राज्यसभा चुनाव : आप के ‘विश्वास’ हो गए बागी, केजरी बाबू भी खिला सकते हैं गुल !

नई दिल्ली : दिल्ली में तीन राज्यसभा सीटों को हथियाने के लिए आम आदमी पार्टी के बीच गंभीर खटपट शुरू हो गई है। अभी ये तीनों सीटें कांग्रेस के पास हैं, तथा अगले साल के तीसरे सप्ताह में ये सीटें खाली हो रही हैं। दिल्ली में चूंकि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी को भरी बहुमत है। ऐसी सूरत में तय है कि सभी तीनों राज्यसभा सीटें आप की झोली में ही जाएंगी। कौन-कौन आप नेता राज्यसभा भेजे जाएंगे इसका फैसला एक ही अरविंद केजरीवाल को करना है।

अब तक जो प्रबल दावेदार खुलकर सामने आ गए हैं। उनमें प्रमुख हैं आप के प्रमुख चेहरे कुमार विश्वास। उन्हें कुछ ही समय पूर्व राजस्थान में आप का प्रभारी बनाया गया है। वे इस वक्त आप के राजनीतिक मामलों की कमेटी के सदस्य हैं।आप में केजरीवाल, मनीष सिसौदिया के बाद अहम नेताओं में गिने जाते हैं। दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों से जो कांग्रेस सदस्य जनवरी के आखिर में रिटायर हो रहे हैं। उनमें जनार्दन द्विवेदी, डॉ कर्ण सिंह व परवेज हाशमी शामिल हैं।
कुमार विश्वास को इस तरह का अभास मिल रहा है कि केजरीवाल उन्हें राज्यसभा में भेजने के वायदे से कन्नी काट सकते हैं। हालांकि विश्वास का कहना है कि उन्हें खुद केजरीवाल ने वायदा कर रखा है कि उन्हें राज्यसभा में भेजा जाएगा।

कुमार विश्वास एकदम बगावत की ठान चुके हैं। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि इस बार उन्हें राज्यसभा में नहीं भेजा जाएगा तो उनके पास आप छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। विश्वास का कहना है कि राज्यसभा भेजने के लिए उन्हें केजरीवाल ने खुद ही वायदा किया था।

दिल्ली में आप की राज्यसभा सीटों में से एक पर तो खुद अरविंद केजरीवाल नजर गड़ाए हुए हैं। जबकि बाकी दो सीटों के लिए आशुतोष और संजय सिंह प्रबल दावेदार हैं। हालांकि आप के भीतर चर्चा तो यह भी चर्चा है कि एक और युवा चेहरे और कोषाध्यक्ष राघव चड्ढा भी राज्यसभा के लिए जुगाड़ में हैं। इस बात की चर्चा तेज है कि केजरीवाल क्या मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्सभा में आने की फिराक में हैं, तथा दिल्ली को पूरी तरह उपमुख्यमंत्री सिसौदिया को सौंपना चाहते हैं।

भाजपा जिसके पास दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में मात्र चार सीटें हैं। आम आदमी पार्टी की इस अंदरूनी खींचतान में खूब दिलचस्पी ले रही है। उसे लगता है कि कुमार विश्वास अगर बाहर निकले तो भाजपा के करीब आ सकते हैं। उनके भाजपा के कई नेताओं से करीबी संबंध कई बार चर्चा का विषय रहे हैं। अगर विश्वास आप से बाहर आते हैं तो ऐसी सूरत में वे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के बाद तीसरे बड़े नेता होंगे। जिन्हें आप छोड़ने को मबजूर होना पड़ेगा।