दिल्ली की हिंसा के पीछे गहरी साजिश, जांच में सनसनीखेज खुलासा

दिल्ली की पुलिस दंगाइयों के आगे बेबस नजर आई। हालात यहां तक पहुंच गए कि गृह मंत्री अमित शाह को जलती दिल्ली को बचाने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए आपात बैठक बुलानी पड़ी तो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को भी दिल्ली की तंग गलियों में घूमकर शांति की अपील करनी पड़ी।

Published by SK Gautam Published: February 27, 2020 | 7:52 pm
Modified: February 27, 2020 | 8:23 pm

मनीष श्रीवास्तव

लखनऊ: दिल्ली में हुई भयानक हिंसा से लोगों को 36 साल पहले के सिख विरोधी दंगों का वह मंजर याद आ गया जब राजधानी की सडक़ों पर अराजकता का आलम था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के समय भडक़े इस दंगे की टाइमिंग को लेकर भी तमाम सवाल उठ रहे हैं। दंगाइयों की भीड़ के दिलों में नफरत की आग इस हद तक भडक़ी हुई थी कि इसने कई दुकानों-मकानों समेत सैंकड़ों वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। उत्तर पूर्वी इलाके में तीन दिन तक उपद्रवियों ने तांडव मचाया और कई इलाकों में आगजनी, पथराव और लूटपाट की घटनाएं हुईं।

इस दौरान दिल्ली की पुलिस दंगाइयों के आगे बेबस नजर आई। हालात यहां तक पहुंच गए कि गृह मंत्री अमित शाह को जलती दिल्ली को बचाने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए आपात बैठक बुलानी पड़ी तो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को भी दिल्ली की तंग गलियों में घूमकर शांति की अपील करनी पड़ी। लेकिन तब तक ये हिंसा 36 जिंदगियों को लील चुकी थी और करीब 200 से ज्यादा लोग घायल होकर अस्पताल पहुंच चुके थे। फिलहाल अब दिल्ली की स्थिति तनावपूर्ण, लेकिन नियंत्रण में बतायी जा रही है। वैसे माहौल सुधरने के बाद जो कहानी खुलकर सामने आ रही है, उससे पता चलता है कि इसके लिए कई दिनों से सुनियोजित साजिश रची जा रही थी।

साजिशकर्ताओं की तलाश में जुटी पुलिस

दिल्ली पुलिस की प्रारम्भिक जांच भी इसे सुनियोजित साजिश मान रही है। दरअसल, जिन इलाकों में हिंसा व आगजनी की घटनाएं हुईं वहां से पुलिस को ऐसी चीजें मिली हैं जो इस ओर इशारा करती हैं। जहां पथराव की घटनाएं हुईं वहां से पुलिस को भारी मात्रा में पत्थरों से भरे तथा खाली बोरे मिले है। इसके अलावा कई स्थानों पर टूटी बोतलें भी बरामद हुई है जो दंगे के सुनियोजित होने की ओर इशारा करती है। साथ ही यह भी बताती है कि इसके लिए पहले से ही काफी तैयारी की गई थी। पुलिस इसके पीछे के असली सूत्रधारों की तलाश में जुटी हुई है और दिल्ली के शाहीनबाग स्थित पापलुर फ्रंट आफ इंडिया के नौ कार्यालयों पर कड़ी नजर रखे हुए है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस व खुफिया विभाग इस हिंसा के पीछे किसी विदेशी हाथ होने की आशंका की जांच भी कर रही है। वहीं पुलिस का कहना है कि वो इस हिंसा में बाहरी लोगों के शामिल होने के आरोपों की भी जांच कर रही है।

