जया जेटली का खुलासाः नीतीश कुमार भाजपा में शामिल होने को सोच रहे थे

भारतीय राजनीति में जया का नाम ताबूत घोटाले के सिलसिले में आता है, हालाँकि इस घोटाले में जया जेटली की संलिप्तता साबित नहीं हो पाई। पर जया जेटली को इसकी बड़ी राजनीतिक क़ीमत चुकानी पड़ी। उनको पार्टी के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा।

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जया जेटली का खुलासा (फोटोः सोशल मीडिया)

योगेश मिश्र

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाजपा से रिश्तों को लेकर आगा पीछा सोचने वालों के लिए यह शायद चौंकाने वाली बात होगी कि 1996 में नीतीश कुमार भाजपा में शामिल होने को सोच रहे थे। यह बात जया जेटली ने अपनी आत्मकथा में उद्घाटित की है।

नीतीश के कारण रास नहीं जा पाई

अपनी किताब में उन्होंने यह भी कहा है कि नीतीश की वजह से जया राज्यसभा नहीं जा पाईं। हालाँकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है पर अपने पुरूष सहयोगियों को बिच्छू कहा है। नेहरू ख़ानदान के प्रति विरक्ति व भाजपा से उनका अनुराग भी किताब में उद्घाटित हुआ है। उन्होंने अपनी आत्मकथा का नाम ‘लाइफ़ अमंग द स्कॉरपियंस’ रखा है।

यह नाम रखने के पीछे की दिलचस्प कहानी कुछ यूँ बयां हुई है। बिच्छू के डीएनए में है कि वह डंक मारता, काटता है। मलेशिया में एक महिला छोटे से शीशे के कमरे में करीब 2700 ज़हरीले बिच्छुओं के साथ 30 दिनों तक रही।

जब वह कमरे से बाहर निकली तो उसे 7 डंक लगे थे। उसे ‘स्कॉरपियन क्वीन’ का ख़िताब दिया गया। वह कहती हैं, “मैंने जब यह कहानी पढ़ी तो मुझे लगा कि मेरी स्थिति शीशे के कमरे में रह रही उसी महिला की तरह है। रही है। इसलिए यही नाम रखना उचित लगा।

जार्ज से रिश्ते

नेहरू ख़ानदान के प्रति उनकी विरक्ति की वजह जवाहर लाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित के शाहख़र्चे का खामियाजा उनके अधिकारी पिता को भुगतना रहा। जया जेटली ने किताब में एकाधिक जगह इस बारे में सफ़ाई दी है कि समाजवादी नेता जार्ज फ़र्नान्डिस के साथ उनके रिश्ते सहज स्वाभाविक थे। ग़लत कुछ नहीं था ।

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वह लिखती हैं, “जिन्होंने हम दोनों को जोड़ा। इसमें रोमांस का पुट बिल्कुल नहीं था।”लेकिन उन ने यह साफ़ नहीं किया कि पति अशोक जेटली से उनके तलाक़ कि वजह क्या थी ?

1942 में शिमला में जन्मीं जया जेटली की पढ़ाई दिल्ली के मिरांडा हाउस और अमरीका के स्मिथ कालेज में हुई। उन दिनों वहाँ कमलेश शर्मा, उनके भावी पति अशोक जेटली, मणिशंकर अय्यर और राजीव गाँधी भी पढ़ रहे थे।

उन्होंने कुछ दिनों तक लंदन के एयर इंडिया के दफ़्तर में काम भी किया। उनके मुताबिक़ इसकी वजह उनके पास भारत लौटने के लिए पैसे का नहीं होना था। एयर इंडिया अपने कर्मचारियों को भारत आने के लिए फ़्री टिकट दिया करती थी।

अशोक से मुलाकात

अशोक जेटली से जया की मुलाक़ात मिरांडा हाउस में पढ़ाई के दौर में ही हो गयी थी। अशोक दिल्ली के सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज में पढ़ते थे। अशोक से उनकी मुलाक़ात कालेज के दौरान लेसबियनिज्म थीम पर आधारित एक नाटक के दौरान हुई। पुरूष पात्र का रोल अशोक कर रहे थे। हालाँकि अभिभावकों के दबाव में मंचन रद करना पड़ा।

