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अब भारत-चीन के विदेश मंत्रियों की भेंट पर टिकीं निगाहें, निकल सकती है नई राह

चीन के साथ एलएसी पर पिछले कई महीनों से चल रहे सैन्य विवाद के बीच दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की गुरुवार को मास्को में महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 10 Sep 2020 5:15 AM GMT

अब भारत-चीन के विदेश मंत्रियों की भेंट पर टिकीं निगाहें, निकल सकती है नई राह
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अब भारत-चीन के विदेश मंत्रियों की भेंट पर टिकीं निगाहें, निकल सकती है नई राह (file photo)
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नई दिल्ली: चीन के साथ एलएसी पर पिछले कई महीनों से चल रहे सैन्य विवाद के बीच दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की गुरुवार को मास्को में महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम न होने के कारण अब सबकी निगाहें दोनों विदेश मंत्रियों की इस मुलाकात पर टिकी हैं।

माना जा रहा है कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान मास्को में होने वाली इस मुलाकात से हालात सामान्य बनाने की दिशा में कोई नई राह निकल सकती है। एससीओ की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग सी मास्को पहुंच गए हैं।

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सैन्य बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं

दोनों देशों के बीच सैन्य कमांडर स्तर की कई राउंड बातचीत हो चुकी है मगर इस बातचीत के बावजूद दोनों देशों में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। हालांकि तनाव कम न होने का का एक बड़ा कारण चीनी सेना की जिद को माना जा रहा है क्योंकि चीनी सेना बातचीत में तय किए गए सहमति के बिंदुओं का उल्लंघन कर रही है।

कई बार सहमति बनने के बावजूद चीन की ओर से अपने सैनिकों को पीछे नहीं हटाया गया है। उल्टे चीन की सेना नए सैनिकों की तैनाती और निर्माण कार्य में भी जुटी हुई है। इस कारण दोनों देशों के बीच पैदा हुआ सैन्य विवाद सुलझने के बजाय और उलझता ही जा रहा है।

इसलिए महत्वपूर्ण है यह मुलाकात

जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की तरह विदेश मंत्रियों की मुलाकात से भी सैन्य विवाद कम होने के आसार कम ही दिख रहे हैं मगर निगाहें इस बात पर टिकी है कि दोनों देशों के विदेश मंत्री पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात की पृष्ठभूमि तैयार करने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।

china-india china-india (social media)

शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के प्रमुखों की जल्द ही मास्को में बैठक होने वाली है और इस बैठक में मोदी और शी जिनपिंग के हिस्सा लेने की उम्मीद जताई जा रही है। अब ऐसे में हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और विदेश मंत्रियों की मुलाकात की तरह दोनों देशों के प्रमुखों के बीच बैठक हो पाती है या नहीं।

तीन बार आमने-सामने होंगे दोनों विदेश मंत्री

जानकार सूत्रों का कहना है कि मास्को में भारत और चीन के विदेश मंत्री कम से कम तीन बार आमने सामने होंगे। चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक के अलावा भारत, रूस व चीन के विदेश मंत्रियों की सालाना बैठक का भी आयोजन किया गया है।

जानकार सूत्रों का कहना है कि इन दोनों बैठकों के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय वार्ता की उम्मीद है। ऐसे में हर किसी की नजर इस मुलाकात पर टिकी हुई है। हर किसी को इस मुलाकात से निकलने वाले नतीजे का इंतजार है।

रक्षा मंत्रियों की भेंट का असर नहीं

इससे पहले शुक्रवार को दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच भी मुलाकात हुई थी। चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंग से मुलाकात के दौरान भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कर दिया था कि एलएसी पर शांति स्थापित करने के लिए चीन को अपनी सेना हटानी ही होगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि भारत अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस मामले में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की इस मुलाकात के बाद चीन की ओर से भारत पर आरोप लगाने का सिलसिला और तेज हुआ है। इसके साथ ही एलएसी और पैंगोंग झील के इर्द-गिर्द चीनी सेना की गतिविधियां भी बढ़ी हैं।

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बातचीत से होगा फायदा

इसी कारण अब हर किसी की नजर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात पर टिकी है। वैसे जानकार सूत्रों का यह भी कहना है कि हो सकता है कि रक्षा मंत्रियों की बातचीत की तरह ही विदेश मंत्रियों की बातचीत का भी कोई ठोस नतीजा न निकले मगर सैन्य विवाद को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच ज्यादा से ज्यादा बातचीत होनी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि बातचीत से ही शांति का रास्ता निकाला जा सकता है।

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