Bihar Election Results 2025: सीमांचल में जदयू की आवाज मनजार आलम 7383 वोटों से हारे

Jokihat Vidhan Sabha Election Results 2025: मनजार आलम बिहार की सीमांचल राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं...

Yogesh Mishra
Published on: 14 Nov 2025 8:27 PM IST
Bihar Election Results 2025 Jokihat Vidhan Sabha Seat JDU Chunav Parinam Manzar Alam Result Vote
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Bihar Election Results 2025 Jokihat Vidhan Sabha Seat JDU Chunav Parinam Manzar Alam Result Vote

Jokihat Vidhan Sabha Election Results 2025: मनजार आलम बिहार की सीमांचल राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जो तीन दशकों से अल्पसंख्यक समाज के मुद्दों, विकास योजनाओं और ग्रामीण समस्याओं पर निरंतर सक्रिय रहे हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के रूप में उन्होंने अररिया–किशनगंज क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्हें अक्सर “नीतीश कुमार के विश्वसनीय पुराने सिपाही” के रूप में भी जाना जाता है। 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में वे जोकीहाट से जदयू के उम्मीदवार हैं। यह मुस्लिम बहुल सीट है जहाँ लगभग 70% मुस्लिम वोटर हैं। JDU मनजार आलम (जोकीहाट विधानसभा)

मनजार आलम का प्रारंभिक जीवन और परिवार (Bihar JDU Manzar Alam Bio in Hindi)

मनजार आलम का जन्म अररिया जिले के जोकीहाट क्षेत्र के एक साधारण मुस्लिम परिवार में हुआ। सीमांचल के ग्रामीण इलाकों में पली-बढ़ी पीढ़ियों की तरह उनका बचपन भी बाढ़, गरीबी, शिक्षा की कमी और असमान विकास जैसी चुनौतियों के बीच बीता। इन्हीं परिस्थितियों ने उन्हें किशोरावस्था से ही सामाजिक गतिविधियों की ओर प्रेरित किया। परिवार के बारे में सार्वजनिक जानकारी सीमित है, लेकिन वे अपने क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क और सामुदायिक कार्यक्रमों से जुड़े रहते हैं।

मनजार की शिक्षा स्थानीय मदरसों और सरकारी विद्यालयों में हुई। आगे उन्होंने स्नातक स्तर तक पढ़ाई की। राजनीति में प्रवेश से पहले वर्षों तक वे सामाजिक कार्य, पंचायत गतिविधियों और सामुदायिक नेतृत्व में सक्रिय रहे। उनकी पृष्ठभूमि ने उन्हें सीमांचल के मुस्लिम समाज, बाढ़-प्रभावित इलाकों और ग्रामीण युवाओं की समस्याओं की गहरी समझ दी।

मनजार आलम का राजनीतिक करियर (Bihar JDU Manzar Alam Political Career in Hindi)

मनजार आलम ने 1990 के दशक के अंत में राजनीति में प्रवेश किया और जल्द ही जदयू के विश्वसनीय चेहरों में शामिल हो गए। वे नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं और सीमांचल में पार्टी विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

2000 में वह पहली बार जोकीहाट सीट से जदयू प्रत्याशी बने लेकिन राजद के सरफराज आलम से हार गए। 2005 में उन्हें जोकीहाट से पहली बड़ी जीत मिली और वे नीतीश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बने। 2010–2015 में मनजार जोकीहाट के दोबारा विधायक बने। 2019 में मनजार अररिया लोकसभा सीट से लड़े लेकिन भाजपा के प्रदीप सिंह से हार गए। 2020: जोकीहाट गठबंधन में भाजपा के खाते में चला गया; मनजार बाहर रहे, लेकिन संगठन के साथ वफादारी बनाए रखी। 2025 में जदयू ने उन्हें दोबारा जोकीहाट से टिकट दिया, जिससे उनकी वापसी को बड़ा राजनीतिक संकेत माना गया।

मनजार की राजनीति का केंद्र हमेशा अल्पसंख्यक कल्याण, बाढ़ नियंत्रण, सड़क और शिक्षा सुधार रहा है। सीमांचल में वे “पुराने भरोसेमंद चेहरा” माने जाते हैं।

जोकीहाट में इस बार मनजार आलम का फोकस अल्पसंख्यक शिक्षा सुधार, बाढ़ नियंत्रण और तटबंध सुरक्षा, ग्रामीण सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएँ, युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार तथा नीतीश कुमार की विकास योजनाओं का लाभ गाँवों तक पहुँचाने पर रहा है। नीतीश कुमार स्वयं उनके प्रचार में उतरे थे।

विवाद और आलोचनाएँ

मनजार का राजनीतिक करियर बड़े विवादों से लगभग मुक्त रहा है, लेकिन कुछ आलोचनाएँ हमेशा बनी रहीं—

2019 लोकसभा हार: भाजपा के प्रदीप सिंह से हार के बाद विपक्ष ने उन्हें “कमजोर उम्मीदवार” बताया।

2020 में टिकट न मिलना: गठबंधन कारणों से सीट जाने पर स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष, हालांकि उन्होंने संगठन के प्रति वफादारी बनाए रखी।

सीमांचल में वोट विभाजन: जन सुराज और एआईएमआईएम के उदय के बीच कुछ नेता उन्हें “पुरानी शैली की राजनीति” कहकर निशाना बनाते हैं।

उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

व्यक्तिगत जीवन और संपत्ति

मनजार आलम विवाहित हैं और ग्रामीण जीवन का सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं। उनके परिवार की सार्वजनिक जानकारी सीमित है। 2020 के हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 20–30 लाख के बीच है और वे देनदारी-मुक्त हैं। वे सोशल मीडिया पर सीमित गतिविधि रखते हैं और प्रायः जदयू के आधिकारिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से संवाद करते हैं।

मनजार आलम सीमांचल में जदयू की सबसे स्थिर मुस्लिम आवाज, पुराना नेतृत्व और अनुभव का प्रतीक हैं। उनकी उम्मीदवारी 2025 के चुनाव में इस बात की परीक्षा है कि क्या सीमांचल का मुस्लिम वोट बैंक एक बार फिर अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा करेगा या नए प्रयोगों का रुख करेगा। परिणाम इस क्षेत्र की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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