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Rahul Gandhi: राहुल गांधी के मुद्दे पर सियासी घमासान तेज, सत्ता पक्ष और विपक्ष ने खोला एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा
Om Birla vs Rahul Gandhi: भाजपा की ओर से राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है तो दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने पलटवार करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने का मौका न देना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
Rahul Gandhi (Photo: social media )
Om Birla vs Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संबंध में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा स्पीकर ने बुधवार को राहुल गांधी को सख्त हिदायत दी थी। उन्होंने कांग्रेस नेता को सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए नियमों के अनुरूप आचरण करने की नसीहत दी थी।
इसके बाद राहुल गांधी की ओर से आरोप लगाया गया था कि उनके खिलाफ की गई टिप्पणी निराधार है। नेता विपक्ष को बोलते नहीं दिया जा रहा है और लोकसभा अलोकतांत्रिक तरीके से चलाई जा रही है। अब इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। भाजपा की ओर से राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है तो दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने पलटवार करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने का मौका न देना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
देश को गुमराह कर रहे हैं राहुल गांधी
भाजपा के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशान साधते हुए कहा कि वे देश को गुमराह करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सदन में कोई किसी को बोलने से नहीं रोक सकता। सच्चाई तो यह है कि वे खुद सदन में नहीं बैठते। वे सदन में पेश किए गए किसी भी विधेयक और प्रस्ताव पर नहीं बोलते। संसदीय प्रणाली में उनकी कोई रुचि नहीं है।
यदि कांग्रेस के अन्य सदस्य सदन में अपनी बात रख सकते हैं तो राहुल गांधी क्यों नहीं बोल सकते? उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को देश को गुमराह करने की आदत छोड़ देनी चाहिए।
विपक्ष को न बोलने देना लोकतंत्र के लिए खतरनाक
दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) के नेता और सांसद संजय राउत ने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं। यदि लोकसभा के स्पीकर ऐसे नेता को संसद के भीतर बोलने की अनुमति नहीं देते हैं तो यह लोकतंत्र के लिए काफी खतरनाक समय है। उन्होंने सवाल किया कि यदि स्पीकर को विपक्ष को चुप करना है तो फिर वे लोकसभा क्यों चला रहे हैं?
उन्होंने कहा कि स्पीकर को यह बात समझनी होगी कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। विपक्ष लोकतंत्र की आवाज है और यदि आप उस आवाज को ही बंद कर देंगे तो एक दिन आप संसद को भी बंद कर सकते हैं।
ओम बिरला की इस हिदायत पर पैदा हुआ विवाद
दरअसल बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला राहुल गांधी को सदन की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी थी। उनका कहना था कि नेता प्रतिपक्ष को नियमों के अनुरूप आचरण करना चाहिए। सदन की उच्च मर्यादा और गरिमा को बनाए रखते हुए अपना आचरण करना चाहिए।
लोकसभा स्पीकर ने कहा कि उनके संज्ञान में कई ऐसे मामले आए हैं जहां सदस्यों का आचरण उच्च मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष से यह अपेक्षा की जाती है कि वे नियम 349 के अनुसार सदन में आचरण करें। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी।
सदन में विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं
बाद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता। उनका कहना था कि मैं जब भी सदन में अपनी बात रखने के लिए खड़ा होता हूं तो मुझे बोलने की अनुमति नहीं मिलती। उनका कहना था कि मैं नहीं जानता कि सदन को किस प्रकार चलाया जा रहा है।
राहुल का कहना था कि मैं तो चुपचाप बैठा था और मैंने कुछ भी नहीं बोला। सदन में विपक्ष को बोलते ही कहां दिया जाता है। उन्होंने सदन को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों के लिए जगह होती है मगर यहां विपक्ष के लिए कोई जगह ही नहीं है।