डिफेंस एक्सपों में मोदी ने थामा रायफल, लगाया निशाना

भारत में डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग में असीमित संभावनाएं हैं। यहां Talent है और Technology भी है, यहां Innovation है और Infrastructure भी है

Published by Deepak Raj Published: February 5, 2020 | 3:45 pm
Modified: February 5, 2020 | 4:37 pm

लखनऊ।  भारत में डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग में असीमित संभावनाएं हैं। यहां Talent है और Technology भी है, यहां Innovation है और Infrastructure भी है, यहां Favourable Policy है और Foreign Investment की सुरक्षा भी है। यहां Demand है, Democracy है और Decisiveness भी है।

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भारत आज से नहीं बल्कि हमेशा से विश्व शांति का भरोसेमंद पार्टनर रहा है। दो World Wars में हमारा डायरेक्ट स्टेक ना होते हुए भी भारत के लाखों जवान शहीद हुए। आज दुनियाभर में 6 हज़ार से ज्यादा भारतीय सैनिक UN Peace-keeping Forces का हिस्सा हैं।

गलत ताकतों से बचाने के लिए Defence की दीवार खड़ी कर रहा है-Modi

मुझे गर्व है कि इस मामले में भारत ने Indigenous Technology का विकास किया है।आज ISRO भारत के लिए, पूरी दुनिया के लिए, Outer Space को Explore कर रहा है, तो भारत का DRDO इन Assets को गलत ताकतों से बचाने के लिए Defence की दीवार खड़ी कर रहा है।

गवर्नेंस से लेकर Security तक में अहम भूमिका निभा रही है

Outer Space में भारत की उपस्थिति, पहले से ही मजबूत है और आने वाले वर्षों में ये और सशक्त होने वाली है।भारत की स्पेस टेक्नॉलॉजी 130 करोड़ भारतीयों को गवर्नेंस से लेकर Security तक में अहम भूमिका निभा रही है।

 

वैसे मेरा ये भी सुझाव है कि देश की प्रमुख इंडस्ट्री बॉडीज को डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग का एक कॉमन प्लेटफॉर्म बनाना चाहिए जिससे वो रक्षा के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी के विकास और उत्पादन, दोनों का लाभ उठा सकें।

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भारत में डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग को और गति देने के लिए, और विस्तार देने के लिए नए लक्ष्य, नए टारगेट रखे गए हैं। हमारा लक्ष्य रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में MSMEs की संख्या को अगले 5 वर्षों में 15 हजार के पार पहुंचाना है।

 

आज भारत में दो बड़े डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें से एक तमिलनाडु में और दूसरा यहीं उत्तर प्रदेश में हो रहा है।