राजीव गांधी को भी तभी से वह जानती हैं,यह उनकी किताब बताती है। किताब में राजीव गांधी से सोनिया की दोस्ती बढ़ाने की कोशिश का भी ज़िक्र है। बाद में जया के पति अशोक जेटली आईएएस होकर कश्मीर चले गये। राजीव जहाज़ उड़ाने लगे।

जया जेटली ने गुजरात इंपोरियम, जिसे ‘गुर्जरी’ कहा जाता है,में काम शुरू किया। उन दिनों स्मिता पाटिल, शबाना आज़मी, रत्ना पाठक, तेजी बच्चन, नीना गुप्ता और यहाँ तक कि सोनिया गाँधी गुर्जरी से ही कपड़े खरीदा करती थीं। पुपुल जयकर एक तरह की तीन साड़ियाँ बनवाती थीं, एक तेजी बच्चन के लिए, दूसरी इंदिरा गाँधी के लिए और तीसरी खुद अपने लिए।

जार्ज से पहली मुलाकात

1977 में फ़र्नांडीस उद्योग मंत्री थे, तब जया के पति उनके सहायक थे। जया व जार्ज की पहली मुलाक़ात तब की ही है। दोनों एक दूसरे के दांपत्य जीवन के उतार चढ़ाव के बारे में 1884 आते आते सब जानने लगे थे। जया के हिसाब से जार्ज का मानवतावादी होना उन्हें बहुत आकर्षित करता था।

जार्ज फ़र्नांडीस का ज़िक्र करते हुए वह लिखती है-“ जॉर्ज एक विद्रोही राजनेता थे। उन्होंने कभी कंघे का प्रयोग नहीं किया। कपड़े वह खुद धुलते थे। कोंकड़ की मछली और क्रैब करी उन्हें बहुत पसंद थी। परंपराओं को मानने में उनका यकीन नहीं था। हैरी पॉटर से लेकर महात्मा गाँधी, विंस्टन चर्चिल की जीवनी उन्होंने पढ़ रखी थी। उन्हें पढ़ने का बहुत शौक था। “

जया ने लिखा है कि “लालू यादव ने एक बार अपने भाषण में कहा कि जॉर्ज धोबी के यहाँ अपने कपड़े धुलवाने के बाद उसे मिट्टी में सान कर निचोड़ कर फिर पहन लेते हैं।” राजीव शुक्ला के रूबरू प्रोग्राम के लिए लुंगी पहन कर अपने गंदे कपड़े धोने के लिए जार्ज तैयार हो गये।

हारा हुआ बुजुर्ग

उन्होंने लिखा है वह फ़ायर ब्रांड जार्ज नहीं बल्कि उम्र, परिवार और समय से हारा हुआ एक बुजुर्ग नेता है, जिसे भाजपा के साथ खड़े होने में हर्ज नहीं है। जिसे चेले तक धोखा देते हैं ।”

जया को राज्य सभा में लाये जाने की जार्ज फ़र्नाडिस की कोशिशों को किस तरह उनके साथियों ने पलीता लगाया है। इसे भी याद किया गया है। इसी कारण उन्होंने राजनीति में अपने पुरुष सहयोगियों को भी बिच्छू कहा, जो उन्हें डंक मारते हैं । नीतीश कुमार का भी ज़िक्र है। दावा किया गया है कि 1996 में नीतीश भाजपा में शामिल होने के बारे में सोच रहे थे।

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राजधानी दिल्ली में दिल्ली हाट शुरू कराने का श्रेय जया जेटली को जाता है। इसके लिए वह सुप्रीम कोर्ट तक गई । रोज़गार कमाने का अधिकार माँगा। प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह से मिलीं। छह साल लगे।

भारतीय राजनीति में जया का नाम ताबूत घोटाले के सिलसिले में आता है, हालाँकि इस घोटाले में जया जेटली की संलिप्तता साबित नहीं हो पाई। पर जया जेटली को इसकी बड़ी राजनीतिक क़ीमत चुकानी पड़ी। उनको पार्टी के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा।

जॉर्ज फ़र्नान्डीस को भी रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा। अपनी किताब में उन्होंने यह दुख ज़ाहिर किया है कि मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दुख यही है कि मुझे पैसा लेकर देश को बेच देने वाले व्यक्ति की तरह दुनिया के सामने पेश किया गया।

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