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अंबेडकर का आखिरी दिन: हुआ था ऐसा, देर रात बैठक, पत्नी से नाराजगी और...

डॉ. भीम राव अंबेडकर की तबियत कुछ ठीक नहीं थी। एक दिन पहले मुंबई से आये डॉक्टर ने उनका हेल्थ चेक अप भी किया था। पत्नी से कुछ नाराज भी चल रहे थे।

Shivani

ShivaniBy Shivani

Published on 6 Dec 2020 7:20 AM GMT

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लखनऊ: भारतीय संविधान के जनक कहे जाने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर की याद में आज यानी 6 दिसंबर को देश 'बाबा साहब अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस' के तौर पर मना रहा है। आज के दिन साल 1956 में बाबा साहेब का निधन हुआ था। आज वो वहीँ दिन है, जिसकी रात तो उन्होने जी ली लेकिन सुबह नहीं देखी। ऐसा सोये कि फिर उठे ही नहीं।

'बाबा साहब अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस'

दरअसल, डॉ. भीम राव अंबेडकर की तबियत कुछ ठीक नहीं थी। एक दिन पहले मुंबई से आये डॉक्टर ने उनका हेल्थ चेक अप भी किया था। पत्नी से किसी बात पर कुछ नाराज भी चल रहे थे। बताया जाता है कि उनके जीवन के आखिरी दिन जब पत्नी सविता अंबेडरक और मुंबई से आये डॉक्टर मालवंकर से उनकी मुलाक़ात हुई, तो वे ठीक थे।

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बाबा साहेब का आखिरी दिन बीता था ऐसा

दोपहर में बाबा साहेब की पत्नी और डा. मालवंकर किसी काम से बाजार चले गए। अंबेडकर घर पर ही मौजूद थे। शाम को उनके सहायक नानक चंद रत्तू घर लौटे। रत्तू 16 सालों से अंबेडकर के साथ थे और हर सुबह कार्यालय जाने से पहले बाबा साहेब से इजाजत लेते थे। रत्तू ऑफिस से आये तो बाबा साहेब की पत्नी तब तक बाजार से नहीं लौटीं थीं, इसपर अम्बेडकर ने रत्तू के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की और उन्हें कुछ टाइपिंग का काम दिया।

अंबेडकर का आखिरी दिन: हुआ था ऐसा, देर रात बैठक, पत्नी से नाराजगी और...

डॉक्टर ने एक दिन पहले किया था हेल्थ चेकअप

पत्नी को इतना देर से आता देख अम्बेडकर को गुस्सा आ गया और उन्होंने श्रीमती को काफी डांटा। रत्तू भी इस दौरान वहां मौजूद थे तो उन्होंने बाबा साहेब को शांत कराया। थोड़ी देर में वह शांत भी हो गए। उसी रात बाबा साहेब के घर जैन मतावलंबियों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने आया था। हालंकि बाबा साहेब मिलने की स्थिति में नहीं लग रहे थे इसलिए उन्होंने बैठक को अगले दिन के लिए टाल देने का सोचा लेकिन प्रतिनिधिमण्डल आ चुका था तो उन्हें वापस लौटना बाबा साहेब को ठीक न लगा।

पत्नी से थे नाराज, जैन प्रतिनिधिमंडल संग मीटिंग

वे बाथरूम गए और रत्तू उन्हें काँधें का सहारा देते हुए वापस ड्राइंगरूम में लेकर लौटे तो बाबा साहेब की हालत कुछ ठीक नहीं लग रही थी। वे आँख बंद कर सोफे पर निढाल हो गए। जैन नेताओं ने भी उन्हें ऐसी हालत में देखा, हालंकि बाबा साहेब ने उनसे कुछ देर बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल उन्हें एक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करने पहुंचा था, जिसे बाबा साहेब ने स्वीकार कर लिया।

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सहायक रत्तू हर पल थे साथ, दे रहे थे सहारा

इस बैठक के दौरान ही डॉक्टर मालवंकर ने उनका चेकअप किया। जिसके बाद डॉक्टर मुम्बई के लिए रवाना हो गए। जैन प्रतिनिधिमंडल भी वापस लौट गया। इसके बाद रत्तू ने उनके पैर दबाए। डॉ. अंबेडकर के सिर पर तेल की मालिक की। बाबा साहेब कुछ बेहतर महसूस करने लगे और गाना गाने लगे। उनके दाएं हाथ की अंगुलियां सोफे पर थिरक रही थीं।

अंबेडकर का आखिरी दिन: हुआ था ऐसा, देर रात बैठक, पत्नी से नाराजगी और...

रात में सोये पर नहीं हुआ सवेरा

उन्हें रात का खाना खाया और वापस अपने बैडरूम में चले गए। रूम में रखी किताब द बुद्धा एंड हिज धम्मा की भूमिका पर उन्हें कुछ देर काम किया और फिर किताब पर ही हाथ रखकर सो गए। सुबह उनकी पत्नी ने कुशन पर पैर रखे सोते हुए देखा। उठाने के लिए गयी तो महसूस किया कि उनकी सांस तो चल ही नहीं रही थीं। उन्हें कुछ समझ नहीं आया और उन्होंने नानक चंद रत्तू को बुलवाने के लिए कार भेजी।

लेकिन, बाबा साहेब जा चुके थे, हमेशा के लिए...

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