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CAG रिपोर्ट में दिल्ली हेल्थ सेक्टर को लेकर बड़ा खुलासा, खुल गया AAP के भारी गड़बड़ी का पोल

AAP Exposed in CAG report: सीएजी रिपोर्ट ने 6 साल के दौरान दिल्ली की पब्लिक हेल्थ सर्विस सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी को उजागर किया है। अरविंद केजरवाल वाली दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 के बीच नए बेड जोड़ने का वादा किया था। और...

Sakshi Singh
Published on: 28 Feb 2025 1:05 PM IST (Updated on: 28 Feb 2025 1:13 PM IST)
Delhi News
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AAP Exposed in CAG Report: रेखा गुप्ता वाली दिल्ली सरकार ने 25 फरवरी को सदन में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी (CAG) रिपोर्ट पेश किया। इसमें दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सूत्रों की मानें तो सीएजी रिपोर्ट ने 6 साल के दौरान दिल्ली की पब्लिक हेल्थ सर्विस सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी यानी कुप्रबंधन, वित्तीय लापरवाही और जवाबदेही की कमी को उजागर किया है।

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अस्पतालों में आसीयू (ICU)नहीं है जबकि 12 अस्पतालों में एंबुलेंस नहीं उपलब्ध है। इसके साथ ही मोहल्ली क्लीनिकों में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है।

यही नहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोविड-19 से निपटने के लिए केंद्र सरकार से दिल्ली सरकार को 787.91 करोड़ रुपये में से सिर्फ 582.84 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। बाकि बचे राशि को हेल्थ सेक्टर में उपयोग नहीं किया गया। जिसके वजह से कोरोना काल के दौरान जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती और वेतन के लिए 52 करोड़ रुपये मिले। इसमें से 30.52 करोड़ रुपये ही नहीं किए गए। इससे ये साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य कर्मियों की केजरीवाल सरकार में पर्याप्त भर्ती नहीं की गई। इसके अलावा पीपीई किट और अन्य मेडिकल सप्लाई के लिए 119.85 करोड़ में से 83.14 रुपये खर्च ही नहीं हुए।

अरविंद केजरवाल वाली दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 के बीच नए बेड जोड़ने का वादा किया था। लेकिन सिर्फ 1357 बेड ही जोड़े गए। जो कि तय किए टार्गेट का महज 4.24 प्रतिशत है। बेड ऑक्यूपेंसी 101%से 189% तक रही। इस हिसाब से तो यानी एक बेड पर दो मरीजों को रखा गया या फिर मरीजों को फर्श पर इलाज कराना पड़ा।

रिपोर्ट में ये भी है कि दिल्ली में तीन नए अस्पताल बनाए गए, लेकिन सभी प्रोजेक्ट पहले ही सरकार के कार्यकाल में शुरू हुए थे। इनके निर्माण में 5 से 6 साल की देरी की गई। ये हैं तीन अस्पताल-

1.इंदिरा गांधी अस्पताल- 5 साल की देरी, लागत 314.9 करोड़ रुपये बढ़ी।

2.बुराड़ी अस्पताल- 6 साल की देरी, लागत 41.26 करोड़ रुपये बढ़ी।

3.एमए डेंटल अस्पताल (फेज-2)- 3 साल की देरी, लागत 26.36 करोड़ रुपये बड़ी।

सीएजी रिपोर्ट में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी भी देखने को मिली।

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य विभागों में 8,194 पद खाली पड़े पाए गए।

नर्सिंग स्टाफ की 21% और पैरामेडिकल स्टाफ की 38% कमी पाई गई।

राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की 50-74% कमी पाई गई।

नर्सिंग स्टाफ की 73-96% तक भारी कमी दर्ज की गई।

सर्जरी के लिए लंबा इंतजार

  • कई उपकरण खराब -लोक नायक अस्पताल में बड़ी सर्जरी के लिए 2-3 महीने और बर्न व प्लास्टिक सर्जरी के लिए 6-8 महीने का इंतजार करना पड़ा।
  • चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय (CNBC) में पीडियाट्रिक सर्जरी के लिए 12 महीने का इंतजार करना पड़ा।
  • RGSSH,CNBC और JSSH जैसे अस्पतालों में कई एक्स-रे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीनें बेकार पड़ी रहीं।

बदहाल मिला मोहल्ला क्लीनिक

  • 27 अस्पतालों में से 14 में ICU सेवा उपलब्ध नहीं थी।
  • 16 अस्पतालों में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं थी।
  • 8 अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं थी।
  • 12 अस्पतालों में एंबुलेंस की सुविधा नहीं थी।
  • CATS एंबुलेंस भी जरूरी उपकरणों के बिना चलाई जा रही थीं।


Sakshi Singh

Sakshi Singh

Senior Content Writer

मेरा नाम साक्षी सिंह है। मूलत: प्रयागराज की रहने वाली हूं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट हूं। मैंने बैचलर और मास्टर दोनों ही जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन विषय से किया है। पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण (प्रिंट) से किया। दैनिक भास्कर (डिजिटल) में प्रयागराज में फील्ड रिपोर्टर रही। इसके बाद मैंने अमृत विचार, राजस्थान पत्रिका और नवभारत डिजिटल में लगभग 18 महीने बतौर कंटेट राइटर काम किया। इस संस्थान में नेशनल और इंटरनेशनल की रियल टाइम की खबरें लिखती रही। इसके साथ ही इस संस्थान में मैंने यहां शिफ्ट इचार्ज के तौर पर टीम भी लीड किया है। इस क्षेत्र में काम करते हुए लगभग साढ़े तीन साल से ज्यादा समय हो गए हैं। मेरी रुचि और पकड़ लगभग सभी विषयों पर है। लेकिन इंडियन पॉलिटिक्स और इंटरनेशनल रिलेशन्स में विशेष दिलचस्पी है।

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