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SC : कुणाल कामरा और रचिता तनेजा की बड़ी मुश्किल, 6 हफ्तों में देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने उनसे छह सप्ताह में अपना जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा हैं फिलहाल कुणाल कामरा और रचिता तनेजा को अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है।इस नोटिस को जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने कानून के छात्र आदित्य कश्यप द्वारा दायर याचिका पर इसे जारी किया है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 18 Dec 2020 7:26 AM GMT

SC : कुणाल कामरा और रचिता तनेजा की बड़ी मुश्किल, 6 हफ्तों में देना होगा जवाब
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मुंबई: सुप्रीम कोर्ट ने कार्टूनिस्ट रचिता तनेजा और हास्य कलाकार कुणाल कामरा के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट के कारण नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की याचिका पर आज सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कुणाल कामरा और रचिता तनेजा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे छह सप्ताह में अपना जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा हैं फिलहाल कुणाल कामरा और रचिता तनेजा को अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है। लेकिन दोनों को नोटिस जारी करने के बाद छह सप्ताह में अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करवानी होगी। इस नोटिस को जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने कानून के छात्र आदित्य कश्यप द्वारा दायर याचिका पर इसे जारी किया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने दिया नोटिस

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस नरसिम्हा ने कहा कि तनेजा द्वारा किए गए ट्वीट का उद्देश्य केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय को बदनाम करना और उसका मजाक उड़ाना था। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह 'घोर अशिष्ट और निंदनीय' था और सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को कमतर करने की कोशिश थी। अटॉर्नी जनरल ने साफ़ शब्दों में कहा यहां अवमानना का मामला बनता है। यह देखने के बाद कि उनके हास्य चित्र ने 'न्यायपालिका में जनता के विश्वास को डिगा कर रख दिया। न्यायपालिका के प्रति लोगों के भरोसे को खत्म करने के मकसद से इस तरह के ट्वीट किए गए।

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ट्वीट में न्यायालय की गरिमा को किया धूमिल

विधि के छात्र श्रीरंग कटनेश्वर्कर कामरा के खिलाफ दायर याचिकाओं में एक याचिका इसने भी दायर की हैं। कटनेश्वर्कर का दावा हैं कि 11 नवंबर को कामरा ने ये ट्वीट उस समय किया जब साल 2018 में आत्महत्या करने पर मजबूर करने के मामले में आरोपी पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने अग्रिम जमानत याचिका मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा खारिज करने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी और शीर्ष अदालत में सुनवाई चल रही थी। याचिका में इस बात का आरोप लगा हैं अर्नब गोस्वामी को उच्च न्यायालय द्वारा बेल मिलने के बाद कुणाल कामरा ने फिर कई ट्वीट किए जिसमें साफ दिखाई दे रहा था की उच्चतम न्यायालय की अपमान वाली बातें थी, सर्वोच्च न्यायालय गरिमा को और कम किया।

कुणाल का अपमानजनक ट्वीट

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कुणाल फॉलोवर 17 लाख के करीब हैं और इस अवमानना करने वाले ले ट्वीट कुणाल को फॉलो करे वाले ने देखा और रीट्वीट किया और कहा,कामरा को अदालत की अवमानना को लेकर आगाह किया, उन्होंने ‘‘अशिष्ट, आक्रमक और बिना पश्चाताप’’ वाला व्यवहार किया और दिखाया कि शीर्ष अदालत के लिए उनमें ‘ सम्मान’ नहीं है। याचिकाकर्ता ने दावे के साथ कहा कि कामरा के ट्वीट इतने ‘खराब भावना’ लिए हुए थे कि साधारण व्यक्ति भी समझ सकता है कि वे शीर्ष अदालत के लिए अपमानजनक हैं। उनका कहना हैं कि हम भारतीय नागरिकों में विधि द्वारा स्थापित अदालत का सम्मान करते है। और इस देश में कानून का अनुपालन करने वाले लोग ऐसे अपमानजनक ट्वीट को बर्दाश्त नहीं कर सकतें हैं।

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