इस तरह फैली नफरत की आग

बीते तीन-चार दिनों में पूर्वी दिल्ली के मौजपुर में सीएए के विरोध प्रदर्शन में दंगाइयों ने गोकुलपुर एसीपी ऑफिस में तैनात कांस्टेबल रतन लाल और एक आईबी अफसर को मार दिया। जबकि स्थानीय डीसीपी और एसीपी भी गंभीर रूप से घायल हुए। दोनों को उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। दिल्ली में फिलहाल तो शांति तो है मगर तनाव का स्तर चरम पर है। कई उपद्रवग्रस्त इलाकों में लोग घर छोडक़र चले गए हैं और परिवहन सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है। हिंसा वाले इलाकों में आवाजाही रोक दी गई है और जाफराबाद, मौजपुर-बाबरपुर, गोकुलपुरी, जौहरी इनक्लेव और शिव विहार मेट्रो स्टेशन बंद हैं। दंगे के दौरान कई दुकानों और वाहनों को आग लगा दी गई।

धारा-144 के बावजूद दंगाइयों का तांडव

धारा-144 लागू होने के बावजूद दंगाई खुलेआम जमकर पथराव और देशविरोधी नारेबाजी कर आजादी की मांग करते रहे। प्रदर्शनकारियों ने कर्दमपुरी में एक पेट्रोल पंप को आग में झोंक दिया, पेट्रोल पंप जलता देख लोगों में अफरातफरी मच गई, लेकिन उपद्रवी वहां से नहीं भागे, वहीं डटे रहे। उपद्रवियों ने इतने वाहनों में आग लगाई कि उनकी सही संख्या अभी तक पुलिस भी नहीं बता सकी है। पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, कर्दमपुरी, भजनपुरा और सीलमपुर दंगे की आग में झुलस गए। सोमवार को दोपहर के समय हालात उस समय ज्यादा खराब हो गए, जब सीएए विरोधियों के खिलाफ सैकड़ों सीएए समर्थक भी सडक़ पर उतर आए। उन्हें देखकर उपद्रवी और भडक़ गए। उपद्रवियों ने घरों व दुकानों के अलावा स्कूलों तक को अपना निशाना बनाया।

दिल्ली पुलिस का लापरवाह रवैया

तीन दिन तक चले इस दंगे में दिल्ली पुलिस पर लापरवाही के आरोप लग रहे है। कहा जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने समय पर जरूरी कदम नहीं उठाए और हालात बेकाबू हो गए। दूसरी ओर दिल्ली की अभिसूचना इकाई का कहना है कि उसने भाजपा नेता कपिल मिश्रा के कथित भडक़ाऊ बयान के बाद ही हिंसा की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस को अलर्ट किया था। अभिसूचना इकाई ने दिल्ली पुलिस को संवेदनशील स्थानों पर ज्यादा फोर्स तैनात करने की सलाह दी थी। इसके साथ ही अभिसूचना इकाई ने पुलिस को वायरलेस रेडियो के जरिए कई मैसेज भेजे थे। पहला मैसेज रविवार दोपहर 1:22 बजे कपिल मिश्रा के भडक़ाऊ ट्वीट करने के कुछ देर बाद भेजा गया था। कपिल मिश्रा ने अपने कथित भडक़ाऊ ट्वीट में दोपहर 3 बजे मौजपुर चौक पर लोगों को नागरिकता कानून के समर्थन में इक_ा होने को कहा था जिसके बाद टकराव की आशंका से दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच और अभिसूचना इकाई ने मौजपुर में जवानों की तैनाती करने और चौकसी बढ़ाने का अलर्ट जारी किया था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का भी कहना है कि यदि भाजपा नेता के ट्वीट के बाद दिल्ली पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की होती तो दिल्ली में हालात इतने न बिगड़ते।

ट्रंप का दौरा व दंगे की टाइमिंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के समय दिल्ली दंगे की मुकम्मल तैयारी की गई थी। गत 24 फरवरी को ट्रंप के भारत पहुंचने के साथ ही दिल्ली में दंगा शुरू हो चुका था। ट्रंप दौरे की शुरुआत में अहमदाबाद से हुई और उसी दिन साजिश रचने वालों ने दिल्ली को आग में झोंक दिया। गत 25 फरवरी को जिस दिन ट्रंप का दिल्ली में व्यस्त कार्यक्रम था, उस दिन दिल्ली में दिन भर दिल दहलाने वाली घटनाएं होती रहीं। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस दंगे की टाइमिंग की भी जांच कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि दंगाइयों का उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे के समय उनके साथ मौजूद अंतरराष्ट्रीय मीडिया के जरिए सीएए विरोध का अंतररराष्ट्रीयकरण करना था। इसके साथ ही दंगाइयों की यह भी मंशा थी कि ट्रंप से सीएए के मद्देनजर भारत के विरोध में कोई बयान दिलवा दिया जाए, जिससे पूरी दुनिया में सीएए के विरोध में एक माहौल बन सके। राष्ट्रपति ट्रंप की प्रेसवार्ता में कुछ विदेशी पत्रकारों ने इसकी पुरजोर कोशिश भी की, लेकिन ट्रंप ने इससे पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह भारत का अंदरूनी मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोगों को पूरी आजादी है।

