ट्रेनों के पटरी पर लौटने का अभी कितना और इंतजार, लोग हो रहे परेशान

भारतीय रेलवे की खानपान व्यवस्था, पर्यटन और ऑनलाइन टिकट संबंधी गतिविधियों का कार्यभार संभालने वाली आईआरसीटीसी विशेष रेलगाड़ियों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ई-खानपान सेवाओं को फिर से शुरू करने जा रहा है।

Published by Roshni Khan Published: January 26, 2021 | 3:18 pm
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(PC: social media)

श्रीधर अग्निहोत्री 

लखनऊ: कोरोना का असर कम होने के बाद धीरे-धीरे जिन्दगी सामान्य होने की तरफ है पर अब तक ट्रेनों को संचालन को लेकर कोई नीति सामने नहीं आ पाई है। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने और लॉकडाउन की वजह से भारतीय रेलवे की सेवाएं लंबे समय तक प्रभावित है। लॉकडाउन के बाद कई ट्रेनें तो पटरी पर दोबारा नजर आईं, लेकिन रेलवे ने 100 प्रतिशत रेल चलाने का फैसला अब तक नहीं लिया है। संभावना इस बात की है कि सभी ट्रेनों को वापस ट्रैक पर लौटने में 2 महीने और लग सकते हैं।

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इस समय केवल 65 प्रतिशत ट्रेनों का ही संचालन किया जा रहा है। रेलवे दिल्ली-एनसीआर में लोकल रेल सेवा को फिर से शुरू करने की तैयारी में भी है। इधर भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) अगले महीने से अपनी ई-खानपान सेवाओं को फिर से शुरू करना चाहता है।

ई-खानपान सेवाओं को फिर से शुरू करने जा रहा है

भारतीय रेलवे की खानपान व्यवस्था, पर्यटन और ऑनलाइन टिकट संबंधी गतिविधियों का कार्यभार संभालने वाली आईआरसीटीसी विशेष रेलगाड़ियों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ई-खानपान सेवाओं को फिर से शुरू करने जा रहा है। इसकी शुरूआत में लगभग 250 रेलगाड़ियों के लिए लगभग 30 रेलवे स्टेशनों पर सेवाएं शुरू की जाएंगी। पर सवाल यह है कि उन 150 ट्रेनों का क्या होगा जो प्राइवेट चलनी थी।

जुलाई 2020 में भारतीय रेलवे ने 109 रूटों पर ट्रेन चलाने के लिए निजी कंपनियों से ‘रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन’ यानी आरएफक्यू आमंत्रित किया था। जिसमें रेलगाड़ियां अप्रैल 2023 में शुरू किए जाने का प्रस्ताव है। लेकिन अब सवाल इस बात का है कि पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस का हश्र देख कर अब दूसरी प्राइवेट कंपनियाँ ट्रेन चलाने के लिए कितना आगे आएंगी। पिछले साल अक्टूबर में बेहद तामझाम से शुरू हुई देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस का संचालन बंद हो गया है।

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रोजाना 13 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ रहा था

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कि तेजस चलाने के एवज में रेलवे को रोजाना 13 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ रहा था । यह ट्रेन पहली बार पिछले साल 4 अक्टूबर को पहली बार लखनऊ से यात्रियों के साथ चली थी। लखनऊ-नई दिल्ली के बीच चल रही तेजस का संचालन आईटीआरसी के जिम्मे था। कोरोना काल में 23 नवंबर के बाद 20 से 30 यात्री ही रोजाना सीटों की बुकिंग करा रहे थे।

सफर के साथ कई और भी सौगातें दी जाती थीं

कोरोना महामारी के बाद लॉकडाउन की वजह से तेजस एक्सप्रेस का परिचालन पिछले साल 19 मार्च यानी करीब सात महीने से बंद था। इसके बाद गत वर्ष नवरात्र के पहले दिन ही तेजस ट्रेन को फिर से चलाया गया। लेकिन यात्रियों की संख्या लगातार कम होने के कारण आईआरसीटीसी ने रेलवे बोर्ड को गत 23 नवंबर से ट्रेन को निरस्त करने के लिए पत्र लिखा था। दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस में यात्रियों को बेहतर सफर के साथ कई और भी सौगातें दी जाती थीं। प्रत्येक यात्री को 25 लाख रुपये का यात्रा बीमा मुफ्त में दिया जाता था।

