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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए 'अछूत' अखिलेश की योजनाएं

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seemaBy seema

Published on 13 Oct 2017 8:11 AM GMT

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अछूत अखिलेश की योजनाएं
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पूर्णिमा श्रीवास्तव

गोरखपुर: गोरखपुर यानी अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शहर। दुर्भाग्य है कि शहर की पहचान अधूरी योजनाओं से होने लगी हैं। सपा सरकार ने बसपा सरकार की योजनाओं को रोका तो अब भाजपा सरकार सपा सरकार की योजनाओं को अछूत मान रही है। गोरखपुर में जनता से जुड़ी दर्जन भर योजनाओं पर प्रदेश सरकार ने एक रुपये का भी बजट नहीं जारी किया है। अधर में लटकी योजनाओं को देखकर सवाल उठना लाजमी है कि अखिरकार सिर्फ विरोध की राजनीति में सरकारें आम लोगों के टैक्स से परवान चढऩे वाली योजनाओं को लेकर लापरवाह कैसे हो सकती हैं।

सपा सरकार पर शहर के विकास को पीछे ढकेलने का आरोप लगाने वाले योगी आदित्यनाथ के पिटारे में विकास की कई योजनाएं तो हैं, लेकिन अखिलेश सरकार में शुरू हुई योजनाओं के लिए उनके पास फूटी कौड़ी नहीं है। करोड़ों रुपये खर्च कर अखिलेश सरकार की अधूरी योजनाएं योगी सरकार के लिए अछूत बनी हुईं हैं। इनमें से सभी योजनाएं आम लोगों से जुड़ी हैं। अखिलेश सरकार ने महापौर और पार्षदों की मांग को देखते हुए राप्ती नदी के तट पर अत्याधुनिक अत्येष्टि स्थल के लिए 3.58 करोड़ रुपये मंजूर किये। इस रकम से छह शेड वाले और चार खुले वाले दाह संस्कार के स्थल बनाए जाने हैं।

प्रदेश सरकार ने डेढ़ करोड़ रुपये अवमुक्त किया। डेढ़ करोड़ खर्च करने के बाद 20 फीसदी भी कार्य नहीं हुआ है। अब मौजूदा सरकार ने योजना पर बजट नहीं जारी किया। सरकार ने नगरीय सड़क सुधार योजना से शहर में दो सड़कों का निर्माण शुरू कराया। दोनों सड़कों पर 3 करोड़ खर्च हो गए। शेष बजट नहीं मिलने से सड़क का निर्माण कार्य अधूरा है।

सपा सरकार ने गोरखपुर मंडल में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए व्यापार विकास निधि से नई सड़कों का निर्माण शुरू कराया था। इसके तहत देवरिया को 18 करोड़, गोरखपुर को 12 करोड़, कुशीनगर को 10 करोड़ और महराजगंज को 5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ। स्वीकृत बजट का 20 फीसदी धन विभागों को जारी भी कर दिया गया। टेंडर निकाल कर कार्य तो शुरू हुए,लेकिन बजट जारी नहीं होने से 9 करोड़ रुपये बर्बाद होते दिख रहे हैं। रामगढ़ झील के सुंदरीकरण के लिए भी प्रदेश सरकार ने नया सवेरा योजना के लिए करीब 15 करोड़ रुपये मंजूर किये थे। पहली किस्त की रूप में मिले डेढ़ करोड़ से 110 मीटर क्षेत्र का विकास हुआ। शेष कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।

शुरू हुई आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति

प्रदेश भाजपा के महामंत्री कामेश्वर सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार ने विकास कार्य नहीं रोका है। हकीकत यह है कि सपा सरकार में शुरू हुई योजनाएं भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ी हैं। इन योजनाओं पर रकम आंखें बंद कर नहीं दी जा सकती। चिल्लूपार से बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी का कहना है कि कार्य किसी भी सरकार ने शुरू किया हो वह धन आम लोगों का ही होता है। सरकारों का चरित्र विकास करने का होना चाहिए।

विकास को रोकने वाली सरकार आम लोगों की हितैषी नहीं हो सकती है। सपा हो या भाजपा सरकार, बदले की भावना से हो रहे कार्य के चलते जनता का करोड़ों रुपये बर्बाद हो रहा है। सपा के महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम का कहना है कि अखिलेश सरकार में शुरू हुए कार्यों के लिए बजट जारी नहीं करना सरकार की विकास विरोधी छवि को दिखाता है। जिन योजनाओं को बजट के अभाव में रोका गया है वे सभी आम लोगों से जुड़ी योजनाएं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री पर गोरखपुर के विकास की अनदेखी का आरोप लगाने वालों को अपने गिरेबान में झांकना होगा।

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अखिलेश सरकार ने भी रोकी थी मायावती की योजनाएं

