44 साल पुराना टूटा रिकॉर्ड, इस तरह भीषण बारिश ने मचाई तबाही

भीषण बारिश और बाढ़ की वजह से पूरे देश में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। देश के कई राज्य बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जबकि कई राज्यों में अब भी बारिश का कहर जारी है।

लखनऊ/पटना: भीषण बारिश और बाढ़ की वजह से पूरे देश में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। देश के कई राज्य बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जबकि कई राज्यों में अब भी बारिश का कहर जारी है। अब तो बारिश ने भी काफी विकराल रूप धारण कर लिया है। बिहार में बीते कई दिनों से जारी भीषण बारिश के चलते आम लोगों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। राज्य के 3 जिलों में पिछले 48 घंटों से हो रही बारिश से कम से करीब 28 लोगों की मौत हो गई है।

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राजधानी पटना में के कई इलाकों में 4 से 6 फीट गहरे जलभराव से लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी अपने पटना स्थित आवास में फंस गए थे, जिनको बचाने के लिए एनडीआरएफ को उतरना पड़ा। पीएम मोदी ने सीएम नीतीश से बात की और हर संभव मदद का भरोसा दिया। वहीं उप्र में कई दिनों से हो रही भारी बारिश के बाद कई जिले जलमग्न हो गया।

44 साल बाद ऐसी भीषण बारिश हुई है

बिहार में अधिकारियों का कहना है कि 1975 की बाढ़ के बाद से राज्य की राजधानी में इस तरह के जलभराव नहीं देखा गया है। बिहार सरकार ने वायु सेना के दो हेलीकॉप्टरों से खाद्य पैकेट और दवाइयां वितरित और एयरड्रॉपिंग के लिए कहा है। बारिश की वजह से पटना जिला प्रशासन ने मंगलवार तक सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है।

बारिश से मरने वालों की संख्या 104 हो गयी है

यूपी में बारिश से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या 104 हो गई है। जिसमें सोनभद्र से सोमवार को चार और मौतें हुई हैं जबकि राज्य के पूर्वी जिलों में सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। गंगा नदी गाजीपुर और बलिया में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जहां बाढ़ के पानी के बैरक में घुसने के बाद अधिकारियों को जिला जेल के लगभग 900 कैदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट करना पड़ा।

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साथ ही, प्रशासन की ओर से रेड, ऑरेंज और येलो जैसे तमाम अलर्ट जारी कर दिये गए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में भी बाढ़ की चपेट में आने की वजह से जनता काफी परेशान है।