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INS Vikrant: आईएनएस विक्रांत से भारत को मिली है जबर्दस्त समुद्री ताकत, जानिए इसके बारे में सब कुछ

INS Vikrant: आईएनएस विक्रांत 'ब्लू वाटर नेवी' के रूप में देश की स्थिति को मजबूत करेगा।

Neel Mani Lal
Written By Neel Mani Lal
Published on: 2 Sep 2022 6:04 AM GMT
INS Vikrant
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INS Vikrant (photo: social media )

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INS Vikrant: भारत के पहले स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित विमान वाहक आईएनएस विक्रांत का कमीशन भारतीय नौसेना के इतिहास में एक निर्णायक क्षण है। इसी नाम वाले देश के प्रिय पहले विमानवाहक पोत के उत्तराधिकारी के आगमन के साथ भारत, दुनिया की महान नौसेना शक्तियों के चुनिंदा क्लब में शामिल हो गया है।

नौसेना ने कहा है कि "विक्रांत" में लगभग 76 फीसदी स्वदेशी सामग्री है, और जहाज की लागत का लगभग 80 से 85 फीसदी भारतीय अर्थव्यवस्था में वापस आ गया है। इसमें करीब 2,000 कर्मियों को नौकरी मिली है, और अन्य 13,000 को परोक्ष रूप से नियोजित किया गया है

आईएनएस विक्रांत 'ब्लू वाटर नेवी' के रूप में देश की स्थिति को मजबूत करेगा। ब्लू वाटर नेवी का मतलब है, वैश्विक पहुंच और गहरे समुद्र में काम करने की क्षमता वाली एक समुद्री शक्ति। इसके साथ भारत, विमान वाहक डिजाइन और निर्माण करने में सक्षम अमेरिका, रूस, फ्रांस, यूके और चीन जैसे देशों के इलीट ग्रुप में शामिल हो गया है। पूरी तरह से लोड होने पर 43,000 टन के विस्थापन के साथ, आईएनएस विक्रांत दुनिया में वाहक या वाहक वर्गों में सातवां सबसे बड़ा होना पोत है।

गौरवशाली इतिहास

पताका संख्या आर-11 के साथ, आईएनएस विक्रांत भारतीय नौसेना द्वारा संचालित पहला विमानवाहक पोत था।इस जहाज को द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद एचएमएस (हर मेजेस्टीज़ शिप) हरक्यूलिस के रूप में रॉयल नेवी के लिए बनाया जा रहा था। उस समय के कई अन्य जहाजों की तरह, निर्माणाधीन एचएमएस हरक्यूलिस को यूनाइटेड किंगडम द्वारा बिक्री के लिए रखा गया था, और 1957 में भारत द्वारा खरीदा गया था।

1961 में इसका निर्माण कार्य पूरा हो गया और उसे भारतीय नौसेना में आईएनएस विक्रांत के रूप में कमीशन किया गया था।

नए आईएनएस विक्रांत की तुलना में, पुराने का विस्थापन आधे से भी कम था और वर्तमान के 260 मीटर के मुकाबले इसकी लंबाई 210 मीटर से अधिक थी। आर-11 ने 1971 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूर्वी पाकिस्तान की नौसेना की नाकाबंदी का नेतृत्व किया।

उस जहाज को 36 साल की सेवा के बाद 1997 में सेवामुक्त किया गया था। अगले 15 वर्षों में, इसे अंततः नष्ट करने के लिए बेचे जाने से पहले एक संग्रहालय जहाज के रूप में संरक्षित किया गया था।

भारतीय नौसेना ने कहा है कि - "विक्रांत को शामिल करना और उनका पुनर्जन्म न केवल हमारी रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है, बल्कि राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए स्वतंत्रता सेनानियों तथा 1971 के युद्ध के दौरान हमारे बहादुर सैनिकों के बलिदानों को भी हमारी विनम्र श्रद्धांजलि है।" जब पूरी तरह से चालू हो जाएगा तो ये शक्तिशाली विमानवाहक पोत न केवल एक मजबूत निवारक होगा बल्कि नीले पानी पर तैरते हुए एयरबेस के रूप में भी कार्य करेगा और महासागरों के बीच में भारत का एक संप्रभु क्षेत्र होगा।

स्वदेशी डिजाइन और निर्माण

पुराने आईएनएस विक्रांत के सेवानिवृत्त होने के बाद, भारत की निर्भरता आईएनएस विराट पर हो गई। ये जहाज उस समय "एचएमएस हर्मीस" के रूप में रॉयल नेवी के साथ अपने 25 साल के कार्यकाल के बाद 10 वर्षों से अधिक समय से भारतीय नौसेना की सेवा कर रहा था।

इस बीच, स्वदेशी विमान वाहक आईएसी-1 के डिजाइन और निर्माण को जनवरी 2003 में मंजूरी दी गई और जहाज निर्माण मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र की जहाज निर्माण इकाई कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) को जहाज बनाने का काम सौंपा गया। सीएसएल के लिए यह पहली युद्धपोत निर्माण परियोजना थी।

खास बातें

- आईएनएस विक्रांत 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है, जो इसके फ्लाइट डेक को फुटबॉल के दो मैदानों से बड़ा बनाता है।

- विमानवाहक पोत पूरी तरह से लोड होने पर लगभग 4,3000 टन पानी विस्थापित करता है।

- इसकी अधिकतम स्पीड 28 नॉट (समुद्री मील) है।

- 18 मंजिल ऊंचे जहाज में करीब 2,400 कंपार्टमेंट हैं, जिन्हें 1,600 सदस्यीय चालक दल के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें महिला अधिकारियों और नाविकों को समायोजित करने के लिए विशेष केबिन भी हैं।

- एविएशन हैंगर दो ओलंपिक आकार के पूल जितना बड़ा है जिसमें लगभग 20 विमान बैठ सकते हैं।

- इसमें एक अच्छी तरह से सुसज्जित रसोईघर है जो विविध मेनू पेश कर सकता है। इसकी एक यूनिट प्रति घंटे 3,000 रोटियां बनाती है।

- इसके मेडिकल कॉम्प्लेक्स में मॉड्यूलर इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर, फिजियोथेरेपी क्लिनिक, इंटेंसिव केयर यूनिट, पैथोलॉजी सेट अप, सीटी स्कैनर के साथ रेडियोलॉजी विंग और एक्स-रे मशीन, एक डेंटल कॉम्प्लेक्स, आइसोलेशन वार्ड और टेलीमेडिसिन सुविधाओं के साथ 16 बेड का अस्पताल है।

- अपने पूरी तरह से परिचालन मोड में, वाहक के पास 30 विमान शामिल होंगे जिसमें मिग -29 लड़ाकू जेट और एयरबोर्न प्रारंभिक चेतावनी नियंत्रण हेलीकॉप्टर कामोव -31 हेलीकॉप्टर, घरेलू उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) और हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) (नौसेना) के अलावा अन्य हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

- इस जहाज को 20 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है।

- आईएनएस विक्रांत का उड़ान परीक्षण नवंबर तक शुरू होने वाला है और इस जहाज के 2023 के मध्य तक पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है।

Monika

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