सरकार का बड़ा कदम, कर्मचारियों की छंटनी रोकने को कंपनियों को देगी राहत

सरकार कंपनियों को राहत देने के लिये कुछ बदलाव कर सकती है। सरकार कार्य के घंटों को बढ़ा सकती है, कर्मचारियों के बोनस को कम कर सकती है।

नई दिल्ली:  पूरा देश इस समय कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है। इस वायरस पर काबू पाने के लिए सरकार द्वारा पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया गाया है। जिसके चलते पिछले एक महीने पूरे देश में बंद का स्थिति बनी हुई है। ऐसे में कई कंपनियों को का घाटा हो रहा है। जिसके चलते वो अपनी कर्मचारियों में छटनी कर सकती है। लेकिन अब केंद्र सरकार इस छटनी को रोकने और कंपनियों के नुक्सान की भरपाई करने के कुछ उपायों पर विचार कर रही है।

सरकार ला सकती बदलाव

सरकार कंपनियों को राहत देने के लिये कुछ बदलाव कर सकती है। सरकार कार्य के घंटों को बढ़ा सकती है, कर्मचारियों के बोनस को कम कर सकती है, ओवर टाइम पेमेंट में भी कटौती कर सकती है। सरकार ऐसे कुछ उपायों को अपना कर कंपनियों को राहत प्रदान करने का विचार बना रही है। जिससे कम्पनियां अपने कर्मचारियों की छटनी न करें और सभी की नौकरी सलामत बनी रहे। क्योंकि अगर कंपनियों को घाटा हो रहा है तो कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर भी इस बंद और लॉकडाउन का गहरा असर पड़ रहा है।

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एक अधिकारी द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि सरकार ये बदलाव नोटिफिकेशन या अमेंडमेंट्स के जरिए किए जा सकते हैं। अधिकारी के अनुसार ये बदलाव कोरोना वायरस के चलते एक साल तक लागू रह सकते हैं। अधिकारी ने कहा, ‘इससे केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं आएगा, लेकिन एंप्लॉयर्स के लिए एंप्लॉयमेंट कॉस्ट घट जाएगी।’

बोनस और इंक्रीमेंट को रोक सकती है

सरकार इन्क्रीमेंट को टाल सकती है या कम कर सकती है। पेमेंट ऑफ बोनस ऐक्ट 1965 अनुसार कुछ जगहों पर कर्मचारियों को कंपनी के प्रॉफिट के आधार पर 8.33 प्रतिशत की दर से सालाना बोनस मिलता है। साथ ही कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर वर्कर्स के मिनिमम वेज का रिवीजन 8-12 प्रतिशत सालाना की दर से होता है। सरकार के अनुसार अगर इसे न दिया जाए एक साल तो इससे एंप्लॉयर्स के पास यह पैसा बचेगा।

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ये बदलाव ऑर्गनाइज्ड सेक्टर की फर्मों पर लागू होंगे, जिनमें देश की 50 करोड़ की वर्कफोर्स का बमुश्किल 10 प्रतिशत हिस्सा काम करता है, लेकिन इससे खासतौर से माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज को काफी बचत हो जाएगी। इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन के प्रेसिडेंट लोहित भाटिया ने कहा, ‘कानूनों में मामूली बदलाव से यह सकारात्मक संकेत जा सकता है कि सरकार को एंप्लॉयर्स की फिक्र है। इससे काफी जॉब्स बचाने में मदद मिल सकती है।’

वर्किंग ऑवर्स बढ़ा कर 12 घंटे हो सकते हैं

इसके अलावा सरकार एक और बड़ा बदलाव कर्मचारियों के वर्किंग आवर्स को लेकर कर सकती है।’ मौजूदा फैक्ट्री ऐक्ट के अनुसार कोई भी संस्थान अपने कर्मचारियों से 8-9 घंटे से ज्यादा काम नहीं ले सकती। इससे ज्यादा काम करने पर कर्मचारी का ओटी यानी कि ओवर टाइम बनता है। जिसके डबल पैसे कंपनी को देने पड़ते हैं। संभव है कि अब सरकार इस नियम में बदलाव कर काम के घंटों को 9 से 12 घंटा तक कर सकती है। और इसका कोपी ओटी भी नहीं मिलेगा।

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यह व्यवस्था मौजूदा वित्त वर्ष के लिए की जा सकती है। सरकार का मनना है कि इससे कंपनी पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और उनका काम भी शीघ्रता से होता रहेगा। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के सौगत रॉय चौधरी ने कहा, ‘सरकार के पास पैसा ही नहीं है तो वह यह कर सकती है कि सभी संबंधित पक्षों को एकसाथ बुलाए और बीच का कोई रास्ता पकड़ने के लिए राजी करे ताकि सभी लोग थोड़ा-थोड़ा वित्तीय बोझ उठाएं।’

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