जानिए उस रात की पूरी कहानी, जब गुरु दत्त कह गए थे दुनिया को अलविदा

गुरु बचपन से ही बहुत शरारती और जिद्दी किस्म के बच्चे रहे हैं। सवाल पूछने की उनकी आदत ऐसी थी कि, पूछते-पूछते उनके सवाल तो नहीं खत्म होते थे लेकिन उनकी मां जरुर उनसे परेशान हो जाया करती थीं।

जानिए उस रात की पूरी कहानी, जब गुरु दत्त कह गए थे दुनिया को अलविदा

जानिए उस रात की पूरी कहानी, जब गुरु दत्त कह गए थे दुनिया को अलविदा

मुंबई: भारतीय सिनेमा के मशहूर कलाकार और डायरेक्टर गुरु दत्त को कौन नहीं जानता। उन्होंने अपने निर्देशन और अभिनय से भारतीय सिनेमा को कई ऐसी यादें दी हैं जिनको भूल पाना नामूनकिन है। अपने निर्देशन से गुरु दत्त एक आम से दिखने वाले सीन को भी जादुई बना देते थे। दर्शकों को फिल्मों की बारिकियों से रुबरु कराने में गुरु का बहुत बड़ा हाथ है। ऐसा कहा जाता है कि गुरु दत्त ने क्राइम थ्रिलर मूवी में अपना लोहा मनवाया था।

लेकिन देश के लिए एक ऐसा दिन आया जब भारतीय सिनेमा ने अपना कीमती हीरा यानि गुरु दत्त के खो दिया। 10 अक्टूबर आज ही के दिन 1964 में गुरुदत्त अपने बिस्तर पर मृत अवस्था में पाए गए जिसने सबको झकझोर कर रख दिया। बताया जाता है कि गुरु दत्त की शराब पीने की लत थी और उस दिन लंबे समय से शराब के नशे से जुझ रहे गुरु ने आत्महत्या कर ली। तो आज हम आपको बता रहे हैं उस रात की पूरी कहानी जब गुरु दत्त इस दुनिया को अलविदा कह गए थे।

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लीड एक्टर के शूटिंग करने से थे नाराज-

दुनिया के नजरों में तो ये आत्महत्या था लेकिन गुरु दत्त के भाई देवी दत्त की ऐसा मानना नहीं था। उन्हें लगता है कि ये दुर्घटना ड्रग के ओवरडोज की वजह से हुई थी। उन्होंने बताया कि गुरु दत्त फिल्म बहारें फिर भी आएगी के सेट पर थे और उस वक्त तक गुरु बिल्कुल स्वस्थ थे। हालांकि बाद में एक लीड एक्टर ने शूट को कैंसिल कर दिया था जिस पर वो नाराज हो गए थे। क्योंकि इसकी वजह से उन्हें अपने अगले दिन का सारा शेड्यूल बदलना पड़ा था।

बच्चों के साथ बिताना चाहते थे वक्त-

उसके बाद देवी दत्त और गुरु दत्त एक साथ कोलाबा में शॉपिंग करने गए थे, वहां उन्होंने गुरु दत्त के बेटों अरुण और तरुण के लिए कुछ चीजें खरीदी थीं। इसके बाद दोनों भाई गुरु दत्त के पेडेर रोड पर स्थित अपार्टमेंड में गए, वहां पर गुरु अपने परिवार के बिना रहते थे। उस दिन गुरु अपने बच्चों के साथ कुछ वक्त बिताना चाहते थे। जिसके लिए उन्होंने अपनी पत्नी गीता दत्त को कॉल भी किया था लेकिन बहुत रात होने की वजह से गीता ने बच्चों को भेजने से मना कर दिया। इससे गुरु दत्त परेशान हो गए थे।

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फिर देवी कभी नहीं मिल पाए गुरु से-

बाद में गुरु दत्त ने अपने भाई को वहां से जाने के लिए कहा क्योंकि राइटर और डायरेक्टर अबरार अल्वी वहां गुरु के साथ कुछ आईडिया पर बात करने आने वाले थे। दोनों का उस दिन साथ में शराब पीकर काम करने का प्लान था। इसके बात देवी दत्त वहां से चले गए। लेकिन उस दिन ठीक 24 घंटे के बाद वो कभी अपने भाई के साथ बात नहीं कर सके। 10 अक्टूबर, 1964 को मुंबई में अपने बिस्तर पर मृत अवस्था में पाये गए।

बचपन में शरारत भरा था अंदाज-

गुरु दत्त पहले ऐसे निर्देशक बने, जिन्होने फिल्मों की बारीकियों से लोगों को रुबरु कराया। गुरु दत्त के कहानी कहने का ढंग बेहद ही अनोखा था। उनकी तारीफ करते हुए फिल्मकार अनवर जमाल ने कहा था कि- क्राइम थ्रिलर मूवीज के निर्माण में गुरु दत्त ने अपना मानक तय किया हुआ था। गुरु दत्त की फिल्मों में हर तरह के पहलु दिखाए गए हैं। चाहे वो राजनीतिक हो या सामाजिक गुरु दत्त ने हर परिदृश्य में अपने निर्देशन से जान डाल दी।

गुरुदत्त के पिता का नाम शिवशंकर राव पादुकोण और मां का नाम वसंती पादुकोण था। गुरु बचपन से ही बहुत शरारती और जिद्दी किस्म के बच्चे रहे हैं। सवाल पूछने की उनकी आदत ऐसी थी कि, पूछते-पूछते उनके सवाल तो नहीं खत्म होते थे लेकिन उनकी मां जरुर उनसे परेशान हो जाया करती थीं।

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