मिसाइल विध्वसंक INS रंजीत नौसेना से हुआ रिटायर

आईएनएस रंजीत को 15 सितंबर, 1983 को नौसेना में शामिल किया गया था। वह पूर्ववर्ती सोवियत संघ द्वारा निर्मित काशिन श्रेणी के पांच विध्वंसकों में तीसरा है।

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विशाखापट्टनम: भारतीय नौसेना का अग्रणी मिसाइल विध्वसंक ‘आईएनएस रंजीत’ 36 साल तक सेवा देने के बाद सोमवार को सेवामुक्त हो गया।

आईएनएस रंजीत को 15 सितंबर, 1983 को नौसेना में शामिल किया गया था। वह पूर्ववर्ती सोवियत संघ द्वारा निर्मित काशिन श्रेणी के पांच विध्वंसकों में तीसरा है।

इस जहाज को यहां नौसेना गोदी में एक औपचारिक समारोह में विदाई दी गयी। इस मौके पर उस पर से राष्ट्रीय ध्वज, नौसेना प्रतीक और नौसेना में शामिल करने से संबंधित निशान उतारे गये।

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इस कार्यक्रम में अंडमान निकोबार के उपराज्यपाल एडमिरल (सेवानिवृत) देवेंद्र कुमार जोशी मुख्य अतिथि थे जो इस जहाज को नौसना में शामिल करने के दल का भी हिस्सा रहे थे।

एक विज्ञप्ति के अनुसार नौसेना का हिस्सा बनने के बाद आईएनएस रंजीत ने 2190 दिनों तक 7,43,000 समुद्री मील की यात्रा की जो दुनिया का 35 चक्कर लगाने जितना है। यह दूरी धरती एवं चंद्रमा की दूरी का करीब साढ़े तीन गुणा है।

 

(भाषा)

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