पिता को याद कर भावुक हुए बिग बी, किया इमोशनल ट्वीट…

हिन्दी साहित्य की वीणा, सीधे सरल शब्दों को कविता के पात्र में डालकर साहित्य रसिकों को काव्य रस चखाने वाले हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने  मानव जीवन में प्रेम, सौंदर्य, दर्द, दुख, और मृत्यु को अपने मखमली शब्दों में पिरोकर जिस खूबसूरती से पेश किया है, उसकी कोई और मिसाल

मुंबई: हिन्दी साहित्य की वीणा, सीधे सरल शब्दों को कविता के पात्र में डालकर साहित्य रसिकों को काव्य रस चखाने वाले हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने  मानव जीवन में प्रेम, सौंदर्य, दर्द, दुख, और मृत्यु को अपने मखमली शब्दों में पिरोकर जिस खूबसूरती से पेश किया है, उसकी कोई और मिसाल हिन्दी साहित्य में नहीं मिलती। वे भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में शुमार हैं। आज उनकी पूण्य तिथि है। इस पर अमिताभ ने ट्वीट कर व्यक्त किए संवेदनाएं।

अमिताभ बच्चन  ने लिखा -आज समाप्त हुआ , परिवार के एक आदर्श पूर्ण समधी का ‘चौथा’ ! और बस कुछ ही क्षणों में , पूज्य बाबूजी की पुण्यतिथि ! ” जीवन है चलाएमान , बहती नदी के समान ” ~ हरिवंश राई बच्चन

 

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बिग ने कहा है कि जब कभी वे खुद को मुश्किल या हताशा में पाते है  पिता की किसी पुस्तक को पढ़ने लगते है और इससे एक रास्ता नजर आने लगता है। ये शब्द सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के हैं। पर केवल उन्हें ही नहीं बल्कि हिन्दी के कई लेखकों, कवियों और साहित्यकारों को प्रख्यात लेखक हरिवंश राय बच्चन की रचनाएँ पढ़कर रास्ता नजर आया था।नकी चर्चित कति मधुशाला बीसवीं सदी की सर्वाधिक लोकप्रिय पुस्तकों में से एक है और उसके अब तक पचास से अधिक संस्करण निकल चुके हैं। इस पुस्तक ने हिन्दी की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया था।

 

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हरिवंश राय बच्चन अपने पुत्र के ही नहीं बल्कि अनेक लोगों के प्रेरणास्रोत थे। आलोचकों की राय में मधुशाला धर्मनिरपेक्षता का भी प्रतीक है। उसकी प्रसिद्ध पंक्ति है। मंदिर मस्जिद बैर बढ़ाते, मेल कराती मधुशाला। इस पुस्तक से उन्हें अभूतपूर्व लोकप्रियता मिली और वे साहित्य जगत में दूर गए।
अमिताभ बच्चन का मानना है कि पूरी ‘मधुशाला’ सिर्फ मदिरा के बारे में नहीं, अपितु जीवन के बारे में भी है। हालावाद दरअसल यह बताता है कि मदिरा और अन्य तत्वों को हटाकर जीवन को किस तरह समझा जा सकता है।मुझे एक रास्ता नजर आता है। आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है। उम्मीद और सकारात्मक सोच का ऐसा उदाहरण और कहां मिलेगा, जिसमें कहा गया हो- वे सहज, सरल और मन को छूने वाली कविताएं हैं। उनकी एक ऐसी ही मार्मिक कविता है जो जीवन में आशावाद को जगाता है-

जो बीत गई सो बात कई
जीवन में एक सितारा था
माना वो बेहद प्यारा था
वो छूट गया तो छूट गयाअंबर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
पर पूछो टूटे तारों से
जब अंबर शोक मनाता है

हरिवंश राय बच्चन के निधन से पूरा हिन्दी समाज शोक संतप्त है, लेकिन उनकी यह कविता मृत्यु पर जीवन की विजय का संदेश हमेशा देती रहेगी। छायावादी कवि हरिवंश राय बच्चन ने प्रेम के अवसाद को साहस मेें बदलने की पुरजोर कोशिश की है। उनकी रचनाएं आशा का दीपक जलाती हैं।