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पद्मश्री साहिर लुधियानवी के गीतों में ऐसा जादू, आज भी गुनगुनाते हैं फैन्स

साहिर लुधियानवी एक कवि और फिल्मी गीतकार थे, जिन्होंने उर्दू और हिंदी भाषाओं में लिखा था। साहिर के काम को हिंदी सिनेमा में खूब सराहा गया।

Monika

MonikaBy Monika

Published on 8 March 2021 7:05 AM GMT

पद्मश्री साहिर लुधियानवी के गीतों में ऐसा जादू, आज भी गुनगुनाते हैं फैन्स
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पद्मश्री सम्मानित साहिर लुधियानवी के ये गीत आज भी लोगों को उनकी याद दिलातें हैं
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लखनऊ : साहिर लुधियानवी एक कवि और फिल्मी गीतकार थे, जिन्होंने उर्दू और हिंदी भाषाओं में लिखा था। साहिर के काम को हिंदी सिनेमा में खूब सराहा गया। साहिर ने फिल्म ताज महल (1963) और कभी कभी (1976 के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता।

पद्मश्री सम्मानित

साहिर लुधियानवी को 1971 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 8 मार्च 2013 को, साहिर के जन्म की 92वें वर्षगांठ सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया गया था। साहिर का जन्म 8 मार्च 1921 को करीमपुरा, लुधियाना, पंजाब में हुआ था।

साहिर की शिक्षा लुधियाना के खालसा हाई स्कूल में हुई थी। फिर उन्होंने लुधियाना के गवर्नमेंट कॉलेज में दाखिला लिया। वहां का सभागार उनके नाम पर है। कॉलेज के छात्र के रूप में, साहिर अपनी ग़ज़लों और नज़्मों (उर्दू में कविता) और सशक्त भाषणों के लिए लोकप्रिय थे।

बतौर गीतकार करियर की शुरुआत

साहिर ने फिल्म आजादी की राह पर (1949) बदल राही है जिंदगी गाने से फिल्मों में शुरुआत की। जिसके बाद उन्होंने फिल्म फिर सुबह होगी, प्यासा समेत कई फिल्मों में बतौर गीतकार काम किया।

आज भी ये गीत सबकी पसंद

कई गीत बने लेकिन जो गीत आज भी सभी के दिलों दिमाग में बसा हुआ है वो हैं ..मैं पल दो पल का शायर हूं, पल दो पल मेरी जावनी है... इस गीत को भी मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने ही लिखा है। इतने बरस बाद भी उनकी शायरी और नज्म लोगों के जहन में बैठे हुए है।

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ऐसे हुई थी मृत्यु

25 अक्टूबर 1980 को, 59 वर्ष की आयु में, साहिर की अचानक हृदयगति रुकने से मृत्यु हो गई थी । दुनिया को अलविदा कहे चार दशक से ज़्यादा हो चुके हैं लेकिन आज भी नए गीतकारों से पूछें तो वे साहिर का ही नाम लेते हैं।

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