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Beti Bachao, Beti Padhao Yojana का देश में दिखने लग असर

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वपूर्ण  योजना बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं रंग लाने लगी है। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले बदलावों पर नजर रखने वाली संस्था असर की 2018 की रिपोर्ट कह रही है। रिपोर्ट कहती है लड़कियों के स्कूल नहीं जाने की संख्या में बड़ी कमी देखने को मिली है।

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RishiBy Rishi

Published on 31 Jan 2019 1:48 PM GMT

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नई दिल्ली : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वपूर्ण योजना बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं रंग लाने लगी है। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले बदलावों पर नजर रखने वाली संस्था असर की 2018 की रिपोर्ट कह रही है। रिपोर्ट कहती है लड़कियों के स्कूल नहीं जाने की संख्या में बड़ी कमी देखने को मिली है। 2006 में 11 से 15 साल की उम्र में स्कूल ना जाने वाली लड़कियों की संख्या 10 प्रतिशत से ज्यादा थी। जोकि पिछले वर्ष में सिर्फ 4 प्रतिशत रह गई है।

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असर की इस रिपोर्ट की इस तरह से भी समझा जा सकता है कि लड़कियों के स्कुल जाने की संख्या बढ़ी है। लड़कियों के स्कूल जाने की संख्या बढ़ी है। रिपोर्ट में जो चौकाने वाली खबर है ,वह अकेले मध्य प्रदेश से है। जहां स्कूल न जाने वाली लड़कियों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2006 में मध्यप्रदेश में यह संख्या जहां 7.3 प्रतिशत थी, वहीं 2018 में यह बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई।

क्या है राज्यों की स्थति

आपको बता दें, मोदी सरकार ने पिछले 5 वर्षों में लड़कियों को स्कूल से जोड़ने के लिए देश भर में अभियान चला रखा है। यूपी, बिहार में स्कूलों में नामाकंन का प्रतिशत 96 प्रतिशत फीसद से ज्यादा देखने को मिला है लेकिन नामाकंन के बाद स्कूल नहीं आने वाले बच्चे भी काफी अधिक है।

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नामांकन के बाद स्कूल ना जाने वालों का प्रतिशत

उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य़प्रदेश व मणिपुर में यह संख्या 40 फीसद से अधिक है।

ये राज्य हैं अव्वल

गुजरात ,महाराष्ट्र कर्नाटक और तमिलनाडु प्रमुख में 85 फीसद से ज्यादा बच्चे कक्षा में उपस्थिति मिले।

Rishi

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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