ठण्ड के मौसम में बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने चीन के खिलाफ उठाया ये बड़ा कदम

हर साल अप्रैल से भारी बर्फ से दोनों रास्ते बंद हो जाते हैं। इतना ही नहीं परिस्थितियों को देखते हुए, भारतीय सेना और पीएलए को अंतर बनाए रखने के साथ-साथ सीमाओं के बिंदुओं पर पोस्ट किया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न घट सके।

Published by Aditya Mishra Published: October 19, 2020 | 10:51 am
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की फोटो(सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर कई बार वार्ताएं भी हुई लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका।

नतीजतन बॉर्डर पर दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ खड़ी हुई। कोई भी देश अपनी सेना को पीछे लेने को बिल्कुल भी तैयार नहीं है। आज जिस तरह के लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल(एलएसी) पर हालात नजर आ रहे हैं। उसे देखते हुए युद्ध की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।

इस बीच खबर अब ये भी आ रही है कि दोनों देशों ने सर्दियों में जवानों की तैनाती की तैयारी शुरू कर दी है। सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाने वाले ठिकानों की तैनाती की जा रही है।

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भारतीय सेना की फोटो(सोशल मीडिया)

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भारतीय इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई ऐसी तैयारी

जवानों को हथियार और अन्य जरूरी समान पहले से ही मुहैया करा दिए गये हैं। जानकारों की मानें तो इस बार भारत ने जैसी तैयारी एलएसी पर की है। वैसी तैयारी भारत के इतिहास में पहले कभी भी नहीं देखी गई।

भारत ने इस बार चीन को सबक सिखाने के लिए मन बना लिया है। मोदी सरकार इस बार कोई भी चूक नहीं बरतना चाहती है। इसलिए उसने सीमा पर सुरक्षा के लिए लडाकू विमान, हेलीकाप्टर से लेकर अन्य जरूरी उपकरणों को सेना के पास पहुंचा दिया है।

ठण्ड से बचने से लेकर खाने पीने के समुचित इंतजाम किये गये हैं। मोदी सरकार ने इस बार ऐसी तैयारी कर रखी है कि अगर चीन के साथ ठण्ड के मौसम में युद्ध की नौबत आती है तो भी हमारी सेना को किसी भी तरह की मुश्किल नहीं आने वाली है।

बातचीत के लिए भी भारत ने खोल रखें हैं रास्ते

इस बीच भारत ने चीन के साथ अपनी बातचीत भी जारी रखी है। अगले हफ्ते दोनों देशों के बीच लद्दाख में चल रही असहमतियों को लेकर आठवें आयोजन की उम्मीद की जा रही है।

दोनों देशों ने ही सेना और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत करने का फैसला लिया है। इस वार्ता को उद्धेश्य रहेगा कि सीमा पर किसी भी तरह का तनाव और न बढ़े।

चीन से खबर ये भी आ रही है कि चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने भारत के सामने ये प्रस्ताव रखा है कि दोनों पक्ष पहले बचे हुए और तोपखाने की इकाइयों को डी-एस्केलेशन के हिस्से के रूप में वापस लेते हैं और फिर पैदल सेना के विघटन के लिए जाते हैं, लेकिन भारतीय पक्ष बहुत स्पष्ट है कि बख़्तरबंद इकाइयों को वापस नहीं लिया जा सकता है।

भारत ने इसके पीछे रक्षा कारणों को भी एक वजह बताया है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह इलाके और क्षमता के कारण विरोधी को एक फायदा दे देगा।

नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर ने बताया कि मुद्दा यह है कि पैंगोंग त्सो के उत्तर और दक्षिण दोनों किनारों के लिए भारतीय सेना का दृष्टिकोण दो बहुत ऊंचे पहाड़ी दर्रों से होकर गुजरता है –17,590 फीट ऊंचा चांग ला और 18,314 फीट ऊंचा मार्सिमिक ला।

उन्होंने बताया कि चंग ला जहां लेह से सड़क के बीच पैंगोंग त्सो के दक्षिणी तट पर मौजूद है, वहीं मार्सिमिक ला झील और कोंग्का ला के उत्तर में है।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की फोटो(सोशल मीडिया)

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हर साल अप्रैल से भारी बर्फ से दोनों रास्ते बंद हो जाते हैं

यदि भारत को पंगोंगत्सो के दक्षिण से चांग ला या मार्सिमिक ला से आगे निकलने के लिए अपनी बख्तरबंद इकाइयाँ वापस लेनी पड़ी, तो वे कभी भी सबसे खराब स्थिति में नहीं पहुंचेंगे क्योंकि हर साल अप्रैल से भारी बर्फ से दोनों रास्ते बंद हो जाते हैं।

इतना ही नहीं परिस्थितियों को देखते हुए, भारतीय सेना और पीएलए को अंतर बनाए रखने के साथ-साथ सीमाओं के बिंदुओं पर पोस्ट किया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न घट सके।

भारतीय चिकित्सा सुविधाएं एलएसी के साथ आ गई हैं, ताकि उच्च दृष्टिकोण की बीमारी के शिकार लोगों को तत्काल उपचार मिल सके और भागलपुर के हुंदर में एक विशेष अस्पताल में हेली-लिफ्ट का इंतजार न करना पड़े।
पीएलए वायु सेना पास के क्षेत्र में सक्रिय वायुसेना के ठिकानों पर अपनी लड़ाकू गश्त जारी रखे हुए है।

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पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की फोटो(सोशल मीडिया)

झील में पानी जमना शुरू

उन्होंने ये भी बताया कि दूसरी ओर पीएलए को एक बेनिफिट ये होगा है उनके पास मार्सिमिक ला और कोंगका ला से सिर्फ 10 किमी दूर छह-लेन काशगर-ल्हासा राजमार्ग है और उनकी सड़कें अपनी पोस्ट के ठीक ऊपर चल रही हैं।

उत्तरी और दक्षिणी तट पर चोटियों पर अभी तक कोई बर्फबारी नहीं हुई है, लेकिन झील में पानी जमने लगा है और हवा की गति बहुत बढ़ गई है। पीएलए ने इस साल अप्रैल-मई में गैलवान घाटी, गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर हमला शुरू किया।

यहां ये भी बता दें कि भारतीय सेना अगस्त के लास्ट वीक में रेजांग ला -रिचिन ला रिडेलीन पर कब्जा करने के लिए पैंगोंग त्सो के दक्षिण में अपनी चाल को पूर्व-खाली करने में सक्षम थी। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि पीएलए पूरी तरह से कब्जे वाले अक्साई चिन के साथ-साथ चेंग्दू और काशगर तक की गहराई वाले स्थानों पर तैनात है।

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