नागालैंड : कांग्रेस और भाजपा का नया पांसा, यरूशलम की मुफ्त यात्रा का वादा 

Published by raghvendra Published: February 17, 2018 | 2:00 pm
Modified: February 17, 2018 | 2:02 pm
कोहिमा। चुनाव के मौके पर सभी दल और नेता तरह-तरह के वादे करते हैं और इसी क्रम में नगालेैंड में कांग्रेस और भाजपा ने राज्य की ईसाई जनसंख्या के सामने ऐसा पांसा फेंका है जो अपने आप में अनोखा है। ये वादा है श्रद्धालुओं को यरूशलम की तीर्थयात्रा कराने का।
कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में कहा है कि ‘राज्य सरकार एक बोर्ड का गठन करेगी जो अल्पसंख्यकों को सस्ती दरों पर यरूशलम की तीर्थ यात्रा करवाएगा।’ वहीं भाजपा ने अपने विजन डाक्यूमेंट में कहा है कि राज्य में एक वरिष्ठ नागरिक बोर्ड बनाया जाएगा और हर साल एक लकी ड्रॉ के जरिए 50 लोग यरूशलम की यात्रा पर भेजे जाएंगे।’ यह यात्रा मुफ्त में करायी जाएगी।
नगालैंड की 90 फीसदी जनसंख्या इसाईयों की है। राज्य में कोई ढाई हजार चर्च हैं। लेकिन इनको राजनीतिक दलों की घोषणाओं पर हैरानी है। राज्य में 1600 चर्च चलाने वाली नगालैंड बापटिस्ट चर्च काउंसिल के मुखिया रेवरेंड कीहो के अनुसार ये सब राजनीतिक बकवास है। ये सेक्यूलर बनने का दिखावा है। जबकि असलियत में यह लोगों को कन्फ्यूज करने का बहाना है।

निर्विरोध चुने गए

नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नेफियो रियो को विधानसभा क्षेत्र उत्तरी अंगामी-2 से निर्विरोध चुन लिया गया है। उनके खिलाफ मैदान में उतरे एकमात्र उम्मीदवार नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के चुपफो अंगामी ने नाम वापस लेने के आखिरी दिन अपना नाम वापस ले लिया। इस तरह नेफियो रियो को निर्विरोध चुन लिया गया।
चुपफो ने मैदान से हटने का कारण स्वास्थ्य बताया है लेकिन लोगों के लिए यह अप्रत्याशित है। नेफियो रियो का आरोप है कि सत्ता के लालच ने नगालैंड को बर्बाद कर दिया है। भाजपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन पर उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एनडीपीपी, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और भाजपा के त्रिकोणीय गठबंधन का सुझाव दिया था। निर्विरोध चुने जाने पर खुशी जताते हुए कहा कि वह इसके लिए चुपफो को धन्यवाद करते है। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा-एनडीपीपी का गठबंधन पूर्ण बहुमत के साथ अगली सरकार बनायेगा।

गणित सीटों का

नागालैंड में सीटों के समझौते के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 20 सीटों पर और एनडीपीपी 39 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। रियो की जीत के बाद अब 27 फरवरी को होने वाले नागालैंड के 13वें विधानसभा चुनाव में कुल 195 उम्मीदवार चुनाव मैदान में बचे हैं। इसमें से एनपीएफ के 58, भाजपा के 20, एनपीपी के 25 और एडीपीपी के 39, कांग्रेस के 18, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के 13, लोजपा के 02, राकांपा के 06, आप के 03 और 11 निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में शेष बचे हैं।

क्या नेताओं की बढ़ती संपत्ति बनेगी मुद्दा

नागालैंड में कुछ बड़े नेताओं की बेतहाशा बढ़ती संपत्ति पर जिस तरह की प्रतिक्रिया उभर रही है उससे लग रहा है कि यह भी एक मुद्दा बन सकता है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही चुनावी उम्मीदवारों के संपत्ति का ब्योरा सामने आया है। 2014 में केंद्र में लोकसभा सांसद बनने के बाद वापस तीन बार नगालैंड के मुख्यमंत्री बनने वाले नीईफू रियो की कुल संपत्ति 27.91 करोड़ आंकी गई है।

