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राजस्थान में बिजली संकट, राजधानी समेत पूरे राज्य में बिजली कटौती के निर्देश

suman

sumanBy suman

Published on 8 Oct 2017 7:32 AM GMT

राजस्थान में बिजली संकट, राजधानी समेत पूरे राज्य में बिजली कटौती के निर्देश
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जयपुर: राज्य की विद्युत उत्पादन इकाइयों में कोयले की जबरदस्त किल्लत चल रही है। इन थर्मल यूनिटों के पास सिर्फ एक से दो दिन का कोयला बचा है। कुछ जगहों पर कोयला खत्म हो जाने से यूनिट को बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं एनर्जी एक्सचेंज में खरीदने के लिए बिजली नहीं है और जो है भी वह काफी मंहगी है। बिजली संकट को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की जोरदार कटौती हो गई है। वहीं जिला मुख्यालय समेत बड़े कस्बों में पावर कट करने का खाका तैयार है। जिसे मुख्यमंत्री से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही शहरों में भी पावर कट शुरू हो जाएगा। खबरों के अनुसार दीपावली पर ब्लैक आउट ना हो इसके लिए पावर कट किया जा रहा है।

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कोयले के संकट को लेकर मुख्यमंत्री ऊर्जा मंत्रालय और कोयला मंत्रालय के सम्पर्क में है। बिजली कंपनियों ने प्रदेश के सभी जिलों और बड़े कस्बों में बिजली की घोषित कटौती करने का खाका तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजा था। जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार अब जिला मुख्यालय, नगरपालिकाओं में पर सुबह 9 से 11 बजे तक तो वहीं गांवों में सुबह 11 से दोपहर 2 बजे बिजली कटौती की जाएगी।

कटौती का असर कृषि क्षेत्र पर सीधे तौर पर पड़ेगा। कृषि क्षेत्र में अब प्रदेश में चार की जगह तीन ब्लॉक में ही बिजली मिलेगी। कृषि क्षेत्र में पहले ब्लॉक को सुबह 4 बजे से 9 बजे तक, दूसरे ब्लॉक को 9 बजे से 2 बजे तक और तीसरे ब्लॉक को दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक बिजली की आपूर्ति होगी। किसानों को मिल रहे चौथे ब्लॉक की सप्लाई भी प्रदेश के किसानों को दूसरे ब्लॉक के सा​थ ही कर दी जायेगी।

राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कमी से थर्मल पावर पर निर्भर राज्यों में बिजली आपूर्ति की स्थिति अत्यधिक प्रभावित हुई है। इस वजह से राजस्थान के थर्मल पावर स्टेशनों में विद्युत उत्पादन में जोरदार कमी आ गई है। वर्तमान में प्रदेश में कोयले की कमी की वजह से विद्युत उपलब्धता में लगभग 3000 मेगावाट यानि 720 लाख यूनिट प्रतिदिन की कमी हो गई है। इससे प्रदेश की विद्युत आपूर्ति की स्थिति प्रभावित हुई है।

प्रदेश के थर्मल बिजली उत्पादक इकाइयों में कोटा थर्मल और सूरतगढ़ थर्मल के पास एक दिन का कोयला बताया जा रहा है। वहीं छबड़ा थर्मल में दो दिन का है और कालीसिन्ध की दोनों इकाइयों को चलाने के लिए तो कोयला ही खत्म हो गया है। यही नहीं निजी क्षेत्र की पॉवर यूनिटों के पास भी कोयले की आपू्र्ति नहीं होने से बिजली का उत्पादन ठप हो गय़ा है।

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राजस्थान मे तीन माध्यम से कोयले की आपूर्ति होती है। जिसमें साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड लिमिटेड (South Eastern Coalfields Limited) नार्दर्न कोलफील्‍ड्स लिमिटेड और पारसा कांटे कोलिरियस लिमिटेड (Parsa Kente Collieries Ltd.) से मिलता है। इनकी खदानें छत्तीसगढ़ और झारखंड में है। जहां इस बार बारिश होने के कारण खदानों में पानी भर गया है। जिससे कोयले की निकासी नहीं हो पाई है।

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