बिहार में एनआरसी नहीं, एनपीआर भी संशोधन के साथ ही मंजूर

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में एनआरसी को लागू करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एनआरसी पर दिए बयान के बावजूद इस मुद्दे को उठाने का कोई मतलब ही नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर एनपीआर प्रपत्रों से विवादास्पद क्लॉज की छूट मांगी है।

Published by SK Gautam Published: February 25, 2020 | 8:06 pm
Modified: February 25, 2020 | 8:13 pm

पटना: एनआरसी और एनपीआर को लेकर मचे घमासान के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि राज्य में एनआरसी को नहीं लागू किया जाएगा। इसके साथ ही एनपीआर की प्रक्रिया को 2010 के प्रावधानों के तहत पूरा किया जाएगा। इस बाबत बिहार विधानसभा में एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया है। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य की जनता को बधाई दी। राज्य में काफी दिनों से एनआरसी और एनपीआर को राजनीतिक घमासान मचा हुआ है और विपक्ष सीएम नीतीश कुमार पर राजनीतिक हमले कर रहा है।

बिहार में एनआरसी को लागू करने का कोई औचित्य नहीं- CM नीतीश कुमार

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में एनआरसी को लागू करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एनआरसी पर दिए बयान के बावजूद इस मुद्दे को उठाने का कोई मतलब ही नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर एनपीआर प्रपत्रों से विवादास्पद क्लॉज की छूट मांगी है। उन्होंने कहा कि मुझे भी यह नहीं पता कि मेरी मां का जन्म कब हुआ। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 7 अक्टूबर को एनपीआर के लिए पत्र भेजा था।

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2010 की तरह ही एनपीआर

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2010 व 2020 के एनपीआर में कुछ अंतर है। थर्ड जेंडर के बारे में, माता-पिता के जन्म स्थान के बारे में पूछा गया है, नहीं बताने पर इसे खाली छोडऩा है। हमने इस मुद्दे पर काफी चर्चा के बाद केंद्र सरकार को पत्र भेजा है और मांग की है कि एनपीआर का प्रारूप 2010 के अनुरूप रखा जाए। नीतीश पहले भी एनआरसी को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा की सभा में भी कहा था कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा। उन्होंने एनपीआर के संबंध में कहा था कि एनपीआर को 2010 में किए गए तरीके से ही अद्यतन किया जाएगा। वे नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।

विपक्ष ने किया हंगामा

बिहार विधानसभा एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर विपक्ष ने जमकर हंगामा हुआ। इसके साथ ही विपक्ष ने सीएए को काला कानून बताया जिस पर भाजपा के सदस्यों ने आपत्ति जताई। भाजपा के सदस्यों ने कहा कि विपक्ष देश के संविधान को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है और इसे किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

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तेजस्वी ने विपक्ष की जीत बताया

एनआरसी लागू न करने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित होने के बाद तेजस्वी यादव ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता की आरजेडी से जो उम्मीद थी, वो पूरी हुई। अब विधानसभा से भी यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया है। तेजस्वी ने कहा कि हमने राज्य के लोगों को विश्वास दिलाया था कि बिहार में एनआरसी को लागू नहीं होंने देंगे।

आखिरकार सरकार को विपक्ष के आगे घुटने टेकने पड़े। उन्होंने इसे विपक्ष की जीत बताते हुए कहा कि पहले तो सरकार यही कहती थी कि इससे एक इंच पीछे नही हटेंगे मगर उसे लालू यादव के खौफ के कारण पीछे हटना पड़ा। हमारी लड़ाई कामयाब हुई है। अब इसे लेकर किसी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। अब चर्चा सिर्फ राज्य के लोगों के रोजगार को लेकर ही होनी चाहिए।