शाहजहां ने नहीं बल्कि इस राजा ने बनवाया था दिल्ली का लाल किला

दिल्ली का लालकिला शाहजहां के जन्म से सैकड़ों साल पहले ही बन चुका था। तो आज हम आपको लालकिले के कुछ ऐसे पुरानी चीजों के मिलने के बारे में जो ये साबित कर सकते हैं कि यह लालकिला पहले से ही बना हुआ था। 

लखनऊ:  ‘दिल्ली का लालकिला’ इस ऐतिहासिक इमारत के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है कि ये किला कहां स्थित है  लेकिन इस किले के बारे अक्सर यहीं पढ़ाया भी जाता है कि शाहजहां ने बनवाया था लेकिन ऐसा नहीं है, आपको जानकर यह हैरानी होगी कि यह लाल किला शाहजहां ने नहीं बनवाया था।

बता दें कि दिल्ली का लालकिला शाहजहां के जन्म से सैकड़ों साल पहले ही बन चुका था। तो आज हम आपको लालकिले के कुछ ऐसे पुरानी चीजों के मिलने के बारे में जो ये साबित कर सकते हैं कि यह लालकिला पहले से ही बना हुआ था।

तो आईये जानते हैं इसके बारे में-

बता दें कि महाराज अनंगपाल तोमर  द्वारा दिल्ली शहर को बसाने के लिए बनाया गया था। दिल्ली का लाल किला शाहजहां से भी कई शताब्दी पहले पृथवीराज चौहान द्वारा बनवाया गया था। महाराज अनंगपाल तोमर और कोई नहीं बल्कि महाभारत के अभिमन्यु के वंशज तथा महाराज पृथ्वीराज चौहान के नाना जी थे।

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इतिहास के अनुसार लाल किला का असली नाम “लाल कोट” है, जिसे महाराज अनंगपाल द्वितीय द्वारा सन 1060 ईसा पूर्व में दिल्ली शहर को बसाने के लिए बनाया गया था। जबकि शाहजहां का जन्म ही उसके सैकड़ों वर्ष बाद 1592 ईसा पर्व में हुआ है।

वैसे बताया और पढ़ाया तो यह जाता है कि मुगलों ने हिन्दुस्तानी आर्किटेक्चर को कई बेहतरीन तोहफे दिए लेकिन दिल्ली के लाल किले की तो बात ही अलग  है। यह भी बताया जाता है कि ‘दिल्ली का लालकिला’ मुगलिया सल्तनत की कारीगरी का बेजोड़ नमूना माना जाता है।

दिल्ली का लाल किला के बारे जानते हैं कुछ और बातें-

1-इस किले को लाल पत्थरों से निर्मित किया गया है और इसी वजह से इसका नाम लाल किला पड़ा। इस किले के निर्माण में 10 साल लगे थे।

2-संगमरमर पर फूलों की नक्काशी यहां अद्भुत नजारे प्रस्तुत करते हैं। दो गुंबदों वाले इस किले को एक दीवार ने घेर रखा है। इस दीवार की लंबाई 2.41 किलोमीटर है।

3- हालांकि लालकिले के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसका डिजाइन आर्किटेक्ट उस्ताद अहमद लाहौरी ने तैयार किया था। उन्होंने ही ताजमहल का भी खाका खींचा था।

लाल किला 200 वर्षों तक मुगल बादशाहों के प्रमुख आवास के रूप में रहा है

4-साल 1747 में नादिर शाह ने दिल्ली पर चढ़ाई कर इसे लूटा और बाद में इसे अंग्रजों ने भी लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

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