदी के अंतिम दशक में ही उभर कर सामने आने लगा था, लेकिन इक्कीसवीं सदी में यह तबका स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचित होने लगा। जोखिम उठाने को तैयार इस तबके को उभरता देख, वित्तीय सलाहकार अथवा वित्तीय प्रबंधन क्षेत्र में बहुत से सलाहकार और कंपनियां भी आ गईं। इनके मार्गदर्शन में आम निवेशकों को समझ में आया कि निवेश के इन गैर परम्परागत माध्यमों में जोखिम तभी तक है, जब तक कि आपको इन क्षेत्रों या विषयों का ज्ञान अथवा समझ न हो। अगर आप समझदारी से इन क्षेत्रों भी निवेश करते हैं, तो जोखिम के साथ साथ इनमें प्रतिफल अथवा लाभ भी पारम्परिक निवेश से कहीं अधिक है।

आइये अब भारत में लोकप्रिय इन निवेश विकल्पों को भी समझते हैं :

स्टॉक्स अथवा शेयर

स्टॉक्स अथवा शेयर्स मौजूदा दौर में सर्वाधिक लोकप्रिय निवेश माध्यम है। यह भारत के स्टॉक एक्सचेजों में सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर होते हैं। जब आप किसी कंपनी का स्टॉक खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी में किये गए निवेश के अनुरूप स्वामित्व के हिस्सेदार हो जाते हैं। स्वामित्व में इस हिस्सेदारी के साथ ही आप भी उस कंपनी के विकास में भाग लेने की अनुमति प्राप्त कर लेते हैं। इस प्रकार जैसे जैसे वह कंपनी आगे बढ़ती है, वैसे वैसे ही आपका निवेशित धन भी आगे बढ़ता जाता है। कंपनियों के ये स्टॉक अथवा शेयर स्टॉक एक्सचेंजों में सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होते हैं और किसी भी निवेशक द्वारा खरीदे जा सकते हैं। स्टॉक अथवा शेयर में निवेश एक आदर्श दीर्घकालिक निवेश कहा जा सकता है।

म्यूचुअल फण्ड

म्यूचुअल फण्ड पिछले कई दशकों से भारत उपलब्ध रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्ष में इन्होंने निवेश के एक विकल्प के रूप में लोकप्रियता हासिल की है। इस निवेश माध्यम में बहुत से निवेशकों का धन को पूल किया जाता है और इससे इष्टतम रिटर्न अर्जित करने का प्रयास किया जाता है। म्यूचुअल फण्ड्स के माध्यम से एकत्र किये गए धन का विभिन्न प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है। इक्विटी म्यूचुअल फण्ड्स द्वारा मुख्य रूप से स्टॉक और इक्विटी से संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया जाता है, जबकि डेब्ट म्यूचुअल फण्ड बॉन्ड एवं अन्य डेब्ट माध्यमों में निवेश करते हैं। म्यूचुअल फण्ड्स का एक प्रकार हाइब्रिड म्यूचुअल फंड भी होते हैं, जिनमें इक्विटी एवं डेब्ट फण्ड दोनों में साथ साथ निवेश किया जाता है। म्युचुअल फण्ड लचीला निवेश माध्यम है, जिसमें आप अपनी सुविधा एवं जोखिम क्षमता के अनुरूप निवेश कर सकते हैं। इनमें स्विच ओवर की सुविधा भी उपलब्ध रहती है, अर्थात जब तक आप चाहेंगे तब आपके फण्ड का अमुक हिस्सा इक्विटी में निवेशित रहेगा और जब आप चाहे इसे डेब्ट फण्ड में ट्रांसफर कर सकते हैं। निवेश के इस माध्यम से टैक्स सेविंग भी होती है, और आप इस निवेश को आवश्यता पड़ने पर भुना भी सकते हैं।

