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वर्ल्ड रिफ्यूजी डे आजः नेटफ्लिक्स आपके लिए लाया है कुछ बेहतरीन फिल्में

वर्ल्ड रिफ्यूजी डे ( विश्व शरणार्थी दिवस)हर साल 20 जून को मनाया जाता है। यह दिवस उन लोगों के साहस, शक्ति और संकल्प के प्रति सम्मान जताने के लिए है जो हिंसा, संघर्ष, युद्ध और प्रताड़ना के चलते अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं या यूं कहें जो लोग अपना देश छोड़कर दूसरे देश में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। शरणार्थियों की परिस्थितियों पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है ताकि इस समस्या का हल निकाला जा सके।

suman

sumanBy suman

Published on 20 Jun 2020 6:11 AM GMT

वर्ल्ड रिफ्यूजी डे आजः नेटफ्लिक्स आपके लिए लाया है कुछ बेहतरीन फिल्में
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मुंबई: वर्ल्ड रिफ्यूजी डे ( विश्व शरणार्थी दिवस)हर साल 20 जून को मनाया जाता है। यह दिवस उन लोगों के साहस, शक्ति और संकल्प के प्रति सम्मान जताने के लिए है जो हिंसा, संघर्ष, युद्ध और प्रताड़ना के चलते अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं या यूं कहें जो लोग अपना देश छोड़कर दूसरे देश में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। शरणार्थियों की परिस्थितियों पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है ताकि इस समस्या का हल निकाला जा सके।

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वैसे भी अपना घर छोड़ पराये घर में किसका मन लगता है। वही अनुभव देश के साथ भी जुड़ा होता है। किसी भी देश में किसी को भी शरणार्थी बन कर रहना पसंद नहीं होता, मगर हालात उन्हें ऐसा करने पर मजबूर कर देते हैं। दुनिया में ना जाने कितने ऐसे लोग हैं जो बड़ी-बड़ी जंगों में अपनी जमीन-जायदाद सब गवां बैठे और दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हो गए। जिन्हें अपना मुल्क छोड़ दूसरे मुल्क में जाकर शरण लेनी पड़ी।फिल्मों मे भी इसका बढिया फिल्मांकन हुआ है। जानते हैं..वर्ल्ड रिफ्यूजी डे को मौके पर उन फिल्मों के बारे में जिसमें शरणार्थियों का दर्द बयां किया गया है।

बीस्ट ऑफ नो नेशन

2015 में रिलीज हुई इस अमेरिकन मूवी दिखाया गया है कि कैसे एक मासूम लड़का अगू जो अपने परिवार के साथ छोटे से गांव में रहता है, जंग में अपने देश को बचाने के लिए छोटी उम्र में ही सैनिक बन जाता है। इस कहानी को बड़ी बारीकी से फिल्म में दिखाने की कोशिश की गई है कि छोटी सी उम्र में एक बच्चे के अंदर संवेदनशीलता आ जाती है और जो बाद में लेकर आती है उसके अंदर एक आक्रोश। ये आक्रोश देश के प्रति उस छोटे से लड़के की भावना का प्रतिबिंब होती है। अमेरिका में इसे थियेटर में ज्यादा जगह नहीं मिली और बॉयकॉट का सामना भी करना पड़ा था। मगर अंत में फिल्म को नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया।

फर्स्ट दे किल्ड माई फादर

2017 में आई इस फिल्म में बायोग्राफिकल हिस्ट्री थ्रिलर दिखाया गया। फिल्म में उंग नाम के एक 5 साल के बच्चे की कहानी दिखाई गई है जिसे जबरदस्ती सैनिक बनाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। फिल्म का निर्देशन एंजलीना जोली ने किया था। इसकी कहानी वियतनाम वॉर के दौरान की कहानी है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा पाई थी मगर फिल्म को क्रिटिक्स से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। इसके अलावा फिल्म कंबोडियन सिनेमा की ओर से ऑस्कर के लिए भी भेजी गई थी मगर नॉमिनेशन में जगह नहीं बना सकी थी।

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बॉर्न इन सीरिया

6 नवंबर, 2016 को रिलीज इस फिल्म में सीरिया में चल रही हिंसा को दिखाया गया। साल 2011 के मुताबिक करीब 9 मिलियन लोगों को सीरिया में अपना घर छोड़ना पड़ा था इसमें से आधे तो बच्चे ही थे। ये बच्चे इतनी विपरीत परिस्थितियों में गुजारा करने के काबिल नहीं थे। फिल्म के निर्माता-निर्देशक हर्नन जिन (Hernán Zin )थे।

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