बताया जा रहा है कि उनकी यह संपत्ति पिछले पांच सालों में नौ करोड़ रुपये सालाना की दर से बढ़ी है। वहीं पूर्व कांग्रेसी और वर्तमान में भाजपा के नेता के एल चिशी की कुल संपत्ति 37 करोड़ रुपए आंकी गई है जो सभी उम्मीदवारो में सबसे ज्यादा संपत्ति के मालिक हैं।

कितनी है रियो की संपत्ति

67 वर्षीय रियो नगालैंड में भाजपा के सबसे विश्वासपात्र नेता बन कर उभरे हैं। उन्होंने अपने शपथपत्र में सांसद के तौर पर अपना वेतन, किराये से आने वाली आय, कृषि और जमा पूंजी से आने वाला ब्याज समेत अपनी कुल संपत्ति की घोषणा की है। रियो की पत्नी की कुल चल-अचल संपत्ति मिलाकर 10.26 करोड़ का ब्यौरा दिखाया गया है। रियो दंपत्ति के पास नागालैंड में दो रिजॉट्र्स भी है।

दो लोग जांच में फंसे

चुनाव से ऐन पहले आतंकी फंडिग के मामले में नगालैंड के सीएम कार्यालय के कर्मचारी फंस गए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दो कर्मचारियों को समन भेजा है। एनआईए की इस कार्रवाई को मोदी सरकार द्वारा जेलियांग सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। जिस मामले में मुख्यमंत्री के दफ़्तर के कर्मचारियों से पूछताछ होनी है वह नगालैंड के 14 सरकार विभागों से कथित तौर पर की गई अवैध वसूली से जुड़ा है।

यह वसूली एनएससीएन (के), एनएससीएन (एम) और नगा नेशनल काउंसिल जैसे उग्रवादी संगठनों ने की थी। माना जा रहा है कि इस काम में उनकी मदद जेलियांग के दफ्तर के कर्मचारियों ने भी की थी। एनआईए की इस कार्रवाई को राजनीतिक पृष्ठभूमि से जोडक़र भी देखा जा रहा है, क्योंकि इन नगा संगठनों ने विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया है। उनकी मांग है कि जब तक केंद्र सरकार नगा शांति समझौते को अंतिम रूप नहीं दे देती, इस पर सभी पक्ष दस्तख़त नहीं कर देते, चुनाव में कोई भाग न ले।
कहा जा रहा है कि इसे जेलियांग सरकार का भी समर्थन है। दिलचस्प बात ये भी है कि टीआर जेलियांग जिस नगालैंड पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के नेता हैं उसका बीते 15 साल से भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन रहा है। लेकिन इस चुनाव में भाजपा का गठबंधन राज्य की एनपीएफ सरकार के पूर्व मुखिया नेफियू रियो से है न कि जेलियांग से।

नागालैंड में पिछली बार भाजपा ने 11 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे  जिनमें से 8 उम्मीदवार जमानत नहीं बचा सके। 2008 में भाजपा द्वारा मैदान में उतारे गए 23 उम्मीदवारों में से 2 ही चुनाव जीत सके जबकि 15 की जमानत जब्त हो गई। 2003 में पार्टी ने 38 उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिनमें से 7 उम्मीदवार जीते और 28 की जमानत जब्त हो गई। 1993 में भाजपा के 6 उम्मीदवार थे, जिनमें से किसी की भी जमानत नहीं बची।

नागालैंड विधानसभा में वर्तमान स्थिति

  • एनपीएफ      –     45
  • बीजेपी         –     ०4
  • जेडीयू          –     ०1
  • एनसीपी       –     ०1
  • निर्दलीय       –     ०8
  • खाली          –     ०1

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