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Captain Amarinder Singh: अमरिंदर दूसरी बार अपनी पार्टी का करेंगे विलय, पहले कांग्रेस का हाथ अब BJP का साथ

Captain Amarinder Singh: 1980 के दशक में पूर्व पीएम राजीव गांधी के कहने पर सियासत में दस्तक देने वाले कैप्टन अमरिंदर का नया ठिकाना अबकी बार भारतीय जनता पार्टी होगी।

Krishna Chaudhary
Updated on: 19 Sep 2022 10:57 AM GMT
Captain Amarinder Singh
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 कैप्टन अमरिंदर सिंह (photo: social media ) 

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Captain Amarinder Singh: दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके 80 वर्षीय कैप्टन अमरिंदर सिंह उम्र के इस पड़ाव में नई सियासी पारी खेलने जा रहे हैं। 1980 के दशक में पूर्व पीएम राजीव गांधी के कहने पर सियासत में दस्तक देने वाले कैप्टन अमरिंदर का नया ठिकाना अबकी बार भारतीय जनता पार्टी होगी। वो आज ही बीजेपी ज्वाइन करेंगे। उनके साथ बेटा रणइंदर सिंह, बेटी जयइंदर कौर, मुक्तर की पूर्व विधायक करण कौर बराड़ और भदौड़ से पूर्व विधायक निर्मल सिंह भी बीजेपी में शामिल होंगे।

कैप्टन आज अपनी पार्टी पंजाब लोकहित कांग्रेस का भी भाजपा में विलय करेंगे। इस उन्होंने कांग्रेस छोड़ने के बाद बनाया था। कैप्टन रविवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे। सोमवार को उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात की फोटो भी सोशल मीडिया पर शेयर की है। नड्डा ने कैप्टन को उनकी नई सियासी पारी के लिए शुभकामनाएं दी।

दूसरी बार अपने दल को किसी अन्य दल में विलय करेंगे कैप्टन

पंजाब की राजनीति में कुछ समय पहले तक केवल दो बड़े चेहरों की ईद-गिर्द घुमती रही है। उनमें से एक थे पूर्व सीएम और अकाली नेता प्रकाश सिंह बादल और दूसरे थे कैप्टन अमरिंदर सिंह। कैप्टन गांधी परिवार के करीबी होने के कारण कांग्रेस में काफी रसूख रखते थे। इसी के बदौलत वे दो बार पंजाब के मुख्यमंभी बने। कैप्टन इसबार राज्य में अपना पुराना इतिहास फिर से दोहराने जा रहे हैं। ऐसा दूसरी बार होने जा रहा है जब वो अपनी पार्टी की विलय किसी अन्य दल में कर रहे हैं।

अमरिंदर सिंह ने अपनी सियासी पारी की शुरूआत कांग्रेस से की थी। लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टॉर के चलते उन्होंने बाद में कांग्रेस छोड़ दी और शिरोमणी अकाली दल को ज्वाइन कर लिया था। अकाली सरकार में मंत्री बनाए जाने के बावजूद उन्हें ये जगह रास नहीं आई और साल 1992 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी खुद की पार्टी अकाली दल (पंथक) बना ली। लेकिन चुनाव में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। साल 1998 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अपनी पार्टी के दम पर सरकार बनाने का ख्वाब देख रहे थे। लेकिन उन्हें उस चुनाव में अपने सियासी करियर के सबसे शर्मनाक पराजय से दो – चार होना पड़ा। उनकी पार्टी भी पूरे पंजाब में पिट गई।

1998 में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया

कैप्टन अपनी सियासी ताकत की हकीकत समझ चुके थे। उन्होंने उसी साल यानी 1998 में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। गांधी परिवार से उनकी करीबी काम आई और कांग्रेस ने पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्टल की जगह उन्हें राज्य की कमान सौंप दी। साल 2002 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन के नेतृत्व में कांग्रेस ने जीत हासिल की और वे पहली बार मुख्यमंत्री बने। कैप्टन 22 साल बाद इतिहास की इसी घटना को दोहरा रहे हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने वाली उनकी पार्टी पंजाब लोकहित कांग्रेस पूरी तरह फ्लॉप रही। यहां तक की कैप्टन अपनी सीट भी नहीं बचा पाए। उन्होंने अब अपनी पार्टी को बीजेपी में मर्ज करने का निर्णय लिया है। पंजाब देश के उन गिने चुने राज्यों में है, जहां बीजेपी की मौजूदगी काफी कम है। ऐसे में कैप्टन का ये फैसला उनके और बीजेपी के राजनीतिक भविष्य के लिए कैसा साबित होगा, ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

Monika

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