क्लिंटन के दौरे के समय भी हुई थी बड़ी घटना

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी विदेशी मेहमान के दौरे के समय इस तरह तनाव पैदा किया गया हो। इससे पहले जब अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत दौरे पर आए थे, तब भी इस तरह का प्रयास किया गया था। 20 मार्च, 2000 की रात श्रीनगर से सटे अनंतनाग जिले के छत्तीसिंहपुरा गांव में लोग रेडियो पर क्लिंटन की भारत यात्रा की खबरें सुन रहे थे तभी तकरीबन 40-50 आतंकी गांव में घुस आए और जबरन सिख लोगों को घरों से बाहर निकालना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के कुछ समझने से पहले ही आतंकियों ने ऑटोमेटिक रायफलों से गोलियां दागनी शुरू कर दी और देखते ही देखते 35 लोगों को मार डाला। पूरी दुनिया की निगाह बिल क्लिंटन की भारत यात्रा पर टिकी थी, लेकिन पल भर में इस घटना ने विश्व मीडिया का ध्यान अनंतनाग की ओर खींच लिया। रिपोर्टों के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया जो भारतीय फौज की वर्दी पहनकर आए थे। इस घटना के ठीक एक दिन बाद बिल क्लिंटन भारत दौरे पर पहुंचे थे।

खाने-पीने के सामान की किल्लत

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंसाग्रस्त इलाकों में अभी भी धारा 144 लगी हुई है और पुलिस ने फ्लैग मार्च किया है। दंगों की मार झेल रही उत्तर पूर्वी दिल्ली के लोगों की परेशानी अब आगे और बढ़ती नजर आ रही है। हिंसा से किसी तरह जान बचा रहे लोगों के पास अब खाने के सामान की कमी होती जा रही है। इलाके की अधिकांश दुकानें बंद हैं और जरूरी चीजों के रेट आसमान छू रहे हैं। उत्तर पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में दूध का भाव 200 रुपये लीटर तक पहुंच गया है। आसपास कहीं कुछ मिल नहीं रहा है। ज्यादातर इलाकों में स्थिति खराब है। दुकानें या तो जला दी गई हैं या लूट ली गई हैं। लोगों के घर में रखी सब्जी, आटा, दाल व अन्य खाद्य सामग्री खत्म होने लगी है। ऐसे में लोगों के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा हो गया है।

दंगाग्रस्त इलाकों में दोनों समुदायों के लोग

दरअसल, दिल्ली के जिस उत्तर पूर्वी इलाके में हिंसा हुई, वहां दोनों समुदायों के लोग रहते हैं। सीलमपुर को गोकलपुर से जोडऩे वाली रोड नंबर 66 करीब 4 किलोमीटर लंबी है। यहां आमने-सामने अलग-अलग समुदाय की आबादी रहती है। बीच में 50 से ज्यादा गलियां पड़ती हैं। सोमवार देर रात जब प्रभावित इलाकों में भारी पुलिस बलों की तैनाती की गई तब तक हालात काफी बिगड़ चुके थे और तमाम लोग दंगे की आग में अपनी जान गंवा चुके थे।

