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गोरखा जनमुक्ति मोर्चा : पर्वतीय क्षेत्र के लोगों का लोकतांत्रिक आंदोलनों पर भरोसा

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NewstrackBy Newstrack

Published on 18 Oct 2017 11:39 AM GMT

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा :  पर्वतीय क्षेत्र के लोगों का लोकतांत्रिक आंदोलनों पर भरोसा
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कोलकाता: दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में पृथक राज्य के लिए आंदोलन में हिंसा पर खेद प्रकट करते हुए गोरखा नेता विनय तमांग ने कहा है कि लोगों को लोकतांत्रिक ढंग से गोरखालैंड के लिए आंदोलन शुरू करना चाहिए। तमांग ने कहा है कि हिंसक आंदोलन द्वारा गोरखालैंड को हासिल नहीं किया जा सकता है। हमें गांधीवादी विचारधारा का पालन करना चाहिए और शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन करना चाहिए। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के निष्कासित नेता ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के लोगों का लोकतांत्रिक आंदोलनों पर भरोसा है।

इससे पूर्व उन्होंने घोषणा की थी कि पर्वतीय क्षेत्र में गोरखालैंड के लिए और बंद नहीं होंगे। पृथक गोरखालैंड राज्य की अपनी मांग को लेकर जीजेएम के अनिश्चितकालीन बंद के आह्वान के बाद दार्जिलिंग में लम्बे समय तक गतिरोध बना रहा था। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अपील के बाद बंद को 27 सितम्बर को 104 दिनों के बाद वापस लिया गया था।

बम विस्फोटों में कथित संलिप्तता के मामले दर्ज किये जाने के बाद से बिमल गुरुंग भूमिगत हैं, जिसके बाद विनय तमांग पर्वतीय क्षेत्र मुख्य नेता के रूप में उभरे हैं। वह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आयोजित सर्वदलीय बैठक के पिछले कई दौर में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। तमांग ने कोलकाता में राज्य के राज्यपाल के एन त्रिपाठी से मुलाकात की थी और उनसे दार्जिलिंग गतिरोध के समाधान के लिए त्रिपक्षीय वार्ता शुरू करने के लिए केंद्र से बात करने का अनुरोध किया था।

तमांग ने कहा, हमने उनसे कहा कि हम दार्जीलिंग मुद्दे पर केंद्र से बात करने के इच्छुक हैं। केंद्र को जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना चाहिए और हमें गोरखालैंड समेत सभी लंबित मुद्दों पर वार्ता के लिए बुलाना चाहिए। तमांग ने दार्जिलिंग को रणनीतिक स्थान बताया क्योंकि यह नेपाल और भूटान की सीमाओं के साथ लगता क्षेत्र है।

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान तमांग के साथ अनीत थापा भी मौजूद रहे। राज्यपाल से मुलाकात के बाद तमांग ने कहा था कि हमने राज्यपाल को दार्जिलिंग की पूरी स्थिति की जानकारी दी है। हम चाहते हैं कि दार्जिलिंग में शांति लौटे। उन्होंने पहाड़ में फिर से आगजनी की घटना की निंदा करते हुए कहा कि इस मामले की प्रशासनिक जांच होनी चाहिए तथा दोषी व्यक्तियों को इसकी सजा मिलनी चाहिए।

गौरतलब है कि इससे पहले तमांग ने कहा था कि सब इंस्पेक्टर की मौत व पुलिस के साथ संघर्ष की घटना की जिम्मेदारी विमल गुरुंग को लेनी चाहिए। तमांग ने कहा कि दार्जिलिंग के लोग काफी शांतिप्रिय हैं। वे लोग दार्जिलिंग को कश्मीर बनने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अब दार्जिलिंग की राजनीति में विमल गुरुंग कोई फैक्टर नहीं है। वह समझ गये हैं कि दार्जिलिंग के आम लोग उनके साथ नहीं हैं। इस कारण वे लोग दार्जिलिंग में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

अर्धसैनिक बलों को वापस बुलाने का आदेश

इस बीच गृह मंत्रालय ने दार्जिलिंग से 300 महिलाओं समेत 1000 अर्धसैनिक बलों को वापस बुलाने का आदेश दिया है। इन्हें पृथक गोरखालैंड राज्य की मांग संबंधी आंदोलन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वहां तैनात किया गया था। मंत्रालय ने एक सूचना में कहा है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की सात कंपनियां और सशस्त्र सीमा बल की तीन कंपनियां दार्जिलिंग से हट जाएंगी। सीआरपीएफ की इन कंपनियों में तीन महिला कंपनियां हैं।

अर्धसैनिक बलों की एक कंपनी में 100 कर्मी होते हैं। अर्धसैनिकों को दार्जिलिंग और कालिमपोंग जिलों में तैनात किया गया था। दार्जिलिंग में पिछले कुछ हफ्तों में स्थिति सुधरी है। अशांत दार्जिलिंग के पटलेबास में जीजेएम के प्रमुख बिमल गुरुंग के गांव में रविवार सुबह भीषण आग लग गई। इससे कई घर क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें से कई मकान गुरुंग के करीबी लोगों के थे। आग के कारण और हताहतों के बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है। खाक हो गए घरों में एक दिनेश ठिंग का है जिन्हें गुरुंग का करीबी माना जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख के घर में आग नहीं लगी लेकिन उसमें तोडफ़ोड़ की गई। पुलिस ने दावा किया कि गुरूंग के समर्थकों ने सबूत मिटाने के लिए घरों में आग लगाई।

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