एक महीने में खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है कोरोना, दो शीर्ष संस्थानों का आकलन

देश में पिछले तीन दिनों के दौरान कोरोला के मामलों में जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है और दो शीर्ष संस्थानों में अगले एक महीने के दौरान कोरोना के खतरनाक स्तर तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया है। आईआईटी गुवाहाटी और सिंगापुर मेडिकल स्कूल ने डाटा साइंस मॉडल और लॉजिस्टिक तरीके से किए गए विश्लेषण के बाद बताया है कि अगले 30 दिनों में देश में को रोना के डेढ़ लाख से साढ़े पांच लाख तक मामले हो सकते हैं।

अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली। देश में पिछले तीन दिनों के दौरान कोरोला के मामलों में जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है और दो शीर्ष संस्थानों में अगले एक महीने के दौरान कोरोना के खतरनाक स्तर तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया है। आईआईटी गुवाहाटी और सिंगापुर मेडिकल स्कूल ने डाटा साइंस मॉडल और लॉजिस्टिक तरीके से किए गए विश्लेषण के बाद बताया है कि अगले 30 दिनों में देश में को रोना के डेढ़ लाख से साढ़े पांच लाख तक मामले हो सकते हैं। दोनों संस्थानों का कहना है कि डाटा साइंस मॉडल के अनुसार कोरोना मरीजों की संख्या डेढ़ लाख तक हो सकती है जबकि लॉजिस्टिक विश्लेषण के हिसाब से देश में साढ़े पांच लाख तक कोरोना संक्रमित मरीज हो सकते हैं।

तीन अलग-अलग मॉडलों का संयोजन

शोधकर्ताओं का कहना है कि देश के विभिन्न राज्यों में अगले एक महीने के दौरान कोरोना मरीजों की संख्या का आकलन और विश्लेषण करने के लिए वैकल्पिक मॉडल की मदद ली गई है। टीम की तरफ से विकसित डॉटा साइंस मॉडल तीन अलग-अलग मॉडल का संयोजन है। मौजूदा समय में देश में इसी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

एक मॉडल से नहीं मिलेंगे सही नतीजे

आईआईटी गुवाहाटी के सहायक प्रोफेसर पलाश घोष का कहना है कि किसी एक मॉडल पर आधारित रिपोर्ट हमें गुमराह कर सकती है। इसलिए हमने घातांक, लॉजिस्टिक और एसआईएस मॉडल पर विचार किया है। इसके साथ ही खुले स्रोत के आंकड़ों का इस्तेमाल कर रोजाना संक्रमण दर निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न मॉडलों के आधार पर विश्लेषण करने के कारण ही हमारा मानना है कि हमारा आकलन सच्चाई के काफी करीब होगा।

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तीन श्रेणियों में बांटकर किया अध्ययन

कोरोना संक्रमित मरीजों का अनुमान लगाने के लिए राज्यों को तीन श्रेणियों मध्यम, गंभीर और नियंत्रित में बांटा गया है। यह वर्गीकरण ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन के वर्गीकरण से अलग है। दोनों शीर्ष संस्थानों की टीम का गाना लॉजिस्टिक तरीके से भारत में अगले एक महीने के दौरान कोरोना के डेढ़ लाख मामले हो सकते हैं जबकि घातांक तरीके से मामले बढ़कर साढ़े पांच लाख तक पहुंच सकते हैं। प्रोफ़ेसर घोष का कहना है कि किसी एक मॉडल का इस्तेमाल करने के बजाय हमने सभी मॉडलों का संयुक्त रूप से विश्लेषण किया है क्योंकि संक्रमण के आंकड़ों का एक तरह से विश्लेषण सही तस्वीर नहीं पेश कर सकता।

हर राज्य के लिए अलग नजरिया

शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना के संक्रमण को हर राज्य में अलग नजरिए से देखने की जरूरत है। इसलिए राज्य में संक्रमण का पहला मामला, नई संक्रमण दर, उसमें रोज हो रही बढ़ोतरी और विभिन्न सरकारों के एहतियाती कदम सबकुछ को देखा गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर राज्य को अलग तरह से देखने की जरूरत है। उनका कहना है कि इस अध्ययन से राज्य सरकारों को भी मदद मिलेगी और राज्य सरकारें सीमित संसाधनों संसाधनों का सही इस्तेमाल करके कोरोना की रफ्तार को रोकने की दिशा में उचित कदम उठा सकेंगी।

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