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Modi Government 8 Years: आर्टिकल 370 खत्म करने की दिखाई हिम्मत, ऐतिहासिक फैसले से विरोधी पस्त

BJP Government Event: PM के रूप में नरेंद्र मोदी की आठ साल की पारी के दौरान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद- 370 की समाप्ति को ऐतिहासिक फैसला माना जाता है। इसे खत्म करने का साहस दिखा पीएम मोदी ने दिल जीत लिया।

Anshuman Tiwari
Updated on: 2022-05-30T13:27:42+05:30
modi government 8 years dare to end of article 370
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प्रतीकात्मक चित्र 

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Modi Government 8 Years : प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की आठ साल की पारी (Modi Government 8 Years) के दौरान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद- 370 की समाप्ति को ऐतिहासिक फैसला माना जाता है। भाजपा (BJP) की ओर से लंबे समय से अनुच्छेद- 370 को (Article 370) समाप्त किए जाने के दावे तो जरूर किए जाते रहे मगर इसे खत्म करने का साहस दिखाकर पीएम मोदी (PM Modi) ने देशवासियों के एक बड़े वर्ग का दिल जीत लिया।

अनुच्छेद- 370 (Article 370) को समाप्त किए जाने पर संसद की मंजूरी के साथ ही जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित राज्य (Jammu and Kashmir Union Territory) बन गया, जबकि लद्दाख (Ladakh) को अलग प्रदेश का दर्जा दिया गया। जम्मू-कश्मीर के पास अपनी विधानसभा होगी मगर लद्दाख के पास नहीं। जम्मू-कश्मीर में परिसीमन (Delimitation in Jammu and Kashmir) का काम पूरा होने के बाद अब जल्द विधानसभा चुनाव की अटकलें लगाई जा रही हैं।

आसान नहीं था फैसला

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने का फैसला आसान नहीं था मगर, प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बड़ी हिम्मत दिखाते हुए भाजपा के इस वादे को पूरा करने में कामयाबी हासिल की। 5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में इस संबंध में पेश किए गए संकल्प पर विपक्षी दलों ने तीखी आपत्ति जताई थी मगर भाजपा पूरी एकजुटता के साथ इसे संसद की मंजूरी दिलाने में सफल रही।

विपक्षी सांसदों ने किया था भारी हंगामा

विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध के बीच इस संकल्प को पेश करते हुए गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने कहा था, कि अनुच्छेद- 370 (Article 370) हमेशा से ही अस्थायी रहा है। पहले की सरकारों ने राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और वोटबैंक की राजनीति के चलते अनुच्छेद 370 को समाप्त नहीं किया। शाह ने कहा कि न तो हमारे अंदर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है और न तो हम वोट बैंक की राजनीति करते हैं और इसीलिए हम अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का संकल्प पेश करने की हिम्मत दिखा सके हैं।

गृह मंत्री ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा था कि अनुच्छेद 370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर का देश के साथ कभी एकीकरण नहीं हो सका। विपक्षी की ओर से अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के कदम का भारी विरोध किया गया था। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक के सदस्य आसन के समक्ष आकर बैठ गए। दूसरी ओर, पीडीपी के सदस्यों ने पहले अपने कपड़े और उसके बाद विधेयक व संविधान की प्रतियां तक फाड़ डाली। इसके बाद सभापति एम वेंकैया नायडू ने कड़ा रुख अपनाते हुए मार्शलों को इन सदस्यों को सदन से बाहर करने का निर्देश दिया था।

दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा फैसला

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) की समाप्ति को पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल का अब तक का सबसे बड़ा फैसला माना जाता रहा है। बाद में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने यह फैसला अचानक नहीं लिया। बल्कि, काफी सोच समझकर इसे समाप्त किया है। उनका कहना था कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद- 370 को समाप्त करने के साथ ही घाटी के विकास के लिए सरकार ने मजबूत कार्ययोजना तैयार कर रखी है। इस बड़े फैसले के बाद घाटी में विकास की योजना को अमली जामा पहनाने में पूरी मदद मिलेगी। उन्होंने इस फैसले से घाटी के लोगों को जबर्दस्त फायदा होने का भी दावा किया।

पाकिस्तान को पीएम मोदी का कड़ा संदेश

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के बाद पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों की ओर से जताई गई। आपत्ति पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने कड़ा संदेश दिया था। प्रधानमंत्री मोदी का कहना था कि, हमारे पड़ोसी देश और दुनिया के अन्य देशों को यह बात समझ लेनी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसके संबंध में कोई भी फैसला लेना भारत का आंतरिक मामला है। इस पर दूसरे देशों को टीका टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को सख्त लहजे में संदेश दिया था। उनका कहना था कि पाकिस्तान हमेशा कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों में आतंक फैलाने की कोशिशें करता रहा है मगर उसे यह बात समझ लेनी चाहिए कि उसकी साजिशें अब सफल होने वाली नहीं हैं।

घाटी में आतंकी घटनाओं में आई कमी

मोदी सरकार का दावा है कि घाटी में अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के बाद आतंकी घटनाओं में गिरावट आई है। 2021 में घुसपैठ की घटनाओं में 33 फीसदी की कमी दर्ज की गई। संघर्षविराम तोड़ने के मामलों में 90 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। सरकार का कहना है कि आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में भी कमी आई है और इसमें 61 प्रतिशत की कमी देखी गई है।

सरकार की ओर से संसद में यह जानकारी भी दी गई कि आतंकियों की ओर से अपहरण के मामलों में भी 80 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद घटने के साथ ही निवेश का माहौल भी बना है। राज्य के औद्योगिक विकास के रास्ते में बाधाएं खड़ी करनी वाले नियमों में भी बदलाव किया गया है। इसके साथ ही उद्योगों को बढ़ावा देने वाली केंद्र सरकार की योजनाओं को भी जम्मू-कश्मीर में लागू किया गया है।

कठिन काम आसानी से पूरा कर दिखाया

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करना हमेशा से काफी कठिन माना जाता रहा था। कई राजनीतिक दलों के नेता तो पहले यह दावा किया करते थे कि भाजपा चाहे जितनी ताकत लगा ले मगर वह जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को कभी नहीं हटा पाएगी मगर प्रधानमंत्री मोदी ने 5 अगस्त 2019 को बड़ा कदम उठाते हुए इस मुश्किल माने जाने वाले काम को काफी आसानी से पूरा कर दिखाया। सियासी जानकारों का मानना है कि यह फैसला मोदी की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत है। इसे पीएम के रूप में मोदी की दूसरी पारी का सबसे बड़ा फैसला माना जाता है। यदि मोदी के आठ साल के शासनकाल को देखा जाए तो उन्होंने इस फैसले के जरिए देशवासियों के बड़े वर्ग का दिल जीतने में कामयाबी हासिल की।

aman

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