ऐसा नहीं है कि सत्ता बदलने के बाद सिर्फ अखिलेश की योजनाओं पर ग्रहण लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मायावती सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को धन आवंटित नहीं कर अपनी मंशा जता दी थी। बड़हलगंज में पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी के प्रयास से होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास वर्ष 2009 में हुआ था।

करीब 80 करोड़ की योजना में 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अखिलेश सरकार में बजट को रिवाइज कर 100 करोड़ कर दिया गया,लेकिन सरकार ने बजट अवमुक्त नहीं किया। दो वर्ष पहले मेडिकल कॉलेज में ओपीडी भी शुरू करा दी गई, लेकिन वर्तमान में सन्नाटा पसरा हुआ है। मायावती सरकार में रोहिन नदी में चालू हुआ बढय़ा-ठाठर पुल की लागत दोगुने से अधिक हो चुकी हैं। संतकबीर नगर और गोरखपुर के 100 से अधिक गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण पुल का काम बमुश्किल 10 करोड़ के अभाव में अधूरा पड़ा है।

पांच सौ बेड का बालरोग संस्थान

लागत-315 करोड़

खर्च-135 करोड़

बजट और अग्निशमन विभाग की नोटिस के बाद काम बंद

इंसेफेलाइटिस मरीजों के बेहतर इलाज के लिए अखिलेश सरकार ने 275 करोड़ की लागत से 500 बेड के बाल रोग संस्थान का निर्माण कार्य शुरू कराया। 14 मंजिल के प्रस्तावित संस्थान पर 135 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। सपा सरकार ने निर्माण के इस्टीमेट को रिवाइज कर 315 करोड़ कर दिया। चुनाव से ऐन पहले अखिलेश सरकार ने दो मंजिल को पूरा कर इसका लोकार्पण भी कर दिया। दावा किया गया कि बाल रोग संस्थान की ओपीडी को चालू कराया जाएगा। इसके लिए डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति भी कर ली गई, लेकिन सरकार बदलते ही तस्वीर बदल गई।

50 फीसदी पूरी हो चुकी योजना दो पेंच के चलते ठप है। पहला बजट का अभाव और दूसरा अग्निशमन विभाग की आपत्ति। अग्निशमन विभाग का आरोप है कि अस्पताल की बिल्डिंग की हाइट 35 मीटर से अधिक नहीं हो सकती है, मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन बिल्डिंग की प्रस्तावित उंचाई 57 मीटर है। वहीं जीडीए के अधिकारियों की दलील है कि अग्निशमन के पेंच का कोई मतलब नहीं है।

अब 37 मीटर से अधिक उंची बिल्डिंग में स्प्रिंकल लगाना अनिवार्य है, ताकि आग लगने की दशा में यह स्वत: पानी का फौव्वरा फेंकने लगे। खैर मूल ठेकेदार ने काम को 40 छोटी-छोटी एजेंसियों को सौंपा है। लाखों रुपये खर्च कर ठेकेदार भुगतान के लिए दौड़ रहे हैं। जिस प्रोजेक्ट में कुछ महीने पहले तक 1300 से 1400 मजदूर काम करते थे, वहंा उनकी संख्या घटकर 500 तक पहुंच चुकी है।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला

लागत-28 करोड़

खर्च-8 करोड़

बजट के अभाव में काम ठप

अखिलेश सरकार ने आपराधिक मामलों के जल्द खुलासे के लिए पूर्वांचल के पहले फोरेंंसिक लैब का शिलान्यास किया था। ऐतिहासिक पुरानी जेल को ध्वस्त कर निर्माणाधीन प्रयोगशाला की लागत 28 करोड़ रुपये बताई गयी थी। योजना पर 8 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 30 फीसदी कार्य पूरा होने के बाद निर्माण बजट के इंतजार में ठप है।

राजकीय निर्माण निगम ने धन आवंटन के लिए तीन रिमाइंडर शासन को भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। सरकार की मंशा देखते हुए अधिकारियों ने कागजी कार्रवाई करना भी छोड़ दिया है। निर्माण निगम के अधिकारियों का कहना है कि लेटलतीफी से योजना की लागत बढऩी तय है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला बनने से पूर्वांचल के दो दर्जन जिलों को बिसरा, डीएनए, बैलेस्टिक जैसी जांचों के लिए लखनऊ या आगरा की लैब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

