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जन्मदिन विशेष: बासु चटर्जी की ये सदाबहार फिल्में आज भी देखना पसंद करते हैं लोग

बासु चटर्जी एक बेहतरीन फिल्म निर्देशक और स्क्रीनराइटर थे। उनकी फ़िल्में मध्यम वर्गीय परिवारों की कहानियों के साथ अक्सर शहरी टच होता था ,जिसमें वैवाहिक और प्रेम संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया जाता था।

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MonikaBy Monika

Published on 10 Jan 2021 6:55 AM GMT

जन्मदिन विशेष: बासु चटर्जी की ये सदाबहार फिल्में आज भी देखना पसंद करते हैं लोग
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निर्देशक बासु चटर्जी की ये सदाबहार फ़िल्में आज भी देखना पसंद करते हैं लोग
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मुंबई: बासु चटर्जी एक बेहतरीन फिल्म निर्देशक और स्क्रीनराइटर थे। उनकी फ़िल्में मध्यम वर्गीय परिवारों की कहानियों के साथ अक्सर शहरी टच होता था ,जिसमें वैवाहिक और प्रेम संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया जाता था। एक रुका हुआ फ़ैसला (1986) और कमला की मौत (1989) जैसी फिल्मों ने सामाजिक और नैतिक मुद्दों पर लोगों को सोचने पर मजबूर किया। बासु का जन्म 10 जनवरी अजमेर,राजस्थान में एक बंगाली परिवार में हुआ था।

इन फिल्मों ने बनाई पहचान

पिछले साल 4 जून 2020 में बासु चटर्जी का कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान निधन हो गया था। इस दिग्गज कलाकार के यू चले जाने से पूरे फिल्म इंडस्ट्री को सदमा लगा। उन्हें फिल्म छोटी सी बात (1975),चितचोर (1976), रजनीगंधा (1974), पिया का घर (1972), खट्टा मीठा, स्वामी 1977 फ़िल्म, बेटन बेटन में (1979) प्रियतम (1977),मन पसंद, हमारी बहू अलका, शौकीन (1982), और चमेली की शादी (1986) फ़िल्में सबसे ज्यादा पॉपुलर साबित हुईं।

कार्टूनिस्ट के रूप में शुरू किया करियर

बता दें, 1950 के दशक में चटर्जी मुंबई पहुंचे और रुसी करंजिया द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक टैब्लॉइड ब्लिट्ज़ के लिए एक इलस्ट्रेटर और कार्टूनिस्ट के रूप में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने फिल्म निर्माण के करियर को चुनने से पहले 18 साल तक वहां काम किया। जब उन्होंने राज कपूर और वहीदा रहमान अभिनीत फिल्म तीसरी कसम (1966) में बसु भट्टाचार्य की सहायता की, जिसने बाद में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता।

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टेलीविज़न के लिए भी किया काम

यही से उनका फ़िल्मी करियर शुरू हुआ जिसके बाद बासु ने 1969 में सारा आकाश के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की, जिसके लिए उन्हें बेस्ट स्क्रीन प्ले फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीता। उन्होंने कई बंगाली फिल्मों का भी निर्देशन किया । बासु चटर्जी ने दूरदर्शन के लिए टेलीविजन सीरीज ब्योमकेश बख्शी और रजनी का निर्देशन किया। वे 1977 में 10 वें मास्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में निर्णायक मंडल के सदस्य और एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन के इंटरनेशनल फिल्म एंड टेलीविजन क्लब के सदस्य थे।

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