सावधान: अब घंटी बजते ही 25 सेकेंड में उठाना होगा फोन, नहीं तो ….

टेलीकॉम ऑपरेटर भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने अपने नेटवर्क से बाहर जाने वाली आउटगोइंग कॉल्स पर रिंग टाइम को घटाकर 25 सेकेंड कर दिया है। रिंग टाइम का आशय कॉल आने के समय फोन पर बजने वाली घंटी से है।

नई दिल्ली: टेलीकॉम ऑपरेटर भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने अपने नेटवर्क से बाहर जाने वाली आउटगोइंग कॉल्स पर रिंग टाइम को घटाकर 25 सेकेंड कर दिया है।

रिंग टाइम का आशय कॉल आने के समय फोन पर बजने वाली घंटी से है। आमतौर पर कॉल आने पर फोन की घंटी 40 से 45 सेकेंड तक बजती है लेकिन अब यह केवल 25 सेकेंड तक ही बजेगी।

रिलायंस जियो के साथ प्रतिस्पर्धा के चलते एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने रिंगर टाइम घटाने का फैसला किया है। भारती एयरटेल और वोडफोन आइडिया द्वारा उठाए गए इस कदम का एक मकसद कॉल जुड़े रहने के समय के मुताबिक उसपर लगने वाले इंटरकनेक्ट उपयोग शुल्क (आईयूसी) की लागत घटाना भी है।

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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इंटरकनेक्ट शुल्क मामले में उसके किसी आधिकारिक निर्णय पर पहुंचने से पहले आपस में कड़ी प्रतिस्पर्धा में उलझी दूरसंचार कंपनियों से सर्वसम्मति से किसी समाधान पर पहुंचने के लिए कहा था।

इंटरकनेक्ट़ उपयोग शुल्क किसी एक नेटवर्क को दूसरे नेटवर्क द्वारा दी जाने वाली सेवाओं पर दिया जाता है।  इसमें जिस नेटवर्क से कॉल की जाती है, वह कॉल पहुंचने वाले नेटवर्क को यह शुल्क अदा करता है। अभी इसकी दर छह पैसा प्रति मिनट है।

एयरटेल ने ट्राई को लिखे अपने पत्र में कहा है कि उसने फोन की घंटी बजने की अवधि को 25 सेकेंड तक सीमित करने का निर्णय लिया है। जियो के ऐसा करने के बाद यह फैसला लिया गया है।

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वोडाफोन, आइडिया ने उठाया ये कदम

इससे ग्राहकों को असुविधा हो सकती है। ट्राई की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट निर्देश ना होने के कारण कंपनी के कोई और विकल्प नहीं बचा है। वोडाफोन आइडिया ने भी चुनिंदा क्षेत्रों में फोन की घंटी बजने का समय घटाने का फैसला किया है।

ट्राई से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नियामक 14 अक्टूबर को कॉल किए जाने वाले व्यक्ति के फोन की घंटी बजने की समय-सीमा पर एक खुली चर्चा कराने की योजना बना रहा है।

एयरटेल का कहना है कि फोन की घंटी बजने की अवधि कम करने से मिस्डा कॉल की संख्यान बढ़ेगी। इससे किसी व्यिक्ति को कॉल लगाने और साथ ही मिस्ट कॉल देखने के बाद वापस कॉल करने की संख्या भी बढ़ेगी।  इससे ग्राहकों के अनुभव के साथ-साथ नेटवर्क की गुणवत्तास पर बुरा असर पड़़ेगा।

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