लखनऊ से नई दिल्ली का एसी चेयरकार का शुरुआती किराया 1125 रुपये रखा गया था। जबकि शताब्दी एक्सप्रेस का चेयरकार का किराया 1180 रुपये था। तेजस स्पेशल का एक्जक्यूटिव क्लास का लखनऊ से नई दिल्ली का किराया 2310 रुपये था। इस ट्रेन के यात्रियों को एयरलाइंस जैसी बेहतरी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस अक्टूबर 2019 में शुरू की थी

लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस अक्टूबर 2019 में शुरू की थी। इस ट्रेन की खास बात यह थी कि यात्रियों का सामान उनके घर से ट्रेन में उनकी सीट तक लाने की सुविधा दी जा रही थी। इसके लिए अलग से शुल्क चुकाने के साथ ही भारतीय रेलवे ने अपनी कुछ ट्रेनों को निजी कंपनियों को सौंपने की योजना के तौर पर आईआरसीटीसी को पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस ट्रेन का जिम्मा सौंपा था। इस ट्रेन की खासियत ये थी कि आईआरसीटीसी की दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस के यात्रियों को मुफ्त में 25 लाख रुपये का रेल यात्रा बीमा दिया जा रहा था। इस ट्रेन के यात्रियों को लखनऊ जंक्शन स्टेशन पर रिटायरिंग रूम और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक्जिक्यूटिव लाउंज का उपयोग करने की भी सुविधा दी जा रही थी।

देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस लखनऊ से दिल्ली के बीच चल रही थी

देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस लखनऊ से दिल्ली के बीच चल रही थी। इस बीच वाराणसी से इंदौर के बीच महाकाल एक्सप्रेस का संचालन आईआरसीटीसी को दे दिया गया। अब सवाल इस बात का है कि केन्द्र सरकार की निजी कम्पनियों को ट्रेनों के संचालन की भावी योजना का अब क्या होगा। तेजस एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के बाद भारतीय रेलवे (प्दकपंद त्ंपसूंले) 100 और नए रूट्स पर प्राइवेट ट्रेन चलाने की योजना में है। इसको लेकर रेल मंत्रालय ने पूरा प्लान बना लिया है। भारतीय रेलवे ने 150 प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए 100 रेल मार्ग का चयन किया है। लेकिन तेजस एक्सप्रेस ने इस पूरी योजना पर सवाल खडे कर दिए हैं।

कोरोना के कारण जब देश में लॉकडाउन लगाया गया

कोरोना के कारण जब देश में लॉकडाउन लगाया गया। उसके पहले जनवरी में देष के कई रूटों पर प्राइवेट ट्रेन चलाने की योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है जिसमें मुंबई-कोलकाता, मुंबई-चेन्नई, मुंबई-गुवाहाटी, नई दिल्ली-मुंबई, तिरूअनंतपुरम-गुवाहाटी, नई दिल्ली-कोलकाता, नई दिल्ली-बेंगलुरु, नई दिल्ली-चेन्नई, कोलकाता-चेन्नई और चेन्नई-जोधपुर के अलावा न्य रेल मार्ग में मुंबई-वाराणसी, मुंबई-पुणे, मुंबई-लखनऊ, मुंबई-नागपुर, नागपुर-पुणे, सिकंदराबाद-विशाखापट्टनम, पटना-बेंगलुरु, पुणे-पटना, चेन्नई-कोयंबटूर, चेन्नई-सिकंदराबाद, सूरत-वाराणसी और भुवनेश्वर-कोलकाता शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही रेलवे नई दिल्ली से पटना, इलाहाबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, कटरा, गोरखपुर, छपरा और भागलपुर रेल रूट पर भी निजी ट्रेन चलाने की योजना बना चुका है।

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भारतीय रेलवे के इन 100 रूट में से 35 नई दिल्ली से कनेक्ट होंगे। जबकि 26 मुंबई से, 12 कोलकाता से, 11 चेन्नई से और आठ बेंगलुरु से कनेक्ट होंगे। कुछ अन्य प्रस्तावित गैर महानगर मार्गों में गोरखपुर-लखनऊ, कोटा-जयपुर, चंडीगढ़-लखनऊ, विशाखापट्टनम-तिरुपति और नागपुर-पुणे शामिल हैं। रेलवे यूनियन के एक पदाधिकारी बताते हैं कि तेजस को चलाकर एक बड़ा दांव चला गया था जो पूरी तरह से असफल हो गया। ट्रेन होस्टेस के नाम पर ग्लैमर दिखाने की एक कोशिश की गई थी, लेकिन भारत में ऐसी कोशिशें नहीं चल सकती।

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