लालू की जेल यात्रा ने बिहार में छेड़ दी जातीय मानसिकता की बहस

चारा घोटाला: चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी मामले में लालू दोषी करार

पटना : राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाला के एक मामले में फिर से जेल जाने के बाद बिहार की राजनीति गरम हो गई है। राजद को लेकर तरह-तरह के कयास भी लगाए जाने लगे हैं।

राजद नेता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को इस मामले में बरी किए जाने को जातीय मानसिकता के प्रमाण के रूप में पेश कर रहे हैं। राजद के नेता शिवानंद तिवारी भी कहते हैं लालू के जेल जाने के बाद पिछड़े और दलित समुदायों का भी उन्हें समर्थन मिलेगा।

किसी भी राजनीति दल के प्रमुख की अनुपस्थिति, खासकर लालू जैसे नेता की अनुपस्थिति पार्टी के लिए नुकासानदेह साबित होती है। यही कारण है कि राजद के लिए यह स्थिति संकटपूर्ण है। अगर यह लड़ाई केवल भाजपा से होती है तो राजद आसानी से निपट भी लेती लेकिन भाजपा के साथ अब नीतीश का भी साथ है, जिन्हें राजनीति में जातीय गणित का ‘मास्टर’ माना जाता है। नीतीश की पकड़ भी कोइरी और कुर्मी जातीय समुदाय पर रही है। ऐसे में राजद के लिए यह लड़ाई आसान नहीं मानी जा रही।

इतना तय माना जा रहा है कि लालू की अनुपस्थिति में और राजनीति में उनकी रिक्तता का लाभ अन्य दल उठाना चाहेंगे। इस मौके पर सभी दल अपने जातीय समीकरण को दुरुस्त कर राजद के वोटबैंक में सेंध लगाने की भी कोशिश करेंगे।

इस बार लालू प्रसाद के लिए मुश्किलें कम नहीं हैं। उनके उत्तराधिकारी की समस्या भले ही न हो लेकिन उनके ही बेटे तेजस्वी और बेटी मीसा भारती भी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हुए हैं। ऐसी परिस्थिति में तेजस्वी और मीसा की कानूनी लड़ाई की प्रगति पर राजद का भविष्य टिका रहेगा।