दंगाग्रस्त इलाकों में घूमे डोभाल

गृह मंत्री अमित शाह स्वयं दिल्ली के हालात की पूरी जानकारी ले रहे हैं और इस संबंध में कई बैठकें भी कर चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात पर काबू पाने के निर्देश दिए। स्थिति हाथ से निकलती देखकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल को उतारा गया। डोवाल ने दंगाग्रस्त इलाकों का सघन दौरा किया और लोगों को आश्वस्थ किया कि उन्हें घबराने की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी सुरक्षा के लिए फिक्रमंद है। मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप के वापस जाने के तुरंत बाद ही दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश दे दिया गया। इसके बाद स्थिति पर कुछ नियंत्रण किया जा सका। हालांकि तनाव अब भी बरकरार है।

कपिल मिश्रा पर दंगा भडक़ाने का आरोप

विपक्ष के नेता दिल्ली में हिंसा भडक़ाने के मामले में भाजपा नेता कपिल मिश्रा पर आरोप लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कि दंगे से पहले कपिल मिश्रा उत्तर पूर्वी दिल्ली पहुंचे थे और वहां सीएए का विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ भाषणबाजी की थी। मिश्रा का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह दिल्ली पुलिस को अल्टीमेटम देते हुए दिख रहे हैं कि हम ट्रंप के जाने तक तो शांत हैं मगर उसके बाद चुप नहीं बैठेंगे। पुलिस रास्ता खाली करवा दे, नहीं तो हम सभी सडक़ों पर उतरेंगे। फिर खतरनाक अंजाम होगा।

सवालों के घेरे में आप नेता ताहिर हुसैन

दिल्ली दंगे में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की मौत के पीछे आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। ताहिर के घर की छत पर भारी मात्रा में पेट्रोल बम और पत्थर पाया गया है। इसके साथ ही तेजाब भरे पाउच भी मिले हैं। उनके घर की छत पर पेट्रोल भरी कोल्डड्रिंक की बोतलें और गुलेल भी मिली है। इसे लेकर आप नेता ताहिर सबके निशाने पर आ गए हैं। यह भी कहा जा रहा है कि ताहिर की छत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस दंगे की साजिश कई दिनों से रची जा रही थी। ताहिर और उनके समर्थकों पर अंकित की हत्या का आरोप भी लग रहा है। अंकित के भाई ने बताया कि ताहिर हुसैन के समर्थक ड्यूटी से लौट रहे अंकित समेत चार लोगों को ले गए जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई है और एक व्यक्ति की अभी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि आप नेता संजय सिंह और खुद ताहिर ने इन आरोपों से इनकार कर दिया है। संजय सिंह ने ताहिर को निर्दोष बताया है जबकि भाजपा नेता कपिल मिश्रा का आरोप है कि ताहिर को बचाने की कोशिश की जा रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि हिंसा में यदि मेरी पार्टी का भी कोई दोषी मिले तो उस पर बेहिचक कार्रवाई होनी चाहिए।

हिंसा पर सियासी संग्राम

इस बीच दिल्ली की हिंसा पर सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर हिंसा से निबटने में कोताही बरतने का आरोप लगाया है। केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई नहीं की। उन्होंने हालात को खतरनाक और चेतावनी देने वाला बताते हुए दिल्ली के हिंसा प्रभावित इलाकों में सेना की तैनाती करने की मांग की। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। सोनिया गांधी ने कहा कि दिल्ली की मौजूदा हालात चिंताजनक है। दिल्ली के हालात बिगड़ते रहे और मोदी सरकार सोती रही। सरकार दंगे रोकने में पूरी तरह नाकामयाब रही और इसके लिए गृहमंत्री अमित शाह को इस्तीफा दे देना चाहिए।

दूसरी ओर भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि मुख्यमंत्री दंगाग्रस्त क्षेत्रों में जाने की बजाय विधानसभा में इन दंगों में मरने वालों का मजहब बता रहे हैं। सोनिया गांधी भाजपा पर दोषारोपण कर रही हैं। सलमान खुर्शीद और शशि थरूर ने इस तरह के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है। आप विधायक ताहिर हुसैन के घर पर हिंसा में इस्तेमाल किये जाने वालों सामान देखने को मिले। इस पर कांग्रेस चुप क्यों है? जावड़ेकर ने कहा कि 14 दिसंबर को रामलीला मैदान में सोनिया गांधी ने कहा कि ये आर-पार की लड़ाई है, फैसला लेना पड़ेगा। इस पार या उस पार। प्रियंका ने कहा कि लाखों को बंदी बनाया जाएगा। जो नहीं लड़ेगा वो कायर कहलाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि आप डरो मत, कांग्रेस आपके साथ है। ये क्या भडक़ाने वाले बयान नहीं हैं?