फिक्स्ड डिपॉजिट अथवा निश्चित जमा

फिक्स्ड डिपॉजिट अथवा निश्चित जमा एक ऐसा निवेश माध्यम है, जिसमें आप एक पूर्व - परिभाषित अवधि के लिए अपनी बचत जमा कर सकते हैं। निवेश के इस माध्यम में आपको पूर्ण पूंजी संरक्षण के साथ साथ गारंटीशुदा प्रतिफल प्राप्त होते हैं। निवेश का यह माध्यम परम्परागत निवेशकों के लिए एक आदर्श निवेश उपकरण है। फिक्स्ड डिपॉजिट अथवा निश्चित जमा में कोई जोखिम नहीं रहता है और आपको अपनी जमा राशि पर निश्चित ब्याज मिल जाता है। विभिन्न बैंकों द्वारा भिन्न भिन्न समयावधि के लिए भिन्न ब्याज दरों पर यह उपकरण उपलब्ध रहते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेशकों के लिए ब्याज दरें आर्थिक स्थितियों के अनुरूप बैंकों द्वारा स्वयं तय की जाती हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट में आमतौर पर लॉकइन पीरियड अथवा समयावधि निश्चित होती है। उस समयावधि के पूर्ण हो जाने पर ही आपको प्रतिफल प्राप्त होते हैं। आकस्मिक स्थितियों में निश्चित समयावधि अथवा लॉकइन पीरियड से पूर्व फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने पर आपको कोई ब्याज नहीं मिलता है, बस मूलधन ही वापस मिलता है। लेकिन फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेशकों को अक्सर इस डिपॉजिट के सामने ऋण या ओवरड्राफ्ट सुविधाओं का लाभ उठाने की अनुमति होती है। फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ टैक्स-सेविंग वेरिएंट भी आते हैं, जो प्रायः 5 साल के लॉक-इन के साथ आते हैं।

आवर्ती जमा अथवा रिकरिंग डिपॉजिट्स

आवर्ती जमा (आरडी) निश्चित कार्यकाल के लिए एक निवेश वाहन है। निवेश के इस माध्यम में निवेशकों को हर महीने पूर्व निर्धारित अवधि के लिए विशिष्ट राशि जमा करने की अनुमति रहती है। आरडी बैंकों और डाकघरों द्वारा जारी किए जाते हैं। इस बचत अथवा निवेश संकल्पना में ब्याज दरें जारी करने वाले संस्थान स्वयं तय करते हैं। आरडी के माध्यम से एक निर्धारित समय अवधि में कॉर्पस बनाने के लिए निवेशक को हर महीने एक छोटी राशि का निवेश करने की अनुमति प्राप्त रहती है। आरडी पूंजी संरक्षण के साथ-साथ गारंटीकृत रिटर्न भी प्रदान करते हैं।

सार्वजनिक भविष्य निधि अथवा पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ)

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड एक दीर्धकालिक निवेश वाहन है। यह निवेश वाहन 15 साल के लॉक-इन अवधि के साथ उपलब्ध होता है। पीपीएफ में किए गए निवेश का उपयोग टैक्स बचत हासिल करने के लिए भी किया जाता रहा है। पीपीएफ के दरें भारत सरकार हर तीन महीने में तय करती है। 15 साल की अवधि पूर्ण होने के बाद निकाले गए कॉर्पस निवेशक के हाथ में पूरी तरह से कर मुक्त राशि हाँथ आती है। पीपीएफ कुछ शर्तों के पूरा होने के बाद ऋण एवं आंशिक निकासी की अनुमति भी प्रदान करता है।

कर्मचारी भविष्य निधि अथवा एम्प्लॉई प्रोविडेंट फण्ड

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) सेवानिवृत्ति-उन्मुख एक निवेश वाहन है। यह निवेश वाहन धारा 80 के अंतर्गत कर लाभ प्रदान रहा है। ईपीएफ आम तौर पर एक अर्जक के मासिक वेतन का एक हिस्सा होता है। इस राशि का उतना ही हिस्सा नियोक्ता द्वारा भी इस निवेश वाहन में किया जाता है। ईपीएफ की परिपक्वता पर इससे गई कॉर्पस राशि पूरी तरह से कर-मुक्त रहती रही है। ईपीएफ दरें भारत सरकार द्वारा हर तीन महीने में तय की जाती हैं।

नेशनल पेंशन सिस्टम अथवा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) एक अपेक्षाकृत नया कर-बचत निवेश विकल्प है। एनपीएस में निवेशक सेवानिवृत्ति तक लॉक-इन रहते हैं और पीपीएफ या ईपीएफ से अधिक रिटर्न कमा सकते हैं। एनपीएस योजना इक्विटी में भी निवेश का विकल्प प्रदान करती है। एनपीएस में मैच्योरिटी कॉर्पस पूरी तरह से कर-मुक्त नहीं है। इसका एक हिस्सा वार्षिकी खरीदने के लिए उपयोग किया जाता है जो निवेशक को नियमित पेंशन प्रदान करता है।

निवेश के विभिन्न उत्पादों की तो हमने चर्चा कर ली आइये अब यह भी समझने का प्रयास करें कि आपको अपना पैसा कहां निवेश करना चाहिए? क्योंकि हर एक निवेशक की अलग अलग आवश्यकतायें होती हैं

आपको अपना पैसा कहां निवेश करना चाहिए?