फोरलेन का निर्माण

लागत-332 करोड़

खर्च-75 करोड़

बजट के अभाव में काम ठप

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सत्ता संभालने के साथ ही जिला मुख्यालयों को फोरलेन से जोडऩे का ऐलान किया था। इसी क्रम में गोरखपुर से महराजगंज और गोरखपुर से देवरिया होते हुए सलेमपुर तक फोरलेन सड़क निर्माण की घोषणा की गई थी। दोनों फोरलेन का निर्माण भी शुरू तो हुआ, लेकिन जांच की आंच में निर्माण कार्य ठप है। गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन पर गोरखपुर जिले के आने वाले 19 किमी सड़क का निर्माण 181 करोड़ से होना था। सपा सरकार ने इस सड़क पर करीब 40 करोड़ खर्च किया, फिलहाल बजट के अभाव में कार्य ठप है। गोरखपुर से देवरिया फोरलेन के निर्माण पर 280 करोड़ रुपये खर्च होना है।

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गोरखपुर जिले के हिस्से में पडऩे वाली 26 किमी सड़क पर 151 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इस सड़क पर सपा सरकार 35 करोड़ जारी कर चुकी है। दोनों फोरलेन का निर्माण तीन वजहों से ठप है। पहला, फोरलेन का काम देख रही बलिया की छात्रशक्ति फर्म के खिलाफ ब्लैकलिस्टेड की कार्रवाई चल रही है। दूसरा, गोरखपुर से महराजगंज और गोरखपुर से देवरिया सड़क को नेशनल हाई-वे में प्रस्तावित किया गया है। ऐसे में योगी सरकार ने काम रोक दिया है। तीसरा, सरकार ने नया बजट नहीं जारी किया है।

सर्किट हाउस से एयरपोर्ट तक फोरलेन

लागत-110 करोड़

खर्च-8 करोड़

संशोधित प्रस्ताव शासन में लंबित

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोरखपुर शहर के अंदर सर्किट हाउस से लेकर एयरपोर्ट तक फोरलेन सड़क का निर्माण खुद की प्राथमिकता में रखते हुए तेजी से शुरू कराया था। करीब 87 करोड़ के प्रोजेक्ट पर 8 करोड़ जारी भी कर दिया। काम भी तेजी के साथ शुरू हुआ, लेकिन योगी सरकार के सत्ता में आते ही फोरलेन का निर्माण ठप हो गया। फोरलेन निर्माण में बाधक बने बिजली के पोल और हाईटेंशन तारों को हटाने के लिए बिजली विभाग ने 50 करोड़ से अधिक का इस्टीमेट दे दिया।

बिजली विभाग के अधिकारियों के गोलमाल के अंदेशे के बाद पीडब्ल्यूडी और बिजली विभाग ने 110 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन में मंजूरी के लिए भेजा है। आठ करोड़ खर्च के बाद फोरलेन के निर्माण को सरकार की हरी झंडी का इंतजार कर रहा है।

यूनिवर्सिटी में मिनी स्टेडियम का निर्माण

लागत-5 करोड़

खर्च-4 करोड़

बजट के इंतजार में अधूरा है 20 फीसदी कार्य

सपा सरकार में गोरखपुर विश्वविद्यालय में 5 करोड़ की लागत से मिनी स्टेडियम का निर्माण रुपये के अभाव में अधूरा है। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम का दावा है कि प्रोजेक्ट के लिए मिले 4 करोड़ से 80 फीसदी कार्य हो चुका है। एक करोड़ रुपये के अभाव में निर्माण कार्य ठप है। जिम्मेदारों का कहना है कि शेष रकम मिल भी जाए तो एक करोड़ रुपये में शेष काम पूरा होना संभव नहीं है।

कम्हरिया घाट पुल

लागत-172 करोड़

खर्च-50 करोड़

28 फीसदी कार्य ही पूरा

लंबे आंदोलन के बाद अखिलेश सरकार ने कम्हरिया घाट पुल को मंजूरी दी थी। पुल के लिए रकम नाबार्ड ने जारी किया था। पुल के बनने से गोरखपुर और इलाहाबाद के बीच करीब 80 किमी दूरी कम हो जाएगी। 1424.2 मीटर लंबे प्रस्तावित पुल में 46 पिलर का निर्माण होना है। अभी सिर्फ 9 का ही निर्माण हो सका है। करीब 50 करोड़ खर्च कर नागपुर की फर्म ने 28 फीसदी काम पूरा किया, लेकिन वह कार्य को आगे नहीं बढ़ा सकी। सेतु निगम ने फर्म की सुरक्षा राशि को जब्त कर खुद पुल के निर्माण का निर्णय लिया है। मंजूरी के लिए फाइल शासन में लंबित है।

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सीमा शर्मा लगभग ०६ वर्षों से डिजाइनिंग वर्क कर रही हैं। प्रिटिंग प्रेस में २ वर्ष का अनुभव। 'निष्पक्ष प्रतिदिनÓ हिन्दी दैनिक में दो साल पेज मेकिंग का कार्य किया। श्रीटाइम्स में साप्ताहिक मैगजीन में डिजाइन के पद पर दो साल तक कार्य किया। इसके अलावा जॉब वर्क का अनुभव है।

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