बिहार: सृजन घोटाले के आरोपी महेश मंडल की अस्पताल में मौत

बिहार में सृजन घोटाले के आरोपी महेश मंडल की अस्पताल में मौत हो गई। महेश को कैंसर था और वो अस्पताल में इलाज करा रहा था। रविवार 20 अगस्त की रात उसकी अस्पताल में ही मौत हो गई। महेश को पिछले हफ्ते भागलपुर से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद भी महेश का इलाज अस्पताल में चल रहा था। उसके परिवारवालों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से मौत हुई है।

Published by priyankajoshi Published: August 21, 2017 | 5:49 pm
Modified: August 21, 2017 | 6:21 pm

भागलपुर : बिहार में सृजन घोटाले के आरोपी महेश मंडल की अस्पताल में मौत हो गई। महेश को कैंसर था और अस्पताल में इलाज चल रहा था। रविवार 20 अगस्त की रात उसकी अस्पताल में ही मौत हो गई ।

महेश को पिछले हफ्ते भागलपुर से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद भी महेश का इलाज अस्पताल में चल रहा था। उसके परिवारवालों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से मौत हुई है।

क्या बताया पुलिस अधिकारी ने?
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सृजन घोटाले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार भागलपुर जिला कल्याण विभाग से निलंबित नाजिर महेश मंडल की तबियत रविवार की रात जेल में बिगड़ गई। आनन-फानन में जेल प्रशासन महेश को एक स्थानीय अस्पताल ले गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

कई अहम जानकारियां थी
महेश मंडल को 13 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन तबियत खराब होने के बाद जेल से अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया था। शुक्रवार और शनिवार को महेश का अस्पताल में इलाज हुआ और उसके बाद उसे वापस जेल भेज दिया गया। रविवार को दोबारा तबियत बिगड़ने पर महेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई। कहा जा रहा है कि महेश मंडल इस घोटाले की जांच की अहम कड़ी था, उसके पास कई महत्वपूर्ण जानकारियां थी, जिससे इस घोटाले की परतें खुल सकती थी।

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मंडल के घरवालों ने लगाया लापरवाही का आरोप
मंडल की किडनी खराब थी और उसे डायबिटीज की शिकायत थी। मंडल के परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने जानबूझकर उनका इलाज सही समय पर नहीं कराया, जिस कारण उनकी मौत हो गई। घरवालों का कहना है कि मंडल इस मामले में कई लोगों का राज खोल सकते थे।

क्या है मामला

भागलपुर के सबौर स्थित स्वयंसेवी संस्था सृजन महिला विकास सहयोग समिति के बैंक खाते में सरकारी योजनाओं के पैसे रखे जाते थे। जिसका उपयोग ये एनजीओ अपने व्यक्तिगत काम के लिए करती थी। यह गोरखधंधा 2009 से चल रहा था।

13 लोगों की हुई गिरफ्तारी
सीएम नीतिश कुमार ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की बात की है। फिलहाल इसकी जांच आर्थिक अपराध इकाई कर रही है। इस मामले में 700 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि के घोटाले का आरोप है। अब तक इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

क्या है ‘सृजन’

सृजन, बिहार का महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करने वाला एनजीओ है। सृजन महिलाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए पापड़, मसाले, साड़ियां और हैंडलूम के कपड़े बनवाता है। इसके अलावा और भी कई तरह के काम सृजन सरकारी ग्रांट के जरिए करता था। लेकिन यह सब काम केवल दिखावे के तौर पर ही किए जाते थे। असली काम सरकारी खाते से पैसा निकालने का था। सृजन के खाते में सहायता राशि आने के बाद इसे चलाने वाले आपस में बांट लिया करते थे। इसमें कई लोगों का हिस्सा हुआ करता था जिसमें नेता,अधिकारी और पत्रकार भी शामिल हैं। इसे बिहार के चारा घोटाले से भी बड़ा माना जा रहा है। अभी तक के अनुमान के अनुसार 700 करोड़ का घोटाला हुआ है। यदि जांच सही दिशा में होती है तो ये राशि बढ़ सकती है ।

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