बाजार में चूँकि ढेर सारे निवेश वाहन उपलब्ध होते हैं। अतः निवेशक कई बार यह समझ नहीं पाता है कि वह किस निवेश वाहन में निवेश करे। गलत निवेश विकल्प चुनने पर वित्तीय नुकसान भी हो सकता है, जो कि कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता है। यही कारण है कि आपको निवेश निर्णय लेते समय निम्नलिखित कारकों का उपयोग करना चाहिए।

आयु

निवेश का निर्णय लेते समय आयु बहुत महत्वपूर्ण होती है। आमतौर पर, काम उम्र के निवेशकों के पास कम जिम्मेदारियां होती हैं और उनके पास निवेश करते रहने के लिए अधिक समय होता है। जब आपके सामने एक लंबी कामकाजी जिंदगी होती है, तो आप लंबी अवधि के दृष्टिकोण के साथ वाहनों में निवेश कर सकते हैं और अपनी आय में वृद्धि के साथ अपनी निवेश राशि भी बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड जैसे इक्विटी-उन्मुख निवेश युवा निवेशकों के लिए एक बेहतर विकल्प होता है। जबकि रिस्क लेने की काम क्षमता वाले बड़ी उम्र के निवेशकों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे उत्पाद बेहतर होते हैं।

लक्ष्य अथवा गोल

निवेश का लक्ष्य या तो अल्पकालिक हो सकता है या फिर दीर्घकालिक। अल्पकालिक लक्ष्य के लिए, आपको एक सुरक्षित निवेश विकल्प चुनना चाहिए। दीर्घकालिक लक्ष्य के लिए इक्विटी की रिटर्न-जेनरेटिंग क्षमता का उपयोग किया जा सकता है। लक्ष्य नेगोशिएबल और नॉन-नेगोशिएबल दोनों प्रकार के हो सकते हैं। जैसे बच्चों की शिक्षा या घर के लिए भुगतान कम करने जैसे नॉन-नेगोशिएबल लक्ष्यों के लिए, गारंटेड वापसी वाला निवेश एक अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर लक्ष्य नेगोशिएबल है, जिसका अर्थ है कि इसे कुछ और समय के लिए आगे धकेला जा सकता है, तो इक्विटी म्यूचुअल फंड या स्टॉक में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। साथ ही, अगर ये निवेश वास्तव में अच्छा है, तो आप समय से पहले भी लक्ष्य पूरा कर सकते हैं।

प्रोफ़ाइल

निवेश विकल्प चुनते समय एक और बात सोचने की है कि आपका अपना प्रोफ़ाइल कैसा है। फैक्टर जैसे कि आप कितना कमा रहे हैं और आपके पास कितने वित्तीय आश्रित हैं यह महत्वपूर्ण होता है। एक युवा निवेशक जिसके पास बहुत अधिक समय हो, वह इक्विटी से संबंधित जोखिम नहीं उठा सकता है यदि उसके पास अपने परिवार की देखभाल करने की जिम्मेदारी भी है। इसी तरह, बिना आश्रित और आय के एक स्थिर स्रोत के साथ पुराने व्यक्ति उच्च रिटर्न अर्जित करने के लिए इक्विटी में निवेश करना चुन सकते हैं।

यही कारण है कि जब निवेश की बात आती है, तो एक आकार सभी के लिए उपयुक्त नहीं होता है। निवेश को न केवल सावधानी से चुनना चाहिए, बल्कि इन सबसे बाहर निकलने के लिए ठीक से योजना भी बननी चाहिए।

हमें अपने निवेश की योजना कैसे बनानी चाहिए?

अपने निवेश की योजना बनाने में पहला कदम सही निवेश उत्पाद का पता लगाना है जो आपकी प्रोफ़ाइल और आवश्यकताओं के अनुकूल हो। अपने निवेश की योजना बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें:

पर्याप्त शोध करने के बाद सावधानी से निवेश विकल्प चुनें

त्वरित-फायदे वाली योजनाओं से बचें जो कि थोड़े समय में उच्च रिटर्न का वादा करती हैं

समय-समय पर अपने स्टॉक और म्यूचुअल फंड निवेश की समीक्षा करते रहें

अपने निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर कर के निहितार्थ पर विचार करें

चीजों को सरल रखें और उन जटिल निवेशों से बचें, जिन्हें आप समझते नहीं हैं

(अशोक सिंह मुंबई स्थित ईएसपीएस ग्रुप के संस्थापक एवं निदेशक हैं)

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