केजरीवाल ने किया मुआवजे का एलान

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अस्पताल में घायलों का इलाज मुफ्त में किया जा रहा है। घायलों पर फरिश्ते योजना लागू होगी। उन्होंने मृतकों के परिवार को 10 लाख-10 लाख मुआवजा देने का भी ऐलान किया। नाबालिग की मौत पर परिजनों को 5-5 लाख रुपये दिया जाएगा। मामूली रूप से घायलों को 20-20 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। हिंसा में जिनके रिक्शे को नुकसान हुआ उन्हें 25 हजार, ई रिक्शा के लिए 50 हजार, जिनका घर जला है उन्हें 5 लाख दिया जाएगा। इसके अलावा दुकान जलने पर 5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा। जिनके पशु जल गये, उन्हें पांच हजार प्रति पशु दिया जाएगा। सरकार दंगा पीडि़तों को मुफ्त में खाना पहुंचाएगी।

क्या कहते है लोग

शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी दिल्ली के दंगे को वारिस पठान के बयान और शाहीनबाग में बैठी महिलाओं के धरने का नतीजा बताते हैं। उन्होंने दिल्ली के लोगों से शांति की अपील की।

प्रेम सिंह का कहना है कि दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है, वह गलत हो रहा है। निर्दोष लोगों की जान जा रही है। जो हिंसा कर रहे हैं, सरकार को उन्हें समझाना चाहिए।

मो. शाहिद का कहना है कि वह सीएए के नहीं बल्कि एनआरसी के खिलाफ है और इसका विरोध होना चाहिए, लेकिन इसके विरोध में हिंसा करना जायज नहीं है।

वकार अहमद दिल्ली में हुई हिंसा के लिए पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार मानते है। उनका कहना कि दंगा भी शाह और मोदी ही करवा रहे है। जब तक सरकार सीएए-एनआरसी को वापस नहीं लेती, तब तक प्रदर्शन होते रहना चाहिए। हालांकि उन्हें सीएए और एनआरसी के संबंध में जानकारी नहीं है।

शौकत अली दिल्ली में हुई हिंसा को गलत बताते हुए कहते हैं कि सीएए और एनआरसी गलत कानून है। यह मुसलमानों को देश से निकालने की साजिश है। तीन पीढ़ी के सबूत कहां से लाएंगे। वे कहते हैं कि दिल्ली में हुई हिंसा और लाठीचार्ज दोनों ही गलत है।

गृहिणी नगमा कहती हैं कि दिल्ली में हुई हिंसा गलत है। प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को यह भी ध्यान देना चाहिए कि लम्बे समय से देश की महिलाएं प्रदर्शन कर रही है तो उनसे भी पूछना चाहिए कि क्या तकलीफ है। वे कहती हैं कि यह पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गलती है।

नगमा की बेटी तुराबा कहती हैं कि मोदी जी ने अच्छे दिन का वादा किया था, लेकिन देश का बुरा हाल कर दिया। महंगाई ज्यादा है, गरीब आदमी रोटी को मोहताज है। वे दिल्ली में हुई हिंसा को गलत बताती हैं। साथ ही कहती हैं कि सीएए व एनआरसी की देश में कोई जरूरत नहीं थी। यह केवल कुछ खास लोगों को देश से निकालने के मकसद से लाया गया कानून है।

शैलेन्द्र शुक्ला कहते हैं कि सीएए, एनआरसी व एनपीआर तीनों ही सहीं है। देश को इसकी जरूरत है। दिल्ली में चल रहे आंदोलन और हिंसा को गलत बताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को बरगलाया जा रहा है। सियासी दल अपना-अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं।