भारत की ‘दाढ़ी वाली फौज’: थर-थर कांपते हैं दुश्मन, ऐसे करते हैं आतंकियों का खात्मा

भारतीय सेना दुनिया की सबसे खतरनाक सेनाओं में गिनी जाती है। गणतंत्र दिवस के मौके पर आज हम आपको सेना के एक ऐसी टुकड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके नाम से दुश्मन देश थर-थर कांपते हैं।

नई दिल्ली: भारतीय सेना दुनिया की सबसे खतरनाक सेनाओं में गिनी जाती है। गणतंत्र दिवस के मौके पर आज हम आपको सेना के एक ऐसी टुकड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके नाम से दुश्मन देश थर-थर कांपते हैं।

दरअसल, जैसे भारतीय थल सेना में कई रेजिमेंट हैं, ठीक वैसे ही भारतीय नौसेना में मार्कोस कंमाडो हैं जो अकेले दुश्मन के दांत खट्टे कर देते हैं। मार्कोस चाहे आतंकवाद से जंग लड़नी हो या फिर समुंदर की गहराई में कोई ऑपरेशन को अंजाम देना हो, यह अपनी दमदार प्रदर्शन से दुश्मन के मंसूबों को नाकाम कर देते हैं।

क्यों कहा जाता है ‘दाढ़ी वाली फौज’

आधिकारिक तौर पर मरीन कमांडो फोर्स (MCF) कहा जाता है, MARCOS को फरवरी 1987 में इंडियन मरीन स्पेशल फोर्स (IMSF) के रूप में उठाया गया था। MARCOS सभी प्रकार के वातावरण में संचालित करने में सक्षम हैं।

MARCOS नियमित रूप से जम्मू और कश्मीर में झेलम नदी और वुलर झील, एक 65 वर्ग किलोमीटर मीठे पानी की झील के माध्यम से विशेष समुद्री संचालन करता है, और क्षेत्र में आतंकवाद रोधी अभियानों का संचालन करता है। MARCOS को कश्मीर में उग्रवादियों द्वारा उनके दाढ़ी वेषभूषा के कारण ‘दाढ़ी वाली फौज’ (दाढ़ी वाली सेना) कहा जाता है। मार्कोस कमांडो बनने से पहले जवानों को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है।

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इन्हें 26/11 मुंबई हमले के ऑपरेशन में बुलाया गया था और इस दौरान यह सामने आए थे। इनकी यूनिफॉर्म के साथ भी खास तरह से डिजाइन की जाती है। इनकी कठोर ट्रेनिंग 2.5 से 3 साल तक चलती है। ज्यादातर 20 साल की उम्र वाले लोगों में हजारों में से कोई एक को इसके लिए चुना जाता है।

कैसी होती है ट्रेनिंग

इनकी कठिन ट्रेनिंग का हिस्सा होता है ‘डेथ क्रॉल’ जिसमें जवान को जांघों तक भरी हुई कीचड़ में भागना होता है। इतना ही नहीं उनके कंधे पर 25 किलोग्राम का बैग भी होता है। इसके बाद 2.5 किलोमीटर का ऑबस्टेकल कोर्स होता है।

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मार्कोस नौसेना के स्पेशल मरीन कमांडोज हैं और किसी भी स्‍पेशल ऑपरेशन के लिए इन्हें बुलाया जाता है। ये समुद्री ऑपरेशंस में इतने माहिर होते हैं कि पानी के अंदर ही तैरते हुए विरोधी तटों तक पहुंच सकते हैं।

इनके परिवारवाले भी नहीं जानते कि ये कमांडो हैं

ये कमांडो हमेशा सार्वजनिक होने से बचते हैं। नौसेना के सीनियर अफसर का यह भी कहना है कि इनके परिवारवाले भी इस बात को नहीं जानते कि ये कमांडो हैं। इनके पास जो हथियार होते हैं वो दुनिया के सबसे बेहतर हथियारों में से होते हैं।

ये कमांड़ो को जमीन से 11 किलोमीटर ऊंचाई से कूदना होता है और पैराशूट जमीन के पास आकर खोलना होता है। जंप में 8 किलोमीटर की ऊंचाई से कूदना होता है और कूदने के बाद 10 से 15 सेकंड के अंदर ही पैराशूट को खोलना होता है। ये जंप 40 डिग्री के जमा देने वाले तापमान पर होती है।