केंद्र सरकार के भरोसे नॉर्थ ईस्ट, जमीनी तौर पर काम शुरू

Published by seema Published: March 9, 2018 | 4:43 pm
Modified: March 9, 2018 | 5:01 pm

केंद्र सरकार के भरोसे नॉर्थ ईस्ट, जमीनी तौर पर काम शुरू..

नई दिल्ली। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को स्पेशल कैटेगरी में रखा गया है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा को केंद्र से बड़ी मात्रा में फंडिंग की जाती है। ‘इंडिया स्पेंड’ के अनुसार त्रिपुरा, नगालैंड और मणिपुर का उदाहरण लिया जाए तो यहां इनके बजट का 80 फीसदी तक केंद्र सरकार देती है। मतलब यह कि आर्थिक स्वावलंबन के मामले में ये राज्य कहीं नहीं ठहरते।

असल में आजादी के बाद उत्तर-पूर्व के सात राज्य और सिक्किम आर्थिक रूप से रसातल में चलते ही चले गए। नतीजतन इस क्षेत्र में आंतरिक टकराव और उग्रवाद पनपता चला गया। क्षेत्र के आर्थिक विकास की याद बहुत देर में आई। देखा जाए तो 2014 के बाद से ही इस क्षेत्र के लिए जमीनी तौर पर काम शुरू हुआ है।

2018-19 में उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए 47994.88 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। 2017-18 में यह रकम 40971 .69  करोड़, 2016-17 में 33097.02 करोड़ और 2015-16 में 29087.93 करोड़ रुपए थी।
2018-19 के लिए ‘डेवलपमेंट ऑफ नॉर्थ ईस्ट रीजन फंड में 3060 करोड़ रुपए रखे गए हैं।
2016 में केंद्र ने उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए 90:10 फंडिंग व्यवस्था फिर से लागू कर दी है। इसके तहत केंद्र 90 फीसदी ग्रांट और 10 फीसदी लोन देता है।

भारत के उत्तर पूर्व के राज्य देश का 8 फीसदी भूभाग हैं। यहां भारत की जनसंख्या का तीन फीसदी हिस्सा रहता है। असम को छोड़ दें तो सभी उत्तर पूर्वी राज्य केंद्र पर बुरी तरह आश्रित हैं। केंद्र के अधिकांश मंत्रालयों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने सालाना बजट का कम से कम दस फीसदी आवंटन उत्तर-पूर्व पर खर्च करने के लिए रखें। इस आवंटन से जो धन खर्च होने से बच जाता है उसे ऐसे फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है जो लैप्स नहीं होता यानी ये राज्य बजट के सामान्य नियम से परे होता है।

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ईसाइयत का बोलबाला
भारत का उत्तर-पूर्व आज देश में ईसाई जनसंख्या का केंद्र है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में कुल ईसाई आबादी 2.78 करोड़ है जिसमें से 78 लाख उत्तर-पूर्व में रहते हैं। सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज के अनुसार देश के अन्य भागों को छोड़ दें तो उत्तर-पूर्व में ईसाइयत का प्रसार पूरी तरह बीसवीं सदी में ही हुआ है। सबसे ज्यादा प्रसार 1931-51 और 1941-51 के बीच हुआ। आज मिजोरम, मणिपुर और नगालैंड की लगभग पूरी जनजाति आबादी ईसाई है। क्षेत्र में सबसे पहले ईसाइयत का प्रसार मेघालय में हुआ। इसके बाद मिजोरम का नंबर है जहां 1911 में ईसाइयों की संख्या 3 फीसदी से कम थी वहीं 1951 तक ये 90 फीसदी हो चुकी थी।

मणिपुर की बात करें तो यहां आजादी के बाद यह सिलसिला तेज रहा और आज यहां करीब 41 फीसदी आबादी ईसाई है और ये पहाड़ के जिलों में सबसे ज्यादा है। नगालैंड में अनुसूचित जनजातियों की संख्या का 98 फीसदी ईसाई है। अरुणाचल प्रदेश सन 71 तक इस स्थिति से अछूता रहा, लेकिन तबसे हालात बदल चुके हैं और अब 30 फीसदी से ज्यादा ईसाई जनसंख्या है।

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