कासगंज: 350 से ज्यादा पुलिसकर्मी और बग्घी में सवार होकर आया दलित दूल्हा

Published by Aditya Mishra Published: July 16, 2018 | 10:58 am
Modified: July 16, 2018 | 3:55 pm

आगरा: कासगंज में सामाजिक आन-बान-शान के नाम पर चली आ रही कुप्रथा उस वक्त टूट गई जब एक दलित की बारात राजपूतों (ठाकुरों) के गांव से गुजरी। दलित परिवार की खुशी को दबंगों की नजर न लगे इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये थे। दूल्हा संजय जाटव अपनी दूल्हन शीतल को लेने कासगंज के निजामपुर गांव पहुंचा। तब लोगों के चेहरों पर खुशी के साथ एक डर भी था।  डर को खत्म करने के लिए आंसू गैस, बंदूक और दंगा नियंत्रण के लिए जरूरी सामान से लैस करीब 350 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

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ये है पूरा मामला

जनवरी 2018 में निजामपुर गांव की शीतल की शादी सिकंदराराऊ के गांव बसई के रहने वाले अनुसूचित जाति के युवक संजय जाटव (27) के साथ तय हुई थी।

इस शादी को लेकर गांव में भारी विवाद और तनाव के हालात पैदा हो गए। वजह यह थी कि संजय चाहते थे कि वह घोड़ी पर बैठकर पूरे गांव में बारात घुमाए। वहीं, ठाकुर समाज के लोग इस बात का विरोध कर रहे थे।

ठाकुरों का कहना था कि यह गांव की परंपरा नहीं है और बेवजह जिद पकड़ कर परंपरा तोड़ गांव में बारात घुमाने की बात की जा रही है।

बता दे कि आगरा के कासगंज में करीब  80 साल से सामाजिक आन-बान-शान के नाम पर ये  कुप्रथा चली आ रही थी। गांव में दलितों का घोड़े पर बैठकर दूल्हा बनकर बरात निकलने पर रोक थी।

ठाकुर समाज इसे अपनी शान के खिलाफ समझते थे। पहले भी कुछ दलित परिवारों ने दुल्हे को घोड़ा पर बिठाकर बारात निकलने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें रोक दिया गया था।

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300 से अधिक जवान तैनात

इस बहुचर्चित विवाह को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। बारात चढ़ाने के लिए रूट तैयार किया। बारात गुजरने वाली रोड या घरों की छतों पर पुलिस और पीएसी तैनात की गई थी। इनके साथ ही छह अलग-अलग पुलिस स्टेशन के 350 से अधिक जवान भी देख-रेख कर रहे थे। एडीएम, एएसपी सहित तमाम अधिकारी शादी पूरी होने तक मौजूद रहे। प्रशासन पहले ही 37 लोगों के खिलाफ पाबंदी की कार्रवाई कर उनसे मुचलका भरवा चुका था। पाबंद हुए लोग शादी के दिन गांव से चले गए थे।

गांव में उत्सव का माहौल 
रविवार को छावनी बने गांव में उत्सव का माहौल था। ढोलक की थाप पर मंगल गीत गाए जा रहे थे। गांव के बाहर स्वागत द्वार बनाया गया। यहां दलित समाज के लोगों ने हाथरस से आई बारात का जोरदार तरीके से स्वागत किया। इसके बाद बैंड-बाजों के साथ बारात की चढ़ाई शुरू हुई। घोड़ाबग्घी पर सवार दूल्हा संजय बारात के साथ चल रहा था। उसके आगे बैंड-बाजों की धुनों पर बाराती नाचते हुए चल रहे थे। पूरे प्रदेश के दलित समुदाय को कई महीनों से जिस विवाह का इंतजार था।