कावेरी विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु का हिस्सा घटाया, कर्नाटक को फायदा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच काफी दिनों से चल रहे कावेरी नदी के जल बंटवारे पर शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि नदी पर कोई राज्य दावा नहीं कर सकता है।

कोर्ट ने तमिलनाडु के हिस्से का पानी घटाकर 177.25 टीएमसी कर दिया है। इससे कर्नाटक को 14.75 टीएमसी पानी का फायदा मिला है। फैसले से कर्नाटक को फायदा हुआ है जबकि केरल और पांडिचेरी के जल आवंटन में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि कावेरी के जल में कर्नाटक का हिस्सा इस तथ्य को देखकर बढ़ाया जा रहा है कि बीते दिनों में बेंगलुरु में पीने के पानी की मांग बढ़ी है। साथ ही इंडस्ट्रियल इलाकों में भी पानी की खपत में इजाफा देखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुशी जताई है। दूसरी ओर तमिलनाडु ने इसका वैकल्पिक रास्ता ढूंढने की बात कही है।

फैसले के बाद हिंसा की आशंका को देखते हुए कर्नाटक और तमिलनाडु में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। पानी की मात्रा घटाने पर प्रतिक्रिया देते हुए एआईडीएमके के नेता वी.मैत्रेययन ने कहा यह फैसला तमिलनाडु के लोगों के साथ गंभीर अन्याय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कर्नाटक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करेगी और तमिलनाडु को आवश्यक पानी जारी करेगी।

कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल ने साल 2007 के फरवरी महीने में कावेरी ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी थी। कर्नाटक चाहता है कि तमिलनाडु के लिए नदी के जल का आवंटन कम किया जाए तो वहीं तमिलनाडु भी कर्नाटक के लिए ऐसा ही चाहता है।

साल 2007 में ट्रिब्यूनल के फैसले में तय हुआ था कि तमिलनाडु को 419 टीएमसी पानी, तमिलनाडु को 270 टीएमसी, केरल को 30 टीएमसी और पुडुचेरी को 7 टीएमसी पानी दिया जाए। इस पर सभी राज्यों का कहना था कि उन्हें जरुरत के हिसाब से कम पानी मिलता है। इस मामले में तमिलनाडु की पैरवी कर रहे वकील एन.कृष्णा ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं मगर पानी की मात्रा राज्य के लिए पर्याप्त नहीं है।

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