First Anti-Aging Pill: शुरू हुआ पहली एंटी-एजिंग गोली का क्लिनिकल ट्रायल, ज्यादा जिंदगी की उम्मीद जगी

First Anti-Aging Pill: यह गोली मेटाबोलिज्म यानी चयापचय प्रक्रियाओं को बदलकर काम करती है। इसका परीक्षण 10 साल से अधिक उम्र के और कम से कम साढ़े छह किलो वजन वाले 1,000 कुत्तों पर किया जाएगा।

Neel Mani Lal
Published on: 7 Feb 2024 11:00 AM IST
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first anti-aging pill   (photo: social media )

First Anti-Aging Pill: पहली एंटी-एजिंग गोली का क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो चुका है, और शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यह लोगों के लिए जीवनकाल बढ़ाने वाली दवाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी। फिलवक्त ये ट्रायल कुत्तों पर शुरू किया गया है क्योंकि उनमें ट्रायल के नतीजे सबसे जल्दी मिल जाएंगे।

सैन फ्रांसिस्को स्थित पशु चिकित्सा स्टार्टअप "लॉयल" ने एक चबाने योग्य गोली डेवलप की है, और बड़े कुत्तों के लिए इंजेक्शन वाली एंटी-एजिंग दवा के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से अनुमोदन की प्रतीक्षा कर रहा है। उम्मीद है कि यह दवा बड़ी नस्लों में सबसे अधिक सफल होगी। बड़ी नस्ल के कुत्ते कम उम्र में ही मर जाते हैं।

मेटाबोलिज्म को बदल देती है

यह गोली मेटाबोलिज्म यानी चयापचय प्रक्रियाओं को बदलकर काम करती है। इसका परीक्षण 10 साल से अधिक उम्र के और कम से कम साढ़े छह किलो वजन वाले 1,000 कुत्तों पर किया जाएगा। कुत्तों की चार वर्षों तक निगरानी की जाएगी, और उनके जीवनकाल और जीवन की गुणवत्ता की तुलना प्लेसबो दिए गए कुत्तों से की जाएगी। उम्मीद है कि इससे उनका जीवन कम से कम एक अतिरिक्त वर्ष बढ़ जाएगा।

अगले साल मंजूरी मिलने की उम्मीद

कंपनी का लक्ष्य 2025 की शुरुआत तक एफडीए से सशर्त मंजूरी प्राप्त करना है। कम्पनी ने कहा है कि वह पालतू जानवरों के मालिकों के लिए इलाज को किफायती बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कुत्तों पर ही ट्रायल क्यों?

शोधकर्ताओं ने पाया है कि मानव उम्र बढ़ने का अध्ययन करने के लिए कुत्ते एक आदर्श मॉडल हैं। वे मनुष्यों के समान पर्यावरणीय परिस्थितियों का अनुभव करते हैं और बीमारी के जोखिम के साथ उम्र से संबंधित गतिशीलता समान प्रतीत होती है। जानकारों का कहना है कि कुत्ते यह पता लगाने के लिए आदर्श मॉडल हैं कि समय के साथ इंसानों का पतन क्यों होता है।

लॉयल कम्पनी का कहना है कि कुत्तों में एंटी-एजिंग का अध्ययन मनुष्यों पर किए गए समान अध्ययनों की तुलना में तेज़ होता है। कुत्तों में उम्र बढ़ने की दर इतनी अधिक है कि आप लगभग 6 से 12 महीनों में बता सकते हैं कि कोई दवा उस पर असर कर रही है या नहीं। जबकि 6 से 12 महीनों में आप किसी व्यक्ति में कुछ भी परिवर्तन नहीं देख पाएंगे।

और भी रिसर्च चल रहे

लॉयल एकमात्र ग्रुप नहीं है जो कुत्तों के जीवन को बढ़ाने पर काम कर रहा है। शोधकर्ताओं की एक अलग टीम यह देखने के लिए परीक्षण कर रही है कि क्या एक दवा जो प्रयोगशाला के चूहों के जीवन को बढ़ाने में कारगर साबित हुई है, वह कुत्तों के लिए भी ऐसा कर सकती है।कई अरबपतियों ने भी अपना ध्यान मानव जीवन अवधि बढ़ाने की ओर लगाया है। जेफ बेजोस ने अल्टोस लैब्स नामक एक एंटी-एजिंग स्टार्टअप में निवेश किया है, और पीटर थिएल और सैम ऑल्टमैन ने इसी तरह के दीर्घायु-केंद्रित उद्यमों का समर